नेपाल में चरम पर सत्ता संघर्ष: संसद भंग करने के खिलाफ प्रचंड गुट का विरोध-प्रदर्शन का एलान
नेपाल में सत्ता विरोधी गुट प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ प्रदर्शन करने का एलान किया है। प्रधानमंत्री के विरोधियों का कहना है कि संसद भंग करने का प्रस्ताव पूरी तरह से असंवैधानिक है।
Agitation against House Dissolution: नेपाल: नेपाल में सत्ता के लिए संघर्ष चरम पर पहुंच चुका है। लोकतंत्र लागू होने के बाद नेपाल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। लेकिन, इन सबके बीच नेपाल की सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर का सरकार विरोधी गुट ने धरने के तीसरे चरण की शुरूआत कर दी है। सत्ता विरोधी गुट नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ प्रदर्शन करने का एलान किया है। कम्यूनिस्ट पार्टी के अंदर का ये गुट नेपाल की संसद को भंग करने का विरोध कर रहा है।
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नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल
नेपाल में पिछले कई महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल चरम पर है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद भंग कर दिया। जिसके खिलाफ प्रचंड गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। इन सबके बीच संसद भंग करने का जमकर विरोध किया जा रहा है। प्रधानमंत्री का विरोधी गुट संसद भंग करने को असंवैधानिक करार दे रहा है। शुक्रवार को भी प्रचंड गुट ने जमकर प्रदर्शन किया था। जिसमें नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ हजारों लोग शामिल हुए थे। ओली विरोधियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने कड़ी मेहनत से मिले लोकतांत्रिक गणराज्य प्रणाली को खतरे में डाल दिया है। हमने ओली को सही करने की कोशिश की, लेकिन हम नाकाम रहे। प्रचंग गुट ने फिर से प्रधानमंत्री के संसद भंग करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने का एलान कर दिया है।
EC ने पीएम को पार्टी से निकालने पर रोक लगाई
वहीं, नेपाल चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री को पार्टी से निकालने पर फिलहाल रोक लगा दी है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि पार्टी के अंदर दोनों गुटों का फैसला कानून के खिलाफ है, लिहाजा नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर जो बदलाव किया गया है, वो असंवैधानिक है, लिहाजा हम उसपर रोक लगा रहे हैं। नेपाल चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा है, कि दोनों गुटों के निर्णय पार्टी के क़ानून के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थिति को अपडेट नहीं किया जा सकता है। हमने केपी ओली और पुष्पा कमल दहल को सूचित कर दिया है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में कलह क्यों?
2018 में केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने मिलकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया था। दोनों नेता ने अपनी अपनी पार्टियों का एक पार्टी में विलय कर दिया था। सरकार बनाने के बाद केपी शर्मा ओली नेपाल के प्रधानमंत्री बने। लेकिन, 2020 में जून के बाद दोनों नेताओं में अनबन की खबरें आने लगीं। बताया जा रहा है कि केपी शर्मा ओली अकेले ही सरकार के तमाम फैसले लेने लगे। यहां तक की मंत्रिमंडल विस्तार में भी केपी शर्मा ओली ने प्रचंड गुट से बात तक नहीं की। दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल में पदों के अलावा अलग अलग संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को लेकर भी गहरे मतभेद हो गये थे। और फिर सत्ता बंटवारे को लेकर दोनों नेता आपस में भिड़ गये।
पिछले साल 20 दिसंबर को नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अचानक नेपाली संसद को भंग करके नए चुनावों की घोषणा कर दी थी। इसको लेकर पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड का खेमा उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। प्रचंड गुट के साथ पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल भी हैं। अब प्रचंड गुट ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिसपर नेपाल चुनाव आयोग ने फिलहाल रोक लगा दी है।












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