भूकंप प्रभावित नेपाल की दिल-खोलकर मदद कर रहा भारत, राहत सामग्री की दूसरी खेप भेजी
Nepal Earthquake News: भारत से नौ टन आपातकालीन राहत सामग्री की दूसरी खेप सोमवार को भूकंप प्रभावित नेपाल पहुंच गई है, क्योंकि पहाड़ी देश में 5.6 तीव्रता से एक और भूकंप का झटका आया है। दूसरा झटका, नेपाल में आए शक्तिशाली भूकंप के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें कम से कम 153 लोग मारे गए हैं।
काठमांडू में भारतीय दूतावास ने कहा है, कि राहत सामग्री की दूसरी खेप सोमवार को भारतीय वायु सेना के विशेष सी-130 विमान से नेपालगंज पहुंचाई गई। इस खेप में आवश्यक चिकित्सा और स्वच्छता आपूर्ति, तंबू, स्लीपिंग बैग और कंबल शामिल हैं।

नेपाल की मदद करता भारत
भारतीय मिशन के उपप्रमुख प्रसन्ना श्रीवास्तव ने राहत सामग्री की दूसरी खेप बांके के मुख्य जिला पदाधिकारी श्रवण कुमार पोखरेल को सौंपी है। राहत सामग्री नेपाल में भूकंप प्रभावित परिवारों के लिए है, क्योंकि लोगों को भोजन, गर्म कपड़े और दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय दूतावास ने कहा, कि "यह जाजरकोट में आए भूकंप के बाद नेपाल सरकार को समर्थन देने के भारत सरकार के प्रयासों का हिस्सा है... भारत जाजरकोट भूकंप के बाद नेपाल सरकार को हर संभव सहायता देने के लिए दृढ़ है।"
अधिकारियों ने बताया कि राहत सामग्री में 625 यूनिट प्लास्टिक तिरपाल और टेंट, 1,000 यूनिट स्लीपिंग बैग, 1,000 कंबल, 70 बड़े आकार के टेंट, 35 पैकेट टेंट के सामान, दवाएं और 48 अन्य सामान शामिल हैं।
वर्तमान संकट में, भारत पहला देश है, जो नेपाल की मदद कर रहा है। रविवार को भारत वे 10 करोड़ रुपये मूल्य की आपातकालीन राहत सामग्री की 10 टन की खेप नेपाल पहुंचाई थी, जिसमें टेंट, तिरपाल चादरें, कंबल और स्लीपिंग बैग के साथ-साथ आवश्यक दवाएं और चिकित्सा उपकरण शामिल थे।
नेपाल में जाजरकोट भूकंप
नेपाल में शुक्रवार आधी रात से ठीक पहले 6.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 153 लोगों की मौत हो गई और 250 से अधिक अन्य घायल हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी नेपाल के जजरकोट और रुकुम पश्चिम जिलों में आए भूकंप से सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के लगभग 8,000 घर क्षतिग्रस्त हो गए।
भूकंप का असर काठमांडू और आसपास के जिलों और यहां तक कि पड़ोसी भारत में नई दिल्ली में भी महसूस किया गया।
भूकंप के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कि "नेपाल में भूकंप के कारण जानमाल की हानि और क्षति से बहुत दुखी हूं। भारत नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं और हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।"
वहीं, नेपाल सेना के प्रवक्ता कृष्ण प्रसाद भंडारी के मुताबिक, नेपाल सेना ने भूकंप के तुरंत बाद घटना स्थल पर बचाव कार्य करने के लिए शुक्रवार को अपने कर्मियों को तैनात कर दिया है।
आपदा से बचे लोगों ने रविवार को अपने मृत रिश्तेदारों का अंतिम संस्कार किया। दुर्गम इलाका होने के कारण अभी भी कई इलाकों में राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों ने कहा, कि उनकी सारी फसलें, भोजन और कीमती सामान मलबे में बर्बाद हो गए हैं।
गौरतलब है कि पहाड़ी नेपाल में भूकंप आना आम बात है। 2015 में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने लगभग 9,000 लोगों की जान ले ली और करीब 10 लाख संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया। सरकार की आपदा के बाद की ज़रूरतों के आकलन (पीडीएनए) रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल दुनिया का 11 वां सबसे अधिक भूकंप-प्रवण देश है।
भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र के आंकड़ों से पता चलता है कि 1 जनवरी 2023 से अब तक नेपाल में 4.0 और उससे अधिक तीव्रता के कुल 70 भूकंप आए हैं। इनमें से 13 की तीव्रता 5 और 6 के बीच थी जबकि तीन की तीव्रता 6.0 से ऊपर थी।












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