ऑपरेशन True Promise III: इजराइल पर तीसरी बार हमला कर सकता है ईरान, टॉप सीक्रेट परमाणु ठिकाने के विनाश का बदला?
Operation True Promise III: पिछले महीने ईरान में इजराइली हवाई हमलों को लेकर खुलासा हुआ है, परचिन में एक शीर्ष गुप्त प्रमुख परमाणु हथियार अनुसंधान सुविधा को नष्ट कर दिया गया है, जिससे तेहरान की परमाणु विस्फोटक उपकरण विकसित करने की क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा है।
और अब रिपोर्टों में कहा गया है, कि तेहरान जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है और कभी भी इजराइल के ऊपर वो इस साल का तीसरा हमला कर सकता है और ऐसी स्थिति में, दोनों देशों के बीच भीषण लड़ाई हो सकती है।

ईरान का सीक्रेट परमाणु ठिकाना हुआ ध्वस्त
कई अमेरिकी और इजराइली अधिकारियों का हवाला देते हुए एक्सियोस की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि "26 अक्टूबर को हुए इजराइली ऑपरेशन ने "परमाणु उपकरण में यूरेनियम को घेरने वाले प्लास्टिक विस्फोटकों को डिजाइन करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सोफिस्टिकेटेड उपकरणों को निशाना बनाया, जो इसे विस्फोट करने के लिए जरूरी है।"
तेहरान से लगभग 20 मील दक्षिण-पूर्व में परचिन सैन्य परिसर में "तालेघन 2" कॉम्प्लेक्स में ईरान ने परमाणु ठिकाना बना रखा है, और इस सुविधा पर दर्जनों इजराइली विमानों ने हमला किया था। इस सेंटर पर ईरान, ड्रोन और मिसाइलों का निर्माण भी करता है और एयर डिफेंस सिस्टम बैटरियों का भी निर्माण करता है और माना जा रहा है, कि इजराइली हमले से काफी नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, इजराइल आमतौर पर परमाणु-संबंधित स्थलों पर हमला करने से बचता है, लेकिन माना जा रहा है, कि तालेघन-2 परमाणु केन्द्र काफी ज्यादा सीक्रेट था और इसपर हुए हमले ने ईरान की परमाणु बम बनाने की क्षमता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।
हमले में ईरान को कितना बड़ा नुकसान हुआ है?
ईरान ने लंबे समय से कहा है, कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है और किसी भी सैन्य महत्वाकांक्षा से वो लगातार इनकार करता रहा है। लिहाजा, अगर वो हमले के प्रभाव को स्वीकार करता है, तो उसे परमाणु अप्रसार संधि के संभावित उल्लंघन को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जो वो कभी नहीं कर सकता है।
इजराइली अधिकारियों ने हमले के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया है। तालेघन-2 में विशेष उपकरणों को नष्ट करके, ईरान के परमाणु हथियार अनुसंधान प्रयासों को काफी हद तक पीछे धकेल दिया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस को बताया है, कि "यह हमला एक स्पष्ट संदेश था, कि इजराइलियों को ईरानी प्रणाली की महत्वपूर्ण जानकारी है, भले ही वह उन चीजों की बात हो, जिन्हें शीर्ष गुप्त रखा गया था और ईरानी सरकार में बहुत कम लोगों को पता था।"
अधिकारियों ने कहा है, कि ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए नष्ट किए गए उपकरणों को बदलने की आवश्यकता होगी। इजराइली अधिकारियों ने आगे कहा, कि ईरान द्वारा इसी तरह के उपकरण खरीदने के किसी भी प्रयास पर नजर रखी जाएगी, जिससे इजरायल को अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने में मदद मिलेगी। टाइम्स ऑफ इजराइल ने एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी के हवाले से कहा है, कि "यह उपकरण एक अड़चन है। इसके बिना, ईरानी फंस जाएंगे।" ऐसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विनाश तेहरान की परमाणु बम बनाने की दिशा में प्रगति करने की क्षमता को काफ मुश्किल बना देता है।
इजराइल से बदला लेने की फिराक में ईरान?
इस बीच, तेहरान टाइम्स के हवाले से IRGC बलों को संबोधित करते हुए मेजर जनरल होसैन सलामी ने कहा है, कि "आपको (इजराइल को) दर्दनाक झटके लगेंगे। जवाबी कार्रवाई का इंतज़ार करें।"
ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल अब्दोलरहीम मौसवी ने कहा, "हम अपनी प्रतिक्रिया का समय और तरीका तय करते हैं, और हम इसमें संकोच नहीं करेंगे। सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया, कि "हमारी जवाबी कार्रवाई विनाशकारी होगी।" पूर्व आईआरजीसी प्रमुख और ईरान की एक्सपीडिएंसी काउंसिल के मौजूदा सदस्य मोहसेन रेजाई ने कहा, कि ईरान इस साल तीसरी बार सीधे इजराइल पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने एक समारोह के दौरान कहा, "हम ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं।"
क्या यह ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए एक बड़ा झटका है?
सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों ने परचिन सुविधा पर हमलों की पुष्टि की है, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा हुआ स्थल है, जिसे 2003 में आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया था।
इस हमले ने इजराइल की खुफिया क्षमताओं का स्पष्ट संकेत दिया, जिसने ईरान के परमाणु ऑपरेशन की सबसे गुप्त परतों को भी भेद दिया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी इस हमले को एक संदेश के रूप में बताया है, कि इजराइल के पास ईरान की गुप्त गतिविधियों के बारे में गहरी जानकारी है।
इस साल की शुरुआत में, अमेरिका और इजराइल की खुफिया एजेंसियों ने परचिन के तालेघन 2 परिसर में फिर से गतिविधि का पता लगाना शुरू किया था। रिपोर्टों से संकेत मिलता है, कि ईरानी वैज्ञानिक कंप्यूटर मॉडलिंग, धातु विज्ञान और विस्फोटक अनुसंधान कर रहे थे, जो परमाणु हथियार बनाने की एक कोशिश है।
ये गतिविधियां कथित तौर पर इतनी गुप्त थीं, कि ईरानी सरकार के केवल एक छोटे से हिस्से को ही उनके बारे में पता था। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "उन्होंने वैज्ञानिक गतिविधि की, जो हथियार के उत्पादन के लिए आधार तैयार कर सकती थी। यह शीर्ष-गुप्त था। अधिकांश ईरानी सरकार को इसके बारे में पता नहीं था।"
लिहाजा, अब ईरान फिर से इजराइल पर हमले कर सकता है। लेकिन, अगर अब ईरान हमला करता है, तो उसका अंजाम विनाशक हो सकता है, क्योंकि पिछली बार अमेरिका में इलेक्शन के दबाव ने बेंजामिन नेतन्याहू के हाथ बांध रखे थे, लेकिन अब अमेरिका में चुनाव खत्म हो चुके हैं और डोनाल्ड ट्रंप जीत चुके हैं। ऐसी स्थिति में ईरान को भारी नुकसान हो सकता है।












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