उत्तर कोरिया ने दिए अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ युद्ध की तैयारी के आदेश, किन जोंग का विनाशक ऐलान
North Korea News: उत्तर कोरियाई मीडिया ने दावा किया है, कि देश के नेता किम जोंग उन ने संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ ज्यादा क्षमता के साथ युद्ध-लड़ने का आह्वान किया है। किम जोंग उन का बयान उस वक्त आया है, जब रिपोर्ट है, कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका एक बार फिर से सैन्य अभ्यास कर रहे हैं।
उत्तर कोरियाई रक्षा मंत्रालय का मानना है, कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाला सैन्य अभ्यास उसके क्षेत्र में आक्रमण है, लिहाजा उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ा रहा है और बार बार अपनी सेना को युद्ध की तैयारी को अगले स्तर पर ले जाने का आदेश दे रहा है।

जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने पिछली बार सैन्य अभ्यास किया था, उस वक्त उत्तर कोरिया ने कई मिसाइलों का परीक्षण किया था।
उत्तर कोरिया का जंग का ऐलान
उत्तर कोरिया के आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने कहा है, कि बुधवार को पश्चिमी ऑपरेशनल ट्रेनिंग बेस की यात्रा के दौरान, किम जोंग उन ने कहा, कि सेना को "पूरे पैमाने पर युद्ध लड़ने के लिए अपनी लड़ाकू क्षमता में सुधार के लिए वास्तविक युद्धाभ्यास की संख्या में तेजी लाना चाहिए।"
इसके अलावा, किम जोंग उन ने मिलिट्री बेस पर उत्तर कोरिया की सेना की इकाइयों के युद्धाभ्यास की बारीक जांच की है और कहा, कि "दुश्मनों के लगातार खतरे को भारी ताकत से नियंत्रित करने" के लिए अत्यधिक तैयारी की जरूरत है।
केसीएनए के अनुसार, उत्तर कोरियाई नेता ने प्रमुख सैन्य अभियान बेस पर सैनिकों के फील्ड प्रशिक्षण का भी निरीक्षण किया और कहा, कि सेना को "मौजूदा स्थिति की आवश्यकताओं के मुताबिक युद्ध की तैयारियों को तेज करने के एक नए दिन की शुरुआत करनी चाहिए।"
अमेरिका-दक्षिण कोरियाई सैन्य अभ्यास
किम जोंग उन का युद्ध की तैयारी करने का आदेश उस वक्त आया है, जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच चल रहे युद्धाभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने 'आक्रमण' करार दिया। आपको बता दें, कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार से 11 दिवसीय वार्षिक कंप्यूटर-सिम्युलेटेड कमांड पोस्ट प्रशिक्षण और विभिन्न प्रकार के फील्ड अभ्यास शुरू किए हैं।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच हो रहे इस साल के अभ्यास में 48 फील्ड एक्सरसाइज किए जा रहे हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है। दोनों देशों ने कहा है, कि उनका अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति का है, क्योंकि उत्तर कोरिया अपने हथियारों के विकास में तेजी ला रहा है और संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों के साथ परमाणु संघर्ष की उत्तेजक धमकियां दे रहा है। उत्तर कोरिया ने जनवरी में लंबी दूरी की कई क्रूज मिसाइलों और एक नई सॉलिड ईंधन मध्यवर्ती दूरी की मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को और भड़का दिया है।

कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव
2024 में उत्तर कोरिया ने छह राउंड के मिसाइल परीक्षण किए थे। जिसका जापान के साथ अमेरिका और दक्षिण कोरियाई सेनाओं ने अपने ट्रेनिंग एक्सरसाइज का विस्तार करके जवाब दिया। 2022 के बाद से उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों की बौछार के मद्देनजर कोरियाई प्रायद्वीप पर काफी ज्यादा तनाव भड़का हुआ है।
कई एक्सपर्ट्स तो ये भी कह रहे हैं, कि कोरियाई प्रायद्वीप तनाव के उस प्वाइंट की तरफ बढ़ रहा है, जहां से विनाश की शुरूआत होती है, क्योंकि उत्तर कोरिया के पास जो हथियार हैं, वो पूरे क्षेत्र को खत्म कर देने के लिए काफी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है, कि उत्तर कोरिया का मानना है कि बड़े हथियारों के जखीरे से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भविष्य की कूटनीति में उसका प्रभाव बढ़ेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि उत्तर कोरिया की कोशिश इस बात को लेकर है, कि अमेरिका उसे परमाणु ताकत वाले देश के तौर पर मान्यता दे और उसके खिलाफ जो प्रतिबंध हैं, उसे हटाए।
खासकर इस साल, जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया, दोनों ही देशों में चुनाव होने वाले हैं, उस वक्त आशंका है, कि उत्तर कोरिया और तेजी के साथ मिसाइलों का परीक्षण शुरू करेगा।
हालांकि, दक्षिण कोरियाई एक्सपर्ट्स और अधिकारियों का कहना है, कि किम जोंग उन के हथियार जुटाने के अभियान ने देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है, जो दशकों के कुप्रबंधन और उनकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक तहस नहस कर दिया है।
लेकिन, किम जोंग उन ने झुकने के बजाए और भी आक्रामकता के साथ इसका जवाब दिया है। किम जोंग उन ने इसी साल उत्तर कोरिया की उस नीति को खत्म करने का ऐलान किया है, जिसमें भविष्य में दक्षिण कोरिया से पुर्नमिलन की संभावना को बनाए रखना था। इसके अलावा, उन्होंने दक्षिण कोरिया को स्थायी दुश्मन की लिस्ट में भी शामिल कर लिया है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीर तनाव का केन्द्र बन गया है।












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