Pahalgam Attack: जब दुश्मन ने किया वार, तो दोस्तों ने भारत का थामा हाथ, आतंकियों को दी ये चेतावनी
Pahalgam Attack Update News: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया। पर्यटकों पर हुए इस क्रूर हमले में अब तक 20 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं। इस हमले ने न सिर्फ कश्मीर में हालातों की सच्चाई उजागर की, बल्कि भारत की विदेश नीति की ताकत भी दिखा दी - जब दुनिया के सबसे ताकतवर नेता प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े नजर आए।
ये हमला सिर्फ घाटी की शांति पर हमला नहीं था, ये भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि, कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती थी। लेकिन जैसे ही ये खबर आई, अमेरिका, रूस, इटली और UAE जैसे देशों ने जिस तेजी से भारत के पक्ष में अपना स्टैंड साफ किया, उसने ये जता दिया कि 'मोदी अकेले नहीं लड़ते' - उनके पास दुनिया के सबसे ताकतवर दोस्त हैं।

पुतिन से ट्रंप तक, कैसे दुनिया भारत के साथ खड़ी
व्लादिमीर पुतिन (रूस):
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने न सिर्फ इस हमले की कड़ी निंदा की, बल्कि यह भी कहा कि वे भारत के साथ आतंक के हर रूप के खिलाफ सहयोग और बढ़ाएंगे। यह बयान एक ऐसे वक्त में आया है, जब रूस खुद यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनावों से जूझ रहा है। पुतिन का संदेश दोहरी रणनीति का परिचायक है-एक ओर भारत को समर्थन, दूसरी ओर दक्षिण एशिया में स्थायित्व के लिए दबाव।
डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिका):
डोनाल्ड ट्रंप, जिनके साथ मोदी की 'Howdy Modi' वाली कैमिस्ट्री जगजाहिर है, उन्होंने भी ट्वीट कर साफ किया कि 'अमेरिका भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।' ट्रंप ने न सिर्फ घटना पर गहरा दुख जताया, बल्कि आतंकवादियों को सीधी चेतावनी भी दी। ट्रंप ने चेताते हुए कहा, कि भारत के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो भारत दौरे पर ही थे, उन्होंने भी तुरंत हमले की निंदा की और भारत के लोगों के साथ अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।
जॉर्जिया मेलोनी (इटली):
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी 'एकजुटता का संदेश' भेजते हुए इस हमले को 'मानवता के खिलाफ अपराध' बताया। यह भारत की Soft Power Diplomacy की सफलता को दर्शाता है, जहां भारत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा है।
संयुक्त अरब अमीरात:
इस्लामी देशों में से एक, UAE, जो भारत के रणनीतिक सहयोगी देशों में आता है, उसने भी न सिर्फ हमले की कड़ी आलोचना की बल्कि भारत सरकार को अपना समर्थन भी दोहराया। यूएई की कड़ी निंदा इस बात का संकेत है कि भारत अब खाड़ी देशों के साथ भी आतंकवाद पर Zero Tolerance नीति पर समर्थन हासिल करने में सफल हो रहा है।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
जब पीएम मोदी ने सऊदी अरब का आधिकारिक डिनर छोड़ा और दौरा छोटा कर भारत लौटने का फैसला लिया, तो ये संदेश गया कि 'देश पहले है'। इससे न सिर्फ देश में एक राजनीतिक नैरेटिव मजबूत होता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ये दिखाता है कि भारत अब आतंकवाद पर 'नो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में बंद का आह्वान, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दलों की एकजुटता इस बात की ओर इशारा करती है कि अब आतंकी घटनाओं पर सियासत से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।
क्यों अहम है यह एकजुटता?
- ये हमले पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का भारत को इंटरनेशनल मंच पर बदनाम करने का प्रयास है।
- दुनिया के बड़े राष्ट्रों का भारत के साथ आना ये दिखाता है कि भारत की कूटनीति कितनी मजबूत है।
- मोदी की व्यक्तिगत डिप्लोमैसी - ट्रंप से लेकर पुतिन और मेलोनी तक, अब वो सिर्फ दोस्त नहीं, भारत की ढाल बन चुके हैं।
ये हमला था, लेकिन जवाब भी मिलेगा... और अकेले नहीं मिलेगा
पहलगाम का हमला सिर्फ गोलियों की आवाज नहीं थी, वो एक साजिश थी - भारत की शांति, प्रगति और वैश्विक साख के खिलाफ। लेकिन जब दुनिया के सबसे ताकतवर नेता खुद भारत की आवाज बन जाएं, तो साफ है कि दुश्मन चाहे जितना जोर लगा ले - अब भारत अकेला नहीं है।












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