अफगानिस्तान में राज के लिए तालिबान का प्लान तैयार, लोकतंत्र का खात्मा, पूर्व सैनिकों से बनेगी नई फौज
नई दिल्ली, 19 अगस्त: अफगानिस्तान की सत्ता अब पूरी तरह से तालिबान के हाथों में आ गई है। जिस वजह से वहां नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल था कि आखिर अफगानिस्तान में लोकतंत्र रहेगा या नहीं। इस पर धीरे-धीरे रुख साफ होने लगा है। अब संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने एक इंटरव्यू में साफतौर पर कहा कि उनका विजन पहले से साफ है। ऐसे में वहां पर लोकतंत्र की जगह सिर्फ शरिया कानून लागू होगा।

परिषद चलाएगी सरकार
इंटरव्यू में तालिबान के वरिष्ठ नेता वहीद उल्लाह हाशमी ने कहा कि अफगानिस्तान पर अब एक परिषद शासन कर सकता है, जबकि इस्लामी समूह के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा परिषद का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि तालिबान अफगानिस्तान कैसे चलाएगा, इस मुद्दे को अंतिम रूप अभी नहीं दिया गया है। हम इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे कि हमें अफगानिस्तान में किस प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था लागू करनी चाहिए क्योंकि ये साफ है कि वहां पर सिर्फ शरिया कानून ही चलेगा। लोकतंत्र का अफगानिस्तान में कोई आधार भी नहीं है।
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शासन के लिए पुराना प्लान
हाशमी के मुताबिक वो तालिबान नेतृत्व की एक बैठक में शामिल होंगे, जो इस हफ्ते के अंत में शासन के मुद्दों पर चर्चा करेगी। अभी उनकी प्लानिंग उसी तरह से है, जैसे पिछली बार 1996 से 2001 तक उन्होंने सत्ता को चलाया था। वहीं दूसरी ओर हिबतुल्लाह अखुंदजादा शासन करने वाले परिषद के अध्यक्ष होंगे, जिनका पद राष्ट्रपति के बराबर होगा। हाशमी के मुताबिक तालिबान पूर्व पायलटों और अफगान सेना के पूर्व जवानों से भी संपर्क करेगा।

बनेगी नई फौज
हाशमी ने आगे बताया कि अभी उनकी योजना तालिबान के लिए एक राष्ट्रीय बल बनाने की है, जिसमें पूर्ववर्ती अफगान सरकार के लिए लड़ने वाले सैनिक और पायलट होंगे। इसके अलावा तालिबानी लड़ाकों और इच्छुक सरकारी सैनिकों को भी शामिल किया जाएगा। उनमें से अधिकांश ने तुर्की, जर्मनी और इंग्लैंड में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसी वजह से वो उनसे पदों पर वापस आने के लिए प्यान तैयार कर रहे हैं। हाशमी ने माना कि उनके संगठन को सेना में सुधार चाहिए, लेकिन उनको अभी अफगानी सैनिकों की जरूरत है।

ये हैं सर्वोच्च नेता
आपको बता दें कि अभी तालिबान के तीन सर्वोच्च नेता हैं। जिसमें मुल्ला उमर का बेटा मौलवी याकूब, शक्तिशाली उग्रवादी हक्कानी नेटवर्क का नेता सिराजुद्दीन हक्कानी और अब्दुल गनी बरादर, जो दोहा में राजनीतिक ऑफिस का प्रमुख है। साथ ही वो संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक है।












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