मुल्ला बरादर के पासपोर्ट से तालिबान के लिए पाकिस्तान के समर्थन का हुआ खुलासा
मुल्ला बरादर के पासपोर्ट से तालिबान के लिए पाकिस्तान के समर्थन का हुआ खुलासा
नई दिल्ली, 11 सितंबर: अफगानिस्तान में नवगठित तालिबान सरकार में उपप्रधान मंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान-पत्र सामने आया है। हैरान करने वाली बात ये है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान पत्र दोनों दस्तावेजों में उसका नाम फर्जी है। पासपोर्ट और पहचान पत्र मुल्ला बरादर का नाम मोहम्मद आरिफ आघा लिखा हुआ है। इस बात से यह स्पष्ट हो गया है कि तालिबान की अफगान की सत्ता में वापसी में पाकिस्तान ने मदद की है। पाकिस्तानी आईएसआई सुन्नी पश्तून बलों ने काबुल पर सैन्य कब्जे के पीछे अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान ने सैयद एम नजीर आगा के बेटे मुहम्मद आरिफ आगा के नाम पर बरादर का राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किया था।

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एक ही दिन जारी की गई थी पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र
मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को सीरियल नंबर 42201-5292460-5 के साथ ये आजीवन पहचान पत्र 10 जुलाई 2014 को जारी किया गया था। इस पहचान पत्र में बरादर की जन्म तिथि 1963 लिखी गई है। राष्ट्रीय पहचान पत्र पर पाकिस्तान के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा विधिवत हस्ताक्षर किए गए थे। बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट का नंबर GF680121 है। पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने की तारीख भी एक ही है। यानी पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र दोनों 10 जुलाई 2014 को जारी किया गया था। बरादर के पिता का नाम इस पहचान पत्र में सय्यद एम नजीर आघा लिखा है। यह पहचान-पत्र ताउम्र वैध है।
पाकिस्तान पर बार-बार लगा तालिबान के समर्थन का आरोप
पाकिस्तान पर लंबे समय से अफगान रक्षा बलों के खिलाफ उनकी लड़ाई में तालिबान सैनिकों को मदद करने का आरोप लगा है। पाकिस्तान पर हमेशा यह आरोप लगा है कि वह आर्थिक और खुफिया तरीके से तालिबान को सहायता कर रहा है। हालांकि इस्लामाबाद ने बार-बार इसे निराधार बताया है।
दावा: पाकिस्तान के क्वेटा में रहता था मुल्ला बरादर
''काबुल वॉचर्स'' के मुताबिक, मुल्ला बरादर ने मुल्ला उमर के साथ मिलकर तालिबान की स्थापना की थी। मुल्ला उमर के साथ तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर पाकिस्तान के क्वेटा में रहते था। ये लोग तालिबान की शूरा काउंसिल का सदस्य थे। मुल्ला बरादर को मुहम्मद आरिफ आगा के नाम से भी जाना जाता था। अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के साथ शांति समझौते के दौरान मुल्ला बरादर शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनेकजई के साथ कतर के दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय में वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे था। दोनों एक अन्य अफगान मूल के पश्तून और अमेरिकी नागरिक जल्मय खलीलजाद के साथ कतरी सरकार के समर्थन से बातचीत कर रहे थे।












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