विश्व के सबसे शक्तिशाली एंटीना में एक साथ 19 तारों से मिले रहस्यमयी सिग्नल, उड़ी वैज्ञानिकों की नींद
विश्व के सबसे शक्तिशाली रेडियो एंटीना में 19 सितारों से रहस्यमयी सिग्नल्स डिटेक्ट किए गये हैं। इन सिग्नल्स ने वैज्ञानिकों के लिए खगोल विज्ञान में एक नया दरवाजा खोल दिया है।
नई दिल्ली, अक्टूबर 12: हमारे ब्रह्मांड में क्या-क्या रहस्यमयी चीजें मौजूद हैं, इसका पूरी तरह से पता इंसान लाखों सालों में भी नहीं लगा सकता है और इस वक्त जब खगोल विज्ञान अपने प्रारंभिक अवस्था में है, उस वक्त कई ऐसे रहस्यमयी सिग्नल हमारे वैज्ञानिकों को मिल रहे हैं, जिनसे उनकी नींदे उड़ जाती हैं। दुनिया के सबसे शक्तिशाली रेडियो एंटीना ने एक साथ 19 अलग अलग सितारों से रहस्यमयी सिग्नल्स को कैच किया है, जिन्हें डिटेक्ट करने के बाद अब वैज्ञानिक भी चकरा गये हैं कि आखिर इन सिग्नल्स का राज क्या है? (सभी तस्वीर-सौजन्य नासा)

एक साथ 19 ग्रहों से सिग्नल
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की टीम के अनुसार, सभी संकेत पृथ्वी से 165 प्रकाश वर्ष तक लाल बौने सितारों से आए हैं, और चार सिग्नल्स ऐसे हैं, जिनकी स्टडी से अनुमान लगाया जा रहा है कि ये ग्रह छिपे हुए हो सकते हैं। डच नेशनल ऑब्जर्वेटरी के विशेषज्ञों की टीम ने नीदरलैंड में स्थित शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप, लो फ़्रीक्वेंसी एरे (LOFAR) के जरिए एक साथ 19 सितारों से सिग्नल प्राप्त किए हैं। अलग अलग ग्रहों से आने वाले सिग्नल्स की स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों और खगोलविदों का कहना है कि, शक्तिशाली रेडियो तरंगों का उत्सर्जन कई ग्रह करते रहते हैं और उनके चुंबकीय तरंगे हवाओं के साथ फैलते रहते हैं। लेकिन, यह पहली बार हुआ है, जब खगोलविद एक एक्सोप्लैनेट से रेडियो तरंगों का पता लगाने में कामयाब हुए हैं, और यह 'रेडियो खगोल विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम' है।

रहस्यमयी सिग्नल्स का राज
खगोल वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि जो सिग्नल मिले हैं, वो रहस्यमयी हैं, लेकिन वो ग्रह रहने योग्य हैं या नहीं, उन ग्रहों पर जीवन है या नहीं, इसका कुछ भी पता अभी तक उन सिग्नल्स से नहीं चला है। इसके साथ ही इन सिग्नल्स की स्टडी से ये भी पता नहीं चल पाया है कि इन ग्रहों का आकार क्या है और क्या वहां पर कोई जीवन है? इस स्टडी के प्रमुख लेखक डॉ बेंजामिन पोप ने कहा कि, उनके परिणाम हमारे अपने अलावा अन्य सितारों की परिक्रमा करने वाली दुनिया की खोज में नई तकनीकों को जन्म दे सकते हैं। पहले, खगोलविद स्थिर रेडियो उत्सर्जन में सिर्फ निकटतम सितारों का पता लगाने में सक्षम थे, जैसे कि प्रॉक्सिमा सेंटॉरी, जो कि पृथ्वी से सिर्फ चार प्रकाश वर्ष दूर है, लेकिन अब दूर के सितारों के बारे में भी पता लगाने में हम सक्षम हुए हैं।
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खुलेंगे खगोल दुनिया के राज
वैज्ञानिकों का मानना है कि रेडियो सिग्नल्स इंटरस्टेलर गैस या ब्लैकहोल जैसा एक्सोटिका था, लेकिन वैज्ञानिकों की टीम के मुताबिक, दूर के तारों से रेडियो संकेतों का पता लगाने से उन सितारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों को खोजने के साधन के रूप में रेडियो खगोल विज्ञान की दुनिया का दरवाजा खुल जाता है। शोधकर्ताओं ने लाल बौने सितारों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो सूर्य से बहुत छोटे हैं और उन्हें तीव्र चुंबकीय गतिविधि के लिए जाना जाता है जो तारकीय चमक और रेडियो उत्सर्जन को संचालित करता है। हालांकि, कुछ पुराने और चुंबकीय शक्ति से निष्क्रीय हो चुके सितारों ने वैज्ञानिकों की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है।

छुपे हुए सितारों की होगी खोज
अध्ययन के लेखक लीडेन विश्वविद्यालय के डॉ जोसेफ कॉलिंगम ने कहा कि टीम को विश्वास है कि ये रेडियो सिग्नल्स सितारों की चुंबकीय कनेक्शन की वजह से आ रहे हैं, जो अलग अलग सितारों की परिक्रमा कर रहे हैं। ये कुछ उसी तरह का हो सकता है, जैसे बृहस्पति की कक्षा में घुमने वाले उनके चंद्रमा। वैज्ञानिक डॉ. जोसेफ कॉलिंगम ने कहा कि, ''हमारी अपनी पृथ्वी के पास भी औरोरा (चमक) है, जिसे आमतौर पर यहां उत्तरी और दक्षिणी रोशनी के रूप में पहचाना जाता है, जो शक्तिशाली रेडियो तरंगों को भी उत्सर्जित करता है। यह सौर हवा के साथ ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के बीच में कनेक्शन बनाता है।

अंतरिक्ष में आश्चर्यजनक तमाशा
वैज्ञानिकों ने कहा है कि, रेडियो सिग्नल्स मापने का जो हमारे पास मॉडल है, वो मॉडल बृहस्पति ग्रह और आईओ वाला है, जिसमें जिसमें एक ग्रह एक तारे के चुंबकीय क्षेत्र में घिरा हुआ है, जिससे विशाल चुंबकीय धाराएं प्रवाहित होती हैं और जिसकी वजह से काफी शक्तिशाली औरोरा का निर्माण होता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि, 'यह एक ऐसा तमाशा है जिसने प्रकाश वर्ष दूर से हमारा ध्यान आकर्षित किया है।' वैज्ञानिकों की टीम का कगना है कि, हमने सिग्नल डिटेक्ट करने में भले ही कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन अभी इस सिग्नल से काफी कुछ जानकारियां हासिल करना बाकी है और जिन ग्रहों की तरफ से सिग्नल मिले हैं, अब उन ग्रहों को दूरबीनों से देखने की कोशिश की जाएगी और उनका विज्ञान समझने की कोशिश की जाएगी।

दूरबीन की खासियत
जिस दूरबीन से इन 19 सितारों से सिग्नल्स को डिटेक्ट किया गया है, उस दूरबीन की खोज अभी शुरूआती चरण में है और फिलहाल इसमें केवल उन सितारों की निगरानी करने की क्षमता है जो पृथ्वी से 165 प्रकाश वर्ष की दूरी के अंदर मौजूद हैं। दूरबीन LOFAR को नीदरलैंड में ASTRON द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल यूके से लेकर इटली तक और यूरोप के आसपास के खगोलीय स्टेशनों में किया जा रहा है, जिससे एक बड़ा सिंगल प्राप्त करने में और डिटेक्ट करने में कामयाबी मिल रही है।

वैज्ञानिकों को उम्मीद
वहीं, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के स्क्वायर किलोमीटर एरे रेडियो टेलीस्कोप के निर्माण होने के बाद वे सैकड़ों सितारों को बहुत अधिक दूरी तक देख पाएंगे। लेखकों ने कहा कि यह काम दर्शाता है कि रेडियो खगोल विज्ञान हमारे सौर मंडल के बाहर ग्रहों की हमारी समझ में क्रांति लाने के कगार पर है। आपको बता दें कि, ये रिसर्च नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुआ है।
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