मालदीव के बाद नेपाल में चीन ने कर दिया खेला? दोनों वामपंथी पार्टियों ने साथ मिलकर किया सरकार बनाने का ऐलान
Nepal Political Crisis: क्या मालदीव के बाद चीन ने नेपाल में भी खेला कर दिया है? ये सवाल इसलिए, क्योंकि नेपाल के प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल अपने वर्तमान सहयोगी, मध्यमार्गी नेपाली कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ने का फैसला कर लिया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस के साथ बनाए गये गठबंधन को बाय बाय कहते हुए एक नया गठबंधन बनाने के लिए केपी शर्मा ओली की पार्टी के साथ हाथ मिलाने का ऐलान कर दिया है। नेपाली प्रधानमंत्री के एक सहयोगी ने इसकी पुष्टि कर दी है।

पूर्व माओवादी गुरिल्ला नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पिछले साल नेपाली कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ अन्य छोटे समूहों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार का गठन किया था, जिसमें सबसे बड़ी भारत समर्थक नेपाली कांग्रेस पार्टी थी, जिसे अब सरकार से बाहर कर दिया गया है।
नेपाल में चीन ने बनवाई नई सरकार?
नेपाल सरकार से चीन का बाहर आना भारत के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि केपी शर्मा ओली का चीन प्रेम किसी से छिपा नहीं है। लिहाजा, सवाल है, कि क्या मालदीव के बाद चीन ने नेपाल में भी भारत को झटका दे दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाली कांग्रेस के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और प्रधानमंत्री प्रचंड के बीच मनमुटाव के बाद प्रचंड ने कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने का फैसला किया है। बताया जा रहा है, कि इस गठबंधन में दरार डालने के लिए नेपाल में मौजूद चीनी राजदूत ने काफी अहम भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री प्रचंड की माओवादी सेंटर पार्टी, जो 275 सदस्यीय नेपाली संसद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है, उसने नेपाली कांग्रेस पर आरोप लगाया है, कि वो प्रधानमंत्री प्रचंड को खुले हाथ से काम नहीं करने दे रही है और कुछ मंत्रियों को हटाने और कैबिनेट में फेर बदल करने के प्रधानमंत्री के फैसले में बाधा बन रही है। माओवादी सेंटर पार्टी ने इसके लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना की थी।
प्रधानमंत्री प्रचंड के प्रेस सचिव गोविंदा आचार्य ने कहा, कि पूर्व गुरिल्ला प्रमुख दो मुख्य विपक्षी दलों - नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन-यूएमएल) और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवारों सहित एक नए मंत्रिमंडल का नाम घोषित कर सकते हैं।
आचार्य ने विस्तृत जानकारी दिए बिना समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, कि "मुख्य रूप से गठबंधन सरकार में नीतिगत मतभेद थे जिससे प्रधानमंत्री के लिए नेपाली कांग्रेस के साथ काम करना मुश्किल हो गया था। इसलिए वह यूएमएल और आरएसपी को नए गठबंधन के साथ नई सरकार का गठन कर रहे हैं।"

प्रचंड ने क्यों गिराई गठबंधन सरकार?
यूएमएल नेता प्रदीप ग्यावली ने कहा है, कि अगर प्रधानमंत्री प्रचंड, नेपाली कांग्रेस से "अलग" हो गए हैं, तो उनकी पार्टी प्रधानमंत्री का समर्थन करेगी। हालांकि, टिप्पणियों के लिए आरएसपी से तत्काल संपर्क नहीं हो सका।
प्रधानमंत्री की पार्टी के अधिकारियों ने कहा है, कि प्रधानमंत्री प्रचंड देश के वित्त मंत्री प्रकाश शरण महत समेत कई अन्य मंत्रियों को सरकार से बाहर करना चाहते थे। ये सभी मंत्री नेपाली कांग्रेस कोटे से थे। प्रधानमंत्री का कहना था, इन मंत्रियों ने 40 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले देश के विकास को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है।
महत ने कहा है, कि देश की आर्थिक स्थिति पिछले साल की तुलना में अब बेहतर है। दहल की माओवादी सेंटर पार्टी और नेपाली कांग्रेस संसद के ऊपरी सदन राष्ट्रीय परिषद की कुर्सी पर भी दावा कर रहे हैं, जो नए कानून बनाने के लिए महत्वपूर्ण संसदीय निकाय है।
नेपाली कांग्रेस पार्टी के महासचिव विश्व प्रकाश शर्मा ने कहा, कि माओवादियों के साथ गठबंधन "लगभग ध्वस्त" हो गया है, उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी नई स्थिति पर चर्चा करने के लिए बैठक कर रही है।
आपको बता दें, कि संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में 2006 के शांति समझौते के तहत मुख्यधारा में शामिल होने से पहले दहल ने 1996 से एक दशक लंबे खूनी विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिसमें 17,000 से ज्यादा लोगों की मौते हुईं। 2008 में 239 साल पुरानी राजशाही को समाप्त करने और गणतंत्र बनने के बाद से नेपाल में 13 सरकारें बदल चुकी हैं और एक भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है।












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