J-35A Stealth Fighters: पाकिस्तान ने चीन से 5th जेनरेशन फाइटर जेट खरीदने को दी मंजूरी, भारत के लिए कितना खतरा?
J-35A Stealth Fighters: पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, पाकिस्तान सरकार ने चीन से J-35A पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है, कि 24 महीने के भीतर ये लड़ाकू विमान पाकिस्तान की वायुसेना में शामिल हो जाएंगे।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है, कि यह फैसला चीन में आयोजित ज़ुहाई एयरशो 2024 में J-35A के डेब्यू के बाद फाइनल किया गया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है।

इस साल जनवरी में, पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने कहा था, कि "J-31 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने की नींव पहले ही रखी जा चुकी है" और यह "निकट भविष्य में" पाकिस्तानी एयरफोर्स का हिस्सा बन जाएगा।
J-35A फाइटर जेट में क्या क्षमताएं हैं?
J-35A, चीनी J-31 फाइटर जेट का एडवांस वेरिएंट है, जिसे बेचने के लिए विकसित किया गया है। J-31 की तुलना में, J-35A में कुछ और विशेषताओं को जोड़ा गया हैं।
- इसमें WS-19 इंजन लगाया गया है, जो बेहतर प्रदर्शन और थ्रस्ट प्रदान करते हैं
- इसमें ज्यादा सोफिस्टिकेटेड रडार सिस्टम और ए़डवांस सेंसर फ्यूजन लगाया गया है।
- इसके अलावा, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी होने की वजह से रडार इसे ट्रैक नहीं कर सकते।
- इस फाइटर जेट में हवा से हवा में और हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलें लगाई जा सकती हैं
- J-35A एवियोनिक्स चीन की वायु सेना में वर्तमान में सेवारत J-20 फाइटर के समान हैं।
यहां आपके लिए जानना जरूरी है, कि मार्च 2022 में पाकिस्तानी एयरलाइंस ने J-10C फाइटर जेट के पहले बैच को 15 स्क्वाड्रन 'कोबरा' में शामिल किया था, जो मिन्हास एयर बेस पर स्थित है। चौथी पीढ़ी का प्लस-प्लस फाइटर J-10C, चीनी एयरफोर्स में सबसे बेहतरीन फाइटर जेट है। इसकी कई बेहतरीन विशेषताओं में शामिल हैं:
रडार को चकमा देने की तेज क्षमता
- एडवांस सेंसर और हथियार
- शक्तिशाली इंजन, उच्च गतिशीलता
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, J-10C हल्का है और इंडियन एयरफोर्स के Su-30MKI की तुलना में कम पेलोड ले जाता है, लेकिन इसमें बेहतर एवियोनिक्स (AESA रडार) है और यह अपनी कीमत के साथ ज्यादा इंसाफ करता है।
भारत के मुकाबले काफी आगे चीन-पाकिस्तान
चूंकि यह मानने का कोई कारण नहीं है, कि J-35ए अधिग्रहण के लिए सरकार की मंजूरी पर पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट गलत है, इसलिए संभावना है, कि वर्ष 2030 तक, पाकिस्तानी एयरफोर्स J-35ए के 2 स्क्वाड्रन संचालित कर सकता है, जिसमें लगभग 40 लड़ाकू विमान शामिल होंगे।
उसी वर्ष तक, चीन की वायुसेना, जिसके बारे में माना जाता है कि उसने वर्तमान में लगभग 200 जे-20 लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, वो दोगुनी संख्या में फाइटर जेट तैनात कर सकता है।
इसके विपरीत, 2030 तक भारतीय वायुसेना के पास अपने भंडार में कोई भी स्टेल्थ लड़ाकू विमान नहीं होगा!
सबसे अच्छी बात यह है, कि हम उम्मीद कर सकते हैं कि भारतीय वायुसेना को अगले कुछ सालों में AMCA लड़ाकू विमान मिल जाएंगे, जिसका निर्माण HAL कर रही है। लेकिन, चीन और पाकिस्तान की वायुसेना में स्टेल्थ क्षमता के आने से भारत की प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से कितना बड़ा खतरा
स्टेल्थ फाइटर्स में नॉन-स्टेल्थ फाइटर्स की तुलना में बहुत छोटा रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) होता है। चूंकि फाइटर डिटेक्शन और ट्रैकिंग रडार आधारित होते हैं, इसलिए कम RCS से विरोधी की वायु रक्षा क्षमता कम हो जाती है। स्टेल्थ फाइटर्स की रडार डिटेक्शन रेंज नॉन-स्टेल्थ फाइटर्स की तुलना में काफी कम है, और हथियार-ग्रेड ट्रैक प्राप्त करने की रेंज आनुपातिक रूप से और भी कम है।
स्टेल्थ फाइटर्स के खिलाफ संचालन करते समय एयर डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन कम हो जाता है, क्योंकि उनकी डिटेक्शन रेंज कम होती है।
चीन ने हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें विकसित की हैं, जो J-20 और J-35A लड़ाकू विमानों को इंडियन एयरफोर्स (IAF) रडार पर प्रभावी रूप से ट्रैक किए जाने से पहले अपने हथियार लॉन्च करने की क्षमता प्रदान करते हैं। लिहाजा, चीन और पाकिस्तान से आने वाले खतरों को कम करके नहीं आंका जा सकता है और भारत को भी जल्द से जल्द स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने होंगे।












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