हिंदू समर्थक गीर्ट वाइल्डर्स की सरकार का मुस्लिम शरणार्थियों के खिलाफ आपातकाल का ऐलान, निकाले जाएंगे मुसलमान?
Dutch Government Asylum policy: अवैध शरणार्थी संकट को खत्म करने के लिए नीदरलैंड की सरकार ने नए कठोर आव्रजन विरोधी उपाय लागू करने की योजना बनाई है, जो यूरोपीय संघ में सबसे सख्त उपायों में से एक होगा, इसका मकसद शरणार्थियों पर लगाम लगाना है।
सत्तारूढ़ गठबंधन के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को घोषित की गई इसकी योजनाओं में सख्त सीमा जांच, "उपद्रवियों" को "जैसे को तैसा" दंड देना, परिवार के पुनर्मिलन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा, जो वयस्क बच्चों को उनके माता-पिता से मिलने से रोकेंगे, और देश से बाहर निकालने पर फोकस किया गया है।

डच सरकार, देश की पहली सरकार है जिसने गीर्ट वाइल्डर्स की दक्षिणपंथी, आव्रजन विरोधी फ्रीडम पार्टी को सरकार में शामिल किया है, जिसने नवंबर में डच संसद की लगभग एक चौथाई सीटें जीती थीं। उनकी पार्टी के पास सरकार का प्रवास और शरण मंत्रालय है, जिसकी जिम्मेदारी मार्जोलिन फेबर संभाल रही हैं।
गीर्ट वाइल्डर्स अकसर भारत के मुद्दों पर बोलते रहते हैं और उन्हें मुस्लिम आतंकवाद और चरमपंथ का भारी विरोधी माना जाता है। उन्होंने विवादों में घिरी नुपूर शर्मा का खुलकर समर्थन किया था।
डच सरकार की शरणार्थी आपातकाल की घोषणा
फेबर ने एक वीडियो संदेश में कहा, कि "मैं अब तक की सबसे सख्त शरण नीति का लक्ष्य बना रही हूं।" उन्होंने इस फैसले के पीछे अवैध शरणार्थियों की वजह से देश के लोगों को हो रही दिक्कतें, उन्हें आवास, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा में मिलने वाली दिक्कतों का हवाला दिया है।
उन्होंने कहा, कि योजना "कानूनी रूप से शरण संकट की घोषणा करना है, जो मुझे इससे निपटने के लिए उपाय करने की अनुमति देगा।"
ऐसा आपातकालीन कानून, सरकार को संसद की मंजूरी का इंतजार किए बिना ही फैसले करने की इजाजत देगा।
सरकारी कार्यक्रम में लिखा गया है, कि "नीदरलैंड को यूरोपीय संघ में सबसे सख्त प्रवेश नियमों वाले सदस्य राज्यों की श्रेणी में शामिल होना चाहिए।"
डच प्रधान मंत्री डिक शूफ ने शुक्रवार को कहा, कि सरकार, यूरोपीय आयोग से 'यूरोपीय संघ की शरण और प्रवास नीतियों' से बाहर निकलने के लिए कहेगी और यह अनुरोध अगले सप्ताह ब्रुसेल्स को भेजा जाएगा।
शूफ ने आपातकालीन उपाय और नियोजित शरण संकट कानून का बचाव करते हुए कहा, कि "हम अपने देश में प्रवासियों की बड़ी आमद को सहन नहीं कर सकते। लोग शरण संकट का सामना कर रहे हैं।"
हालांकि, यह पूछे जाने पर, कि सरकार कितनी तादाद में शरणार्थियों को देश से बाहर निकालने जE रही है, प्रधानमंत्री ने फिलहाल इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।
विपक्ष ने की सरकार की आलोचना
वहीं, विपक्षी सदस्यों ने पहले ही फेबर के इस प्लान की आलोचना की है, और इसे "लोकतांत्रिक विरोधी" बताया है। डच काउंसिल फॉर रिफ्यूजीज ने गुरुवार को कहा, कि वह "गहरी चिंता" में है कि "शरणार्थियों को इन उपायों के लिए बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी"।
संगठन ने तर्क दिया, कि फोर्स मैज्योर क्लॉज युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं के लिए हैं, जबकि देश की शरण समस्याएं राजनीतिक विकल्पों के परिणाम हैं। संगठन ने कहा, कि "नीदरलैंड में शरणार्थियों की अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या नहीं है।"
माना जा रहा है, कि शरणार्थी आपातकाल के बाद देश से शरणार्थियों को बाहर निकाला जाएगा, जिनमें ज्यादातर मुसलमान हैं। नीदरलैंड समेत कई यूरोपीय देशों में हालिया समय में गाजा पट्टी के समर्थन में विरोध प्रदर्शन देखे गये हैं और कई जगहों पर हिंसक घटनाएं भी हुई हैं, जिसने लोगों को भड़का दिया है और यूरोपीय सरकारों पर शरणार्थी संकट से निपटने के लिए कानून बनाने का भारी दबाव आ गया है।












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