“मुझे मोदी पर आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया”, श्रीलंका में CEB अफसर ने दिया इस्तीफा
श्रीलंका में सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कोलंबो, 13 जूनः श्रीलंका में सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। फर्डिन्डों कुछ दिन पहले तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने एक पवन ऊर्जा परियोजना अडानी को देने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दबाव बनाए जाने की बात कही थी। उनके इस बयान का श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी विरोध जताया था। बयान देने के दो दिन बाद फर्डिनेंडो ने माफी भी मांगी थी। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा कि उन्हें पीएम मोदी का नाम लेने के लिए मजबूर किया गया था।

पीएम मोदी पर लगाया था इल्जाम
श्रीलंका के बिजली प्राधिकरण के प्रमुख द्वारा वापस लिए गए आरोप पर सरकार ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले श्रीलंका के सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने शुक्रवार को एक संसदीय पैनल में यह इल्जाम लगाया था कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने उन्हें बताया है कि पीएम मोदी ने उन पर पवन ऊर्जा परियोजना को सीधे अडानी समूह को देने के लिए दबाव डाला था। फर्डिनेंडो के इस बयान से पूरे श्रीलंका में भारी हंगामा मच गया।

राष्ट्रपति ने किया था खंडन
अधिकारी के बयान के एक दिन बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने ट्विटर पर इसका खंडन किया। उन्होंने ट्वीट किया, "मन्नार में एक पवन ऊर्जा परियोजना के संबंध में एक COPE समिति की सुनवाई में CEB अध्यक्ष फर्डिनेंडो द्वारा दिए गए एक बयान का मैं खंडण करता हूं। मैं स्पष्ट रूप से किसी विशिष्ट व्यक्ति या संस्था को इस परियोजना को प्रदान करने के लिए प्राधिकरण से इनकार करता हूं।" इस बाबत उनके कार्यालय ने एक लंबा बयान भी जारी किया, जिसमें परियोजना पर किसी को प्रभावित करने का जोरदार विरोध किया गया था।

श्रीलंका में बिजली की भारी कमी
राष्ट्रपति राजपक्षे के कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि श्रीलंका में फिलहाल बिजली की भारी कमी है और राष्ट्रपति चाहते हैं कि जल्द से जल्द मेगा बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए। हालांकि, ऐसी परियोजनाओं को प्रदान करने में कोई अनुचित प्रभाव नहीं डाला जाएगा। इसमें बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए परियोजना प्रस्ताव सीमित हैं। लेकिन परियोजनाओं के लिए संस्थानों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो श्रीलंका सरकार द्वारा पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली के अनुसार सख्ती से किया जाएगा। "

अपने बयान से पलटे अधिकारी
हालांकि श्रीलंका में विवाद बढ़ने पर श्रीलंकाई अधिकारी अपने बयान से सीधे पलट गए। राष्ट्रपति राजपक्षे के कार्यालय द्वारा बयान जारी करने के एक दिन बाद, फर्डिनेंडो ने श्रीलंकाई दैनिक द मॉर्निंग में माफी मांगते हुए कहा कि संसदीय पैनल की मीटिंग में वह भावुक हो गए थे, जिस कारण उन्होंने झूठ बोल दिया। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारतीय प्रधान मंत्री का नाम लेने के लिए मजबूर किया गया था।

राहुल गांधी ने साधा निशाना
गौरतलब है कि फर्डिनेंडो के इस बयान के बाद भारत में भी विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने इस बयान से जुड़ी एक खबर के स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, "बीजेपी की उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की नीति अब सरहद पार कर के श्रीलंका तक चली गई है।" इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी श्रीलंकाई अधिकारी के बयान पर बनी खबर को शेयर करते हुए सवाल पूछा था।

पिछले साल श्रीलंका गए गौतम अडानी
हालांकि भारत सरकार की तरफ से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बताते चलें कि गौतम अडानी ने अक्टूबर 2021 में श्रीलंका का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और तत्कालीन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से मुलाकात भी की थी।












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