मंगल पर 'एलियंस' की खोज से नासा 7 फीट दूर, इस वजह से हो रही पहुंचने में दिक्कत
नई दिल्ली: मंगल ग्रह पर लंबे वक्त से जीवन की तलाश हो रही है। इसके लिए नासा ने एक रोवर भी उसकी सतह पर भेजा, जो लगातार वहां से अलग-अलग तरह के डेटा पृथ्वी पर भेज रहा है। अब नासा बोफिन्स ने दावा किया है कि वो एलियंस का राज सुलझाने के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। जल्द ही वो इसको लेकर खुशखबरी देंगे। (तस्वीरें-NASA)

अमीनो एसिड की खोज शामिल
नासा बोफिन्स के मुताबिक अगर रोवर लाल ग्रह में सात फीट नीचे खुदाई करते हैं तो वे एलियन से जुड़े सबूतों का पता लगा लेंगे। इस खोज में मंगल पर अमीनो एसिड की खोज शामिल है, जो प्रोटीन बनाने के लिए एक घटक है। ये अमीनो एसिड ही अंतरिक्ष में जीवन की खोज की दिशा में गेम चेंजर साबित होगा। वहीं दूसरी ओर Astrobiology जर्नल में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक ब्रह्मांडीय किरणें (Cosmic Rays) मंगल ग्रह पर जीवन से जुड़े सबूतों को तेजी से मिटा रही हैं।

नासा वैज्ञानिक ने कही ये बात
नासा के मैरीलैंड के स्पेस फ्लाइट सेंटर के अलेक्संडर पावलोव के मुताबिक उनका मंगल मिशन काफी सही चल रहा है। अभी तक उसने दो इंच खुदाई कर ली है। अगर वो 6.5 या 7 फीट खुदाई कर लेगा तो वो एलिंयस की जानकारी आसानी से पा सकता है। उन्होंने बताया कि मंगल की सतह में अमीनो एसिड होगा, जिसको नष्ट होने में 20 मिलियन साल लगते हैं। अगर उससे जुड़े सैंपल हाथ लग गए, तो ये पता चल जाएगा कि वहां पर जीवन था या नहीं। हालांकि वहां के हालात अनुकूल नहीं है, जिस वजह से सात फीट की खुदाई में वक्त लगेगा।

पृथ्वी जैसा था मंगल?
अलेक्संडर ने आगे कहा कि वैसे 20 मिलियन साल आपको सुनने में बहुत ज्यादा वक्त लग रहा होगा, लेकिन ये ब्रह्मांड के हिसाब से काफी कम समय है। इतने साल पहले मंगल काफी हद तक हमारे ग्रह पृथ्वी जैसा ही था। अरबों साल पहले वहां पर एक घना वातावरण रहा होगा, जिसने ब्रह्मांडीय किरणों को सतह तक पहुंचने से रोका होगा।

क्या हैं ब्रह्मांडीय किरणें?
आपको बता दें कि ब्रह्मांडीय किरणें अंतरिक्ष में शक्तिशाली घटनाओं जैसे तारों और सूरज में विस्फोट से उत्पन्न होती हैं। वे ठोस चट्टान में प्रवेश करती हैं और फिर कार्बनिक अणुओं को नष्ट कर देती हैं। वैज्ञानिक इस पर भी शोध कर रहे हैं कि ब्रह्मांडीय किरणें अमीनो एसिड को कितने दिनों में नष्ट कर सकती हैं।

पहले वहां पानी था?
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर पहले पानी हुआ करता था, जिस वजह से वहां पर जीवन की संभावनाएं भी थीं। इसके अलावा वो पृथ्वी की तरह नीले रंग का दिखता था। इसके बाद कोई घटना हुई, जिससे पानी सूख गया और वो धीरे-धीरे लाल ग्रह बन गया। वैज्ञानिक इसे गुत्थी को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।












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