Explainer: मां सीता की जन्मभूमि जनकपुर से अयोध्या तक लिंक रोड... नेपाल का भारत सरकार को दिया प्रस्ताव क्या है?

Janakpur Ayodhya Old link Road: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के उद्घाटन में अब सिर्फ एक महीना बचा है, और नेपाल इस बात से उत्साहित है, कि यह राम मंदिर के बनने से नेपाल के विकास और उसके लिए पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।

नेपाल का जनकपुर, भगवान राम की पत्नी माता सीता का जन्मस्थान है और नेपाल सरकार उम्मीद कर रही है, कि दुनिया भर से जो तीर्थयात्री, जो राम के जन्मस्थान पर प्रभु का दर्शन करने आते हैं, वे मां सीता के जन्मस्थान की भी यात्रा करेंगे।

Janakpur Ayodhya Old link Road

शुक्रवार को भारत में नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा, कि दोनों देश जनकपुर और अयोध्या के बीच "सिस्टर सिटी रिलेशनशिप" स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं।

श्री राम मंदिर के उद्घाटन से पहले शंकर प्रसाद शर्मा, जनकपुर को रामायण सर्किट का "अनिवार्य" हिस्सा बता रहे हैं। 2014 में भारत सरकार द्वारा परिकल्पित, रामायण सर्किट भगवान राम के जीवन को दर्शाता है और इसमें नेपाल के जनकपुर के साथ-साथ रामायण से संबंधित प्रमुख तीर्थ स्थल भी शामिल हैं।

पिछले हफ्ते नेपाल दूतावास के समन्वय में इनक्रेडिबल चैंबर ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित रामायण सर्किट पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा, कि दोनों देश सदियों से एक-दूसरे के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य स्थान रहे हैं।

जनकपुर-अयोध्या लिंक क्या है?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा, कि "राम मंदिर के उद्घाटन के बाद, नेपाल से अयोध्या जाने वाले भक्तों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो जाएगी... राम मंदिर निर्माण के कारण अयोध्या अब पर्यटकों ले लिए प्रमुख गंतव्य स्थान बनने जा रहा है, इसलिए जनकपुर भी काफी महत्वपूर्ण है। भारत से नेपाल तक बेहतरीन सड़क और रेल संपर्क हैं, और नेपाल के भीतर भी वे आगे विकसित हो रहे हैं।"

उन्होंने कहा, मां सीता का जन्मस्थान, जानकी मंदिर नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और यह भारत और नेपाल के बीच संबंधों को मजबूत करने के प्रमुख घटकों में से एक बन गया है।

उन्होंने कहा, कि "भारत और नेपाल रामायण सर्किट पर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं, जनकपुर एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दोनों देशों में पर्यटन विकास में सहायता करेगा। थाईलैंड और इंडोनेशिया में भी ऐसे लोग हैं, जो राम और सीता के बारे में जानते हैं और उन्हें अयोध्या और जनकपुर जैसी जगहों में दिलचस्पी है। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।"

शर्मा ने कहा, "भारत की तरह नेपाल में भी एक बाल्मीकि आश्रम है।" उन्होंने कहा, कि "नेपालियों का मानना है कि यह मूल धार्मिक आश्रम है, जहां सीता ने वनवास के दौरान कई साल बिताए थे। और इससे पता चलता है, कि नेपाल में कितने लोग रामायण - भगवान राम के दर्शन और आदर्श - को पसंद करते हैं। नेपाल नेपाल के साथ-साथ भारत में भी रामायण सर्किट का समर्थन, विकास और प्रचार करना चाहेगा।"

Janakpur Ayodhya Old link Road

शर्मा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी लिखा, कि "जनकपुर धाम के मेयर मनोज कुमार साह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करके खुशी हुई। वे यहां इनक्रेडिबल चैंबर ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आए थे, और जनकपुर और अयोध्या के बीच सिस्टर सिटी संबंध स्थापित करने के लिए भी काम कर रहे हैं।"

PM मोदी ने विकास के लिए दिया था अनुदान

जनकपुर के मेयर मनोज साह, जो शुक्रवार के कार्यक्रम के लिए नई दिल्ली में थे, उन्होंने कहा, कि 2018 में जनकपुर की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने क्षेत्र के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की थी। हालांकि, परियोजना अभी तक क्रियान्वित नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया में है।

इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में नेपाली पीएम प्रचंड उर्फ पुष्प कमल दहल की भारत यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, कि रामायण सर्किट "भारत और नेपाल के बीच एक कनेक्शन" है।

पीएम मोदी ने इससे पहले जनकपुर से अयोध्या को जोड़ने वाली बस सेवा को हरी झंडी दिखाई थी। 500 भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली भारत गौरव पर्यटक ट्रेन को 2022 में रामायण सर्किट के हिस्से के रूप में भारत और नेपाल के बीच रवाना किया गया, जो अपनी तरह की ऐसी पहली सेवा थी।

Janakpur Ayodhya Old link Road

वास्तव में, पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित 15 विषयगत सर्किटों में से, रामायण सर्किट और बौद्ध सर्किट, सिर्फ दो ऐसे अंतरराष्ट्रीय सर्किट हैं, जिनमें नेपाल भी शामिल है। इसे ऐसे समय में नेपाल को सांस्कृतिक रूप से अपने साथ मिलाने का भारत का प्रयास भी माना जाता है, जब वह अपने सबसे बड़े ऋणदाता चीन के भारी आर्थिक प्रभाव में है।

भारत और नेपाल दोनों सर्किटों को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं।

भारत और नेपाल, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-प्रचारक नरेंद्र ठाकुर का कहना है, कि भारत-नेपाल संबंध सरकारों और भौगोलिक सीमाओं से परे हैं, क्योंकि वे दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं।

कार्यक्रम के दौरान ठाकुर ने कहा, "रामायण सर्किट न केवल दक्षिण एशियाई देशों, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा और इसपर सावधानी से काम करने की जरूरत है।"

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