उत्तर कोरिया में हंसने पर लगाई गई पाबंदी, किम जोंग ने जनता को हर वक्त उदास रहने का दिया आदेश

उत्तर कोरियाई लोगों ने कहा है कि, पिछले साल हमने देखा है कि, कि जो लोग हंसते हुए पाए गये हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें फिर से नहीं देखा गया है।

प्योंगयांग, दिसंबर 17: उत्तर कोरिया में देश के सभी लोगों के हंसने पर पाबंदी लगा दी गई है और सनकी तानाशाह किम जोंग उन का ये फैसला सख्ती के साथ लागू कर दिया गया है। ये फैसला 10 दिनों के लिए लागू किया गया है और अगर इन 10 दिनों में कोई भी उत्तर कोरिया का निवासी हंसता हुआ पाया जाता है, तो फिर उसे सख्त सजा दी जाएगी। इसके साथ ही अगले 10 दिनों तक उत्तर कोरिया में किसी भी तरह के जश्न मनाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है और देश के सभी लोगों को अगले 10 दिनों तक उदास रहना है, यहां तक कि अगले 10 दिनों तक सनकी तानाशाह किम जोंग उन ने देश के लोगों के रोने पर भी पाबंदी लगाने का ऐलान किया है।

10 दिनों तक हंसने पर पाबंदी

10 दिनों तक हंसने पर पाबंदी

उत्तर कोरिया में हंसने, खुश होने, जश्न मनाने या फिर रोने पर यह पाबंदी पूर्व नेता किम जोंग इल की मृत्यु की दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर लगाई गई है। वहीं, उत्तर कोरियाई लोगों के शराब पीने पर 11 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। उत्तर कोरिया के सरकारी अधिकारियों ने जनता को आदेश दिया है कि जब तक उत्तर कोरिया उनकी मृत्यु का शोक मना रहा है, तब तक वे खुशी के कोई संकेत नहीं दिखाएंगे। आपको बता दें कि, किम जोंग इल ने 1994 से 2011 तक, अपनी मृत्यु होने तक उत्तर कोरिया पर शासन किया था और उनकी मौत होने के बाद उनके तीसरे और सबसे छोटे बेटे किम जोंग उन ने देश की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। किम जोंग उन अपने पिता की तरफ ही तानाशाह और सनकी शख्सियत के लिए जाने जाते हैं।

जश्न मनाया तो मिलेगी सख्त से सख्त सजा

जश्न मनाया तो मिलेगी सख्त से सख्त सजा

किम जोंग उन ने अपने पिता किम जोंग इल की मृत्यु के दस साल बाद उत्तर कोरियाई लोगों को 11 दिनों के शोक की अवधि का पालन करने के लिए मजबूर किया है और इस दौरान उनके हंसने या शराब पीने पर पाबंदी लगा दी गई है। उत्तरपूर्वी सीमावर्ती शहर सिनुइजू के एक उत्तर कोरियाई ने रेडियो फ्री एशिया (आरएफए) को बताया कि, "शोक की अवधि के दौरान हमें शराब नहीं पीनी चाहिए, हंसना नहीं चाहिए या फिर किसी भी काम से छुट्टी नहीं लेनी चाहिए। हमें अपना काम करना है, लेकिन उदास होकर।"

दुकान से खरीददारी की इजाजत नहीं

दुकान से खरीददारी की इजाजत नहीं

उत्तर कोरियाई सूत्रों ने डेली मेल को बताया कि, उत्तर कोरियाई लोगों को किम जोंग इल की मौत की बरसी पर आज, यानि 17 दिसंबर को किराने की खरीदारी करने की अनुमति नहीं है। सूत्र ने कहा कि, 'अतीत में कई लोग जो शोक की अवधि के दौरान शराब पीते या नशे में पकड़े गए थे, उन्हें गिरफ्तार किया गया और उन्हें वैचारिक अपराधियों के रूप में माना गया। और उन्हें ले जाया गया और फिर वो लोग कभी नहीं देखे गये''। सूत्र ने कहा कि, 'यदि शोक की अवधि के दौरान आपके परिवार के सदस्य की मृत्यु भी हो जाती है, तो भी आपको जोर से रोने की इजाजत नहीं है और जब शोक की अवधि खत्म हो जाए, उसके बाद ही आप मृतक के शरीर को घर से बाहर निकाल सकते हैं। इसके साथ ही शोक की अवधि के दौरान देश के लोग अपना जन्मदिन भी नहीं मना सकते हैं।'

69 साल की उम्र में हुई थी मौत

69 साल की उम्र में हुई थी मौत

क्रूर, दमनकारी और तानाशाही के लिए कुख्यात नेता किम जोंग इल ने उत्तर कोरिया पर 17 सालों तक राज किया था और इस दौरान उत्तर कोरिया में उसने दहशत का राज कायम कर दिया था, जिसे अब उसका बेटा किम जोंग उन आगे बढ़ा रहा है। किम जोंग इल का 69 वर्ष की आयु में 17 दिसंबर 2011 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वहीं, उसकी मौत के बाद हर साल उत्तर कोरिया में 10 दिनों के शोक का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस साल उनकी मृत्यु की दसवीं वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए 11 दिनों तक शोक का आयोजन किया गया है और देश में कई तरह के सख्त प्रतिबंध लगाए गये हैं।

लोगों पर रखी जा रही है नजर

लोगों पर रखी जा रही है नजर

उत्तर कोरिया के दक्षिण ह्वांगहे प्रांत के एक निवासी ने कहा कि, पुलिस अधिकारियों से लोगों पर सख्त नजर रखने के लिए कहा गया है और जश्न मनाने वालों या फिर हंसने वालों को फौरन गिरफ्तार करने के लिए कहा गया है। सूत्र ने डेली से रेडियो आरएएफ से बात करते हुए कहा कि, 'दिसंबर के पहले दिन से सामूहिक शोक की अवहेलना करने वालों पर नजर रखने और उनपर नकेल कसने के लिए पुलिस अधिकारियों को खास निर्देश दिए गये हैं।'' सूत्र ने कहा कि, ''पुलिस के लिए यह महीने भर की स्पेशल ड्यूटी है। मैंने सुना है कि कानून प्रवर्तन अधिकारी बिल्कुल नहीं सो सकते हैं।'

कंपनियों के लिए सख्त निर्देश

कंपनियों के लिए सख्त निर्देश

सूत्र ने यह भी कहा कि, नागरिक समूहों और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों को शोक की अवधि के दौरान गरीबी में रहने वालों की देखभाल करने का आदेश दिया गया है, क्योंकि देश खाद्य संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि, 'सामाजिक व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है और कंपनियों को आदेश दिया गया है कि इस दौरन वो कर्मचारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करें। इसके साथ ही देश के लोगों को आदेश दिया गया है, कि वो अपने अपने इलाके में रहने वाले भिखारियों की इस दौरान मदद करें और उनके लिए भोजन का बंदोवस्त करें।

भारी परेशान हैं उत्तर कोरिया के लोग

भारी परेशान हैं उत्तर कोरिया के लोग

अज्ञात निवासी ने रेडियो आरएएफ से बात करते हुए कहा कि, किम जोंग इल और उनके पिता किम इल सुंग के लिए शोक उत्तर कोरियाई के दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि, आप सोच सकते हैं कि, अगले 10 दिनों तक बिना हंसे, बिना रोए लोग कैसे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि, 'मुझे बस उम्मीद है कि किम जोंग इल के शोक की अवधि को किम इल सुंग के शोक की अवधि की तरह ही एक सप्ताह तक छोटा कर दिया जाए।

किम जोंग उन के परिवार को जानिए

किम जोंग उन के परिवार को जानिए

किम इल सुंग ने 1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना की थी और उसके बाद से किम परिवार की तीन पीढ़ियों ने उत्तर कोरिया पर शासन किया है। जब 1994 में किम इल सुंग की मृत्यु हुई, तो उनके सबसे बड़े बेटे किम जोंग इल को सत्ता विरासत में मिली। किम जोंग उन, किम जोंग इल के तीसरे और सबसे छोटे बेटे हैं और उन्होंने 2011 में अपने पिता की मृत्यु के बाद सत्ता संभाली थी। किम जोंग इल की मृत्यु की दसवीं वर्षगांठ मनाने के लिए, उत्तर कोरिया के विभिन्न प्रांतों में उनकी फोटोग्राफी की प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं और उनकी स्मृति में संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पिता की प्रशंसा में देश भर में आयोजन

पिता की प्रशंसा में देश भर में आयोजन

पुर्योंग काउंटी में रहने वाले एक निवासी ने कहा कि, जहां वो रहते हैं, वहां पर प्रदर्शनी लगाई गई है और कई लोग लगातार भाषण दे रहे हैं। उसने कहा कि, ''किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल की प्रशंसा में गाने गाए जा रहे हैं और उनकी महानता की कहानियां लोगों को सुनाई जा रही है।' वहीं, उस आदमी ने कहा कि, ''देश की तानाशाह ने पिता की बरसी के दौरान देश की स्थिति को नरक बना दिया है, इतने सख्त नियम की जगह अगर सर्दी के मौसम में लोगों को लकड़ियां दी जातीं, तो शायद उसे जलाकर लोगों को सर्दी से कुछ राहत मिलती।

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