Pakistan Electricity Crisis: पाक में सिर्फ 25 दिन की बची बिजली! 70% इलाकों की होगी बत्ती गुल, गैस सप्लाई ठप
Pakistan Electricity Crisis: पाकिस्तान, जो अमेरिका-ईरान की चल रही जंग में चौधरी बनने चला था उसकी सारी हसरतें धरी की धरी रह गईं। हालत-ए-मुल्क इतनी खस्ता हो गई है कि सरकार एप के जरिए पेट्रोल-डीजल बेच रही है। जबकि गैस को लेकर मारामारी सड़कों तक पहुंच गई है। इसी बीच एक और संकट पाकिस्तान में हो गया है। दरअसल शहबाज शरीफ की सरकार को अब गर्मियों की चिंता सता रही है।
पाकिस्तान पर टूटेगा बिजली का कहर!
गर्मी शुरू हो चुकी है और बढ़ती बिजली की डिमांड को संभालने के लिए शरीफ सरकार एक हाइब्रिड प्लान पर काम कर रही है। इस प्लान में लोड-शेडिंग, बिजली बचाने के सख्त नियम और टैरिफ (बिजली दरों) में बढ़ोतरी शामिल हो सकती है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान में LNG की कमी और महंगे फर्नेस ऑयल की भयंकर किल्लत हो गई है। ऐसे में कोयला की समस्या और बढ़ रही है।

LNG सप्लाई लगभग खत्म होने वाली
खबरों के मुताबिक पाकिस्तान में अगले महीने से LNG की उपलब्धता लगभग शून्य हो जाएगी, भले ही अमेरिका-इजरायल युद्ध खत्म हो जाए। अभी LNG से देश की 21% से ज्यादा बिजली बनती है। वहीं, इम्पोर्टेड और लोकल कोयला मिलाकर लगभग 30% बिजली सप्लाई देते हैं, लेकिन इनकी उपलब्धता भी कम हो रही है। ऐसे में पाकिस्तान की बत्ती गुल होना तय है।
फर्नेस ऑयल से चल रहा काम, लेकिन कब तक?
फर्नेस ऑयल आमतौर पर कम इस्तेमाल होता है क्योंकि यह बहुत महंगा होता है, लेकिन संकट के समय यही बैकअप ईंधन बनता है। अभी देश के पास 360,000 टन से ज्यादा फर्नेस ऑयल स्टॉक में है, जो 25 दिन से ज्यादा चल सकता है। सरकार ने एहतियात के तौर पर लोकल ऑयल का एक्सपोर्ट भी रोक दिया है, लेकिन इससे भी बात नहीं बन रही।
बिजली बनाने की लागत कितनी बढ़ी
फरवरी में LNG से बिजली बनाने की लागत लगभग 20 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि इम्पोर्टेड कोयले से 13.50 रुपये प्रति यूनिट। लोकल गैस और कोयले से यह लागत 12-14 रुपये प्रति यूनिट के बीच थी। लेकिन फर्नेस ऑयल से बिजली बनाना बहुत महंगा है। इसकी लागत करीब 35 रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है। साथ ही, यह सिर्फ 30% पाकिस्तान की आपूर्ति कर पाएगी जिसमें आर्मी और सरकार का ही काम चल पाता है।
पाक में महंगी होगी बिजली
एक शुरुआती अनुमान के मुताबिक, फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट (FCA) के तहत बिजली की कीमतें 10-12 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ सकती हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि 5,000 मेगावाट क्षमता वाले चार बड़े LNG प्लांट बंद पड़े हैं। इतनी बड़ी लागत का बोझ किसी एक सेक्टर, खासकर इंडस्ट्री, पर डालना मुश्किल है। डीजल से बिजली बनाना बेहद महंगाहाई-स्पीड डीजल (HSD) से बिजली बनाना पहले ही 45 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा महंगा था, जो अब 80 रुपये प्रति यूनिट से ऊपर जा सकता है।
इसलिए इसे बिजली उत्पादन में शामिल नहीं किया जाएगा, क्योंकि डीजल की जरूरत ट्रांसपोर्ट और खेती में ज्यादा है। वहीं, गर्मी के पीक समय में बिजली की मांग 27,000 से 28,000 मेगावाट तक पहुंच जाती है। लेकिन अभी पीक टाइम में औसत डिमांड 14,000 मेगावाट से कम है और दिन में 9,000 मेगावाट से भी नीचे रहती है।
सोलर एनर्जी से थोड़ी राहत
सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल ने बिजली की डिमांड को कुछ हद तक कम किया है। लेकिन यह पाकिस्तान में इतने बड़े पैमाने पर नहीं है कि काम चल सके। फिर भी पीक टाइम में फर्नेस ऑयल प्लांट्स को चालू करना पड़ेगा क्योंकि ये जल्दी बिजली पैदा कर सकते हैं।
गैस सप्लाई भी ठप की कगार पर
गैस कंपनियों का कहना है कि बिजली सेक्टर को रोज सिर्फ 80 MMCFT गैस मिलेगी, जबकि मार्च में 150 MMCFT मिल रही थी। यानी अप्रैल से सप्लाई आधी से भी कम हो जाएगी। CNG सेक्टर की 50% सप्लाई पहले ही कम कर दी गई है और अब इसे पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इससे 25-30 MMCFT गैस बचाई जा सकती है, जिसे बिजली उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा।
घरेलू मिसमैनेजमेंट भी बड़ी समस्या
बाहरी संकट के साथ-साथ देश के अंदर कुप्रबंधन और विभागों के बीच टकराव भी हालात बिगाड़ रहा है। खासकर रेलवे और कोयला बिजली प्लांट्स के बीच विवाद के कारण 1,500-1,800 मेगावाट बिजली उत्पादन खतरे में है। रेलवे अधिकारी साहीवाल प्लांट के लिए कोयला लोड करने की परमीशन नहीं दे रहे हैं और जमशोरो प्लांट को वैगन नहीं मिल रहे। ये दोनों प्लांट बिजली सप्लाई के लिए बेहद अहम हैं।
विकल्प क्या हैं?
अगर ऐसा ही चलता रहा तो पाकिस्तान का 70 प्रतिशत इलाका बिजली की किल्लत से जूझेगा। वहीं आर्मी और सरकार के काम बिना बाधा के चलेंगे। जनता को अगर बिजली नसीब भी हुई तो फोन चार्ज करने लायक ही मिल पाएगी।
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