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बैलिस्टिक मिसाइल से हमले की मंजूरी देकर बाइडेन ने खोला परमाणु युद्ध का दरवाजा, यूक्रेन का जापान जैसा अंजाम?

Nuclear War: जो बाइडेन ने जाते जाते दुनिया को परमाणु युद्ध की आशंकाओं में झोंक दिया है। बाइडेन की मंजूरी मिलते ही वलोडिमीर जेलेंस्की ने आनन फानन में यूक्रेनी सेना को रूस के अंदर अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइल के हमले के आदेश दे दिए और मंगलवार को रूस के अंदर हमले कर भी दिए गये।

जिसके बाद व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर रूस ने अपनी परमाणु बम के इस्तेमाल को लेकर नियम बदल दिए, और साफ साफ कहा है, कि रूस के अंदर अगर यूक्रेन पश्चिमी देशों के हथियार का इस्तेमाल करता है, तो उसे रूस के खिलाफ नाटो देशों का हमला माना जाएगा और रूस ने परमाणु बम के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है।

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लिहाजा, रूस की यूक्रेन में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी, चीन की अपने भंडार में और ज्यादा परमाणु हथियार को शामिल करना, और उत्तर कोरिया का रूस में लड़ने के लिए सैनिकों को भेजने के साथ साथ अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण करना, जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप के लिए बहुत बड़ी मुश्किलें खड़ी करेंगे। और ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये होगी, कि अमेरिका के सामने आने वाले परमाणु खतरों से कैसे निपटा जाए?

ट्रंप को मुश्किल हालातों में फंसा गये जो बाइडेन?

अमेरिकी रणनीतिक अभिजात वर्ग, जिनमें वे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले रिपब्लिकन प्रशासनों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था, वो अब यह तर्क दे रहे हैं, कि अमेरिका को न सिर्फ अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण करना चाहिए, बल्कि उन्हें युद्ध के मैदानों पर उपयोग करने या परमाणु वातावरण में उन विरोधियों के खिलाफ ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए भी तैयार रहना है, जिनके पास भी परमाणु हथियार हैं।

माना जाता है, कि ट्रंप परमाणु हथियारों के मामले में कट्टर हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने तीन महत्वपूर्ण हथियार नियंत्रण समझौतों को रद्द कर दिया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समझौते को खारिज कर दिया था, जिससे ईरान के लिए परमाणु हथियार विकसित करना मुश्किल हो गया था।

फिर, उन्होंने राष्ट्रपति रीगन और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा हस्ताक्षरित 1987 की इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस संधि को भी खारिज कर दिया, क्योंकि उन्हें "लगता था" कि रूस धोखा दे रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि उन्होंने 2010 की रणनीतिक हथियार न्यूनीकरण संधि को बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसे START के रूप में जाना जाता है (एक स्थिति जिसे राष्ट्रपति बाइडेन ने न सिर्फ उलट दिया, बल्कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन को 2021 में इसे 2026 तक बढ़ाने के लिए भी मानाया)।

यूक्रेन में युद्ध और रूस को प्रतिबंधों के जाल में बांधने के बाद अमेरिकी अधिकारियों का कहना है, कि रूसी नेता START द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर है मॉस्को और वाशिंगटन ने 700 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), पनडुब्बियों और बमवर्षकों पर 1,550 रणनीतिक परमाणु हथियार तैनात नहीं किए हैं।

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क्या ट्रंप रूस के साथ नए सिरे से या नए START संधि पर सहमत होंगे?

हालांकि कहा जाता है, कि इसका उत्तर यूक्रेन में युद्ध की दिशा पर निर्भर करता है, लेकिन तथ्य यह है, कि बाइडेन प्रशासन भी चाहता था, कि इसके दायरे को संशोधित किया जाए ताकि अधिक रणनीतिक हथियारों की तैनाती की अनुमति मिल सके। अपने पिछले कार्यकाल के दौरान, START के विस्तार या नवीनीकरण के लिए ट्रंप का मुख्य विरोध यह था, कि ऐसी कोई भी संधि अब अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं होनी चाहिए और इसे तीन-तरफ़ा समझौता होना चाहिए, जिसमें चीन को भी शामिल किया जाए, जिसके पास 500 से ज्यादा परमाणु हथियार होने की आशंका है और 2030 तक उसके पास 1000 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं।

अमेरिका के पास कितने परमाणु हथियार हैं?

लेटेस्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका के पास अपने सक्रिय शस्त्रागार में लगभग 3,700 वॉरहेड हैं। इसमें 1,670 थर्मोन्यूक्लियर वॉरहेड शामिल हैं, जो जमीन और समुद्र पर 660 शक्तिशाली, लंबी दूरी की मिसाइलों पर तैनात हैं, जिन्हें रणनीतिक बमवर्षकों के जरिए टारगेट पर दागा जा सकता है, साथ ही कम दूरी के विमानों पर 100 "सामरिक" परमाणु बम भी हैं। रूस की तैनात परमाणु शक्ति आकार में लगभग बराबर है। अनुमान है कि चीन के पास वर्तमान में लगभग 500 परमाणु हथियार और 310 लंबी दूरी की, परमाणु-सशस्त्र बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।

क्या डोनाल्ड ट्रंप परमाणु हथियारों के विस्तार के पक्ष में हैं?

पिछले दो वर्षों में दिए गए उनके भाषणों के मुताबिक, ट्रंप, परमाणु शस्त्रागार के विस्तार के पक्ष में हैं। हालांकि उन्होंने चुनावी बाध्यताओं के कारण इसे अस्वीकार कर दिया है, लेकिन दूसरे ट्रंप प्रशासन के लिए 'प्रोजेक्ट 2025' ब्लूप्रिंट (उनके पूर्व अधिकारियों द्वारा लिखित) नेवादा राष्ट्रीय सुरक्षा स्थल पर परमाणु हथियारों का परीक्षण करने का आह्वान करता है, भले ही भूमिगत विस्फोट 1996 की व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (CTBT) का उल्लंघन करता है, जिस पर अमेरिका ने हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि अमेरिका ने 1992 से परीक्षण नहीं किए हैं।

हालांकि, अगर परमाणु शस्त्रागार को एडवांस करना है, तो ट्रंप को बढ़ते बजट पर विचार करना होगा और कांग्रेस की मंजूरी के लिए मनाना होगा। कांग्रेस के बजट कार्यालय (सीबीओ) ने अनुमान लगाया है, कि परमाणु शस्त्रागार को बनाए रखने और अपग्रेड करने के लिए 2023-2032 की अवधि में 756 बिलियन डॉलर से ज्यादा या औसतन 75 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष खर्च करने की जरूरत होगी।

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क्या पुतिन की तरह ट्रंप भी परमाणु युद्ध लड़ने के लिए तैयार हैं?

हालांकि, यह सब कहानी का एक हिस्सा है। दूसरा हिस्सा यह है, कि क्या पुतिन की तरह ट्रंप भी परमाणु युद्ध लड़ने के लिए तैयार हैं। और यहां, रणनीतिक अभिजात वर्ग के बीच एक बहस चल रही है।

जो तर्क जीतता हुआ दिख रहा है, वह यह है कि परमाणु हथियार युद्ध जीतने के लिए आवश्यक हो सकते हैं (वही गणित जो अमेरिका ने अगस्त 1945 में इंपीरियल जापान के साथ युद्ध जीतने के लिए इस्तेमाल किया था), क्योंकि सबसे सोफिस्टिकेटेड पारंपरिक हथियारों के साथ लंबे समय तक संघर्ष युद्ध को समाप्त नहीं कर सकता है (जैसे कोरियाई युद्ध जो जीत से अलग एक युद्धविराम या समझौते में समाप्त हुआ)।

जैसा कि मेजर जनरल ब्रैड गेरिक, यूएस आर्मी (रिटायर्ड), अटलांटिक काउंसिल के स्कोक्रॉफ्ट सेंटर फॉर स्ट्रैटेजी एंड सिक्योरिटी में एकवरिष्ठ साथी, और डोना विल्ट, जो पहले सेना के परमाणु रणनीतिकार और सेना के परमाणु और सी.डब्लू.एम.डी. संचालन प्रभाग के प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके हैं, वो तर्क देते हैं, "यह विश्वास करना कठिन है, कि यदि जीत की तलाश की जा रही है, तो परमाणु-सशस्त्र विरोधी के खिलाफ बड़े पैमाने पर युद्ध अभियान परमाणु नहीं हो सकते हैं। अगस्त 1945 में इंपीरियल जापान के साथ युद्ध जीतने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने जो गणित लगाया था, वही आज के लड़ाके इस्तेमाल करेंगे।

लिहाजा, सवाल ये हैं, कि क्या डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति बनते ही परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुके यूक्रेन से निपटना होगा और क्या, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने तक रूस यूक्रेन के अमेरिकी मिसाइलों की मार बर्दाश्त करेगा, या फिर ट्रंप के व्हाइट हाउस पहुंचने से पहले ही यूक्रेन का हाल जापान जैसा हो जाएगा?

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