निकारागुआ के राष्ट्रपति ओर्तेगा और पूरी सरकार के अमेरिका आने पर प्रतिबंध

वॉशिंगटन, 17 नवंबर। अमेरिका ने निकारागुआ के राष्ट्रपति डानिएल ओर्तेगा पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है. साथ में उनकी पत्नी, उपराष्ट्रपति रोजारियो मुरिलो और अन्य सरकारी अधिकारियों वे मंत्रियों को भी अमेरिका आने की मनाही होगी.
निकारागुआ में 7 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव हुए थे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन चुनावों को फर्जीवाड़ा बताते हुए उनकी आलोचना की है. चुनावों से पहले ही विपक्ष के 40 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया. इनमें सात ऐसे थे जो चुनाव लड़ने वाले थे. इस तरह ओर्तेगा के चौथी बार लगातार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया है.
अमेरिकी प्रतिबंध का अर्थ
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ओर्तेगा और उनके मंत्रियों पर प्रतिबंध के जिस आदेश पर दस्तखत किए हैं, उसमें कहा गया है, "ओर्तेगा सरकार की दमनकारी और शोषक कार्यवाइयों और इन्हें समर्थन देने वाले लोगों को चलते अमेरिका को यह कदम उठाना पड़ा है."
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यह प्रतिबंध चुने हुए सभी नेताओं पर लागू होगा. इनमें सुरक्षा बल, जज, मेयर और अन्य अधिकारी भी शामिल हैं. आदेश कहता है, "राजनीतिक कैदियों को पुलिस और जेल अधिकारियों द्वारा दी जा रहीं शारीरिक और मानसिक यातनाएं असहनीय हैं और उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता."
वैसे, यह पहली बार नहीं है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ओर्तेगा पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. पहले भी उन पर प्रतिबंध लगते रहे हैं लेकिन उनका कोई खास असर नहीं हुआ. इसलिए विश्लेषकों को संदेह है कि नये प्रतिबंध उनके व्यवहार में कुछ बदलाव ला पाएंगे.
सोमवार को ही अमेरिका ने निकारागुआ सरकार पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. कनाडा और युनाइटेड किंग्डम ने भी ओर्तेगा सरकार पर प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया है.
कौन हैं डानियल ओर्तेगा?
1930 के दशक से निकारागुआ निरंकुश सोमोसा कबीले के नियंत्रण में था. सैंडिनिस्ता नेशनल लिबरेशन फ्रंट का नेतृत्व करने वाले डानिएल ओर्तेगा 1979 में तानाशाह अनस्तासियो सोमोसा को उखाड़ फेंकने में सफल रहे. ओर्तेगा ने तब पांच सदस्यीय परिषद के हिस्से के तौर पर निकारागुआ का नेतृत्व किया. उन्होंने 1985 से 1990 तक देश के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के तौर पर काम किया.
इसके बाद, कई सालों तक विपक्ष में रहने और उदारवादी एफएसएलएन सदस्यों द्वारा चलाए गए सैंडिनिस्ता रेनोवेशन मूवमेंट (एमआरएस) के बाद, ओर्तेगा को फिर से 2006 में राष्ट्रपति चुना गया. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस चुनाव को लेकर कई सवाल उठाते हैं. सत्ता में वापस आने के बाद, ओर्तेगा ने अपने लाभ के लिए देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव शुरू कर दिया.
इसके दो साल बाद, कोस्टा रिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति केविन कैसास-जमोरा ने चेतावनी देते हुए लिखा था, "निकारागुआ के ओर्तेगा को मुगाबे (दूसरा जिम्बाब्वे तानाशाह) न बनने दें." कैसास-जमोरा के शब्द भविष्यवाणी साबित हुए. 2011 में, ओर्तेगा ने तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ा और अंततः जीतकर संविधान का उल्लंघन किया. अब वह चौथी बार राष्ट्राध्यक्ष बनने जा रहे हैं.
रिपोर्टः विवेक कुमार (एपी, रॉयटर्स)
Source: DW
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