अब गाय होगी नेपाल की राष्ट्रीय पशु, राजसी शासन प्रणाली का अंत
काठमांडू। रविवार को आखिरकार नेपाल को इसका नया संविधान मिल ही गया। इस नए संविधान के बाद से नेपाल में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं लेकिन इसके बाद भी नेपाल में एक बड़ा वर्ग इस संविधान की प्रशंसा कर रहा है।

यह नेपाल का पहला संविधान है जिसे कई वर्षों की मेहनत के बाद तैयार किया गया है। रविवार को नेपाल के पहले राष्ट्रपति राम बरन यादव ने इस संविधान को देश के नाम किया। नए संविधान के बाद अब नेपाल राजशाही सत्ता का अंत हो गया है और शासन की बागडोर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के हाथ में होगी।
कुछ पार्टियों ने किया संविधान का विरोध
नेपाल की कुछ लोकल पॉलिटिकल पार्टी इस संविधान का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि संविधान में दक्षिणी नेपाल के मधेसी और थारू जैसी माइनॉरिटी कम्यूनिटीज को नजरअंदाज किया गया है।
इन पॉलिटिकल पार्टीज का कहना है कि संविधान में इन समूहों की चिंताओं को दूर करने का कोई उपाय नहीं है। इस संविधान ने दुनिया के एकमात्र हिंदू राष्ट्र नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र में बदल दिया है।
संविधान से जुड़ी कुछ खास बातें
- नेपाल का नया संविधान 37 अध्याय वाला है।
- इसके तहत दो सदनों वाली संसद, एक सदन वाली विधानसभा को मान्यता मिली।
- साथ ही तीन जिला , प्रांतीय और संघीय स्तर पर तीन स्तरीय न्याय पालिका की व्यवस्था। .
- नए संविधान के बाद नेपाल अब पूरी तरह से हिंदु राष्ट्र नहीं है।
- देश में राजसी शासन की जगह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सत्ता के केंद्र होंगे।
- नेपाल में अब सभी धर्मों के पालन की आजादी होगी।
- हालांकि सनातन धर्म की रक्षा करना एक अहम कर्तव्य बताया गया है।
- नेपाल के हिंदुओं के लिए पवित्र मानी जाने वाली गाय राष्ट्रीय पशु घोषित।
- केंद्र में सरकार के अलावा भारत की तरह ही प्रांतीय सरकार को भी मान्यता।
- जिला और ग्राम स्तर पर भी शासन व्यवस्था होगी।
- देश में अभी सात राज्यों के नाम और सीमाएं तय नहीं हुए हैं।
- नए संविधान में आरक्षण और कोटा की भी व्यवस्था।
- नेपालियों, दलितों के साथ महिलाओं को भी शासन में आरक्षण का नियम।
- नए संविधान में थर्ड जेंडर को भी मान्यता दी गई है।
- सभी जातीय भाषाओं को मान्यता दी गई।
- सभी राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा चुनने का अधिकार।
- लेकिन नेपाली राष्ट्रीय भाषा रहेगी।












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