Pakistan Election: इलेक्शन या सलेक्शन? लालटेन छाप नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बनने की कैसी कर रहे तैयारी?

Pakistan Election 2024: पाकिस्तान में 8 फरवरी को मतदान होगा, लेकिन नतीजा पहले से तय लग रहा है और यही वजह है, कि पाकिस्तान में इस चुनाव को इलेक्शन नहीं, बल्कि सलेक्शन कहा जा रहा है।

गुरुवार के चुनावों के बाद, जिस व्यक्ति के प्रधान मंत्री बनने की सबसे अधिक संभावना है, वह पाकिस्तानी राजनीति का एक प्रसिद्ध चेहरा है, जो लगभग चार दशकों तक देश की सेवा करने का दावा इन दिनों देश की जनता से कर रहा है। ब्रिटेन में निर्वासन से वापस लाए जाने के बाद, तीन बार पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ चौथे कार्यकाल के लिए कुर्सी की खोज में हैं।

आइये जानते हैं, कि कैसे नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, उन्हें फौज क्यों प्रधानमंत्री बनाना चाह रही है और उनके दांव पर क्या लगा है?

Pakistan Election 2024

'पंजाब के शेर'

पाकिस्तान के तीन बार के प्रधान मंत्री नवाज शरीफ, जो कभी भी अपने कार्यकाल के पांच साल कुर्सी पर रहते हुए नहीं बिता पाए, वो गुरुवार को होने वाले चुनाव में सत्ता में वापसी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कट्टर समर्थकों के बीच 'पंजाब के शेर' के नाम से मशहूर नवाज शरीफ अपनी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को जीत दिलाने और एक बार फिर 24 करोड़ लोगों वाले देश में जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं।

पाकिस्तान में इस साल होने वाला चुनाव 2018 के पिछले चुनावों से बहुत अलग है। साल 2018 के चुनाव में नवाज शरीफ को इलेक्शन से ठीक तीन हफ्ते पहले भ्रष्टाचार के आरोप में 10 साल सजा सुनाकर जेल में बंद कर दिया गया और भविष्य में उनके सार्वजनिक पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

ठीक वैसे ही, जैसे इस बार के चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले इमरान खान को अलग अलग मामलों में 31 सालों की सजा सुनाई जा चुकी है।

इलाज के नाम पर चार सालों तक ब्रिटेन में निर्वासित जीवन जीने के बाद जब पाकिस्तानी कोर्ट ने जमानत दे दी, तो नवाज शरीफ वापस देश लौटे और इस दौरान इमरान खान को सत्ता से हटाकर उनके भाई शहबाज शरीफ देश की सत्ता संभालते रहे। शहबाज शरीफ ने अपने भाई के वापस पाकिस्तान लौटने का रास्ता तैयार किया और सेना के साथ समझौता कर हर एक मामले से उन्हें राहत दिलवाई।

नवाज शरीफ पाकिस्तान के वो इकलौते नेता रहे हैं, जिन्हें फौज ने बार बार प्पधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया भी है और बाहर फेंका भी है।

74 साल के हो चुके नवाज शरीफ पाकिस्तान के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, उनका इस्पात का व्यवसाय काफी बड़ा है और उन्होंने इससे बड़ी संपत्ति अर्जित की है। हालांकि, फिर भी समर्थक उन्हें मिट्टी से जुड़ा नेता बताते हैं।

सत्ता में लगातार बने रहने के बीच, उन्होंने कई साल जेल में या निर्वासन में बिताए हैं। उन्हें कभी सऊदी अरब में शरण मिली तो कभी ब्रिटेन में, जहां शरीफ परिवार के पास व्यापक लक्जरी संपत्तियां हैं, लेकिन हर बार नए उत्साह के साथ वो वापस पाकिस्तान लौटते हैं।

हालांकि, एक बार उनके पारिवारिक व्यवसाय इस्पात की फैक्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, लेकिन बाद में उन्होंने फिर से अपनी कंपनी पर वापस नियंत्रण हासिल कर लिया। वहीं, व्यापारिक नजरिए से नवाज शरीफ को आर्थिक उदारीकरण और मुक्त बाजार का समर्थक माना जाता है।

उन्होंने बैंकों और ऊर्जा उत्पादकों सहित कई प्रमुख राज्य उद्यमों के निजीकरण की निगरानी की है, आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार से ग्रस्त थी।

वह 60 अरब डॉलर (4.98 ट्रिलियन रुपये) के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के प्रमुख चालकों में से एक थे, जिसने पिछले दशक में इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच संबंधों को आधार बनाया है।

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नवाज शरीफ सरकार का तख्ता पलट

पाकिस्तान ने जब 1998 में घोषणा की थी, कि वो परमाणु शक्ति संपन्न शक्ति बन गया है, उस वक्त नवाज शरीफ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और भारत के न्यूक्लियर टेस्ट के कुछ हफ्तों के बाद ही पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण कर लिया था।

प्रधान मंत्री के रूप में अपने विभिन्न कार्यकालों के दौरान उन पर अदालतों को वफादार न्यायाधीशों से भर देने, संविधान के साथ छेड़छाड़ करने और अपनी पार्टी के सत्ता के आधार को मजबूत करने के लिए प्रांतीय चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाया गया।

उनका दूसरा कार्यकाल दो साल तक चला और 1999 में सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ को पद से हटाने की साजिश रचने के बाद उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया गया। उस दौरान नवाज शरीफ मौत की सजा पाने से भी बाल बाल बच गये और उन्हें देश से बाहर निकाल दिया गया।

एक दशक से भी ज्यादा समय तक विदेश में बिताने के बाद वह 2013 में सत्ता में वापस आये, जिसका एक कारण पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत और उसके सबसे शक्तिशाली निर्वाचन क्षेत्र पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में उनके भाई शहबाज शरीफ का मेहनती प्रदर्शन था।

लेकिन, 2016 में पनामा पेपर्स लीक मामले में उनके और उनके बच्चों के नाम आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और बाद में उन्हें भ्रष्टाचार के अलग-अलग आरोपों में दोषी ठहराया गया और जीवन भर के लिए पद से अयोग्य घोषित कर दिया गया और ये तीसरी बार था, जब वह पूर्ण कार्यकाल पूरा करने में नाकाम रहे।

सात साल की जेल की सज़ा उन्हें दी गई थी, मगर एक साल बाद ही उन्हें इलाज करवाने के नाम पर लंदन भेज दिया गया, जहां से उन्होंने लौटने से इनकार कर दिया। लेकिन, इमरान खान के सत्ता से बाहर जाने के बाद एक बार फिर से नवाज शरीफ की किस्मत ने उनका साथ देना शुरू कर दिया।

हाल के हफ्तों में एक-एक करके उनकी सजाओं को पलट दिया गया है या खारिज कर दिया गया है, जिससे "पंजाब के शेर" को फिर से दहाड़ने का मौका मिल गया है और अगले कुछ दिनों में एक बार फिर से नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

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