मोदी-बाइडेन के संयुक्त बयान से पाकिस्तान को सता रहा FATF में जाने का डर, जानें क्या हो रही है बातें?
Modi Biden Pakistan FATF: वॉशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जो बाइडेन की तरफ से जो संयुक्त पाकिस्तान को लेकर जारी हुआ है, उसने शहबाज शरीफ की सरकार को अंदर से डरा दिया है। पाकिस्तान के अंदर किसी अनहोनी की आशंका को लेकर बातें की जा रही हैं।
हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से आधिकारिक बयान में विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा है, कि भारत और अमेरिका के संयुक्त बयान से पाकिस्तान को कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया जा रहा है, कि पाकिस्तान एक बार फिर से Financial Action Task Force (FATF) के ग्रे या ब्लैक लिस्ट में जा सकता है।

FATF में फिर जाएगा पाकिस्तान?
अमेरिका-भारत के संयुक्त बयान में न केवल पाकिस्तान से सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ 'तत्काल कार्रवाई' करने का आह्वान किया गया है, बल्कि एफएटीएफ से अपने धन-शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को और सख्त करने के लिए कहने का विकल्प भी खुला रखा है। डॉन ने लिखा है, कि इस संयुक्त बयान का मतलब ये है, कि पाकिस्तान बहुत बड़े संकट में फंसने वाला है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्हाइट हाउस की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है, कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद का वित्तपोषण को लेकर, एफएटीएफ से मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए अपने मानकों के सुधार करने के तरीके की पहचान करने के लिए कहा है।" यानि, भारत और अमेरिका के ज्वाइंट स्टेटमेंट में एफएटीएफ से साफ शब्दों में कहा गया है, कि आतंकवादियों के वित्तपोषण को लेकर वो अपनी कार्रवाई और सख्त करे, जिसका मतलब ये हुआ, कि निशाने पर पाकिस्तान है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक से जुड़े विश्लेषक उज़ैर यूनुस के हवाले से लिखा है, कि "यह पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण होना चाहिए, क्योंकि इस बात के सबूत हैं, कि जब एफएटीएफ की ओर से दबाव डाला जाता है, तो पाकिस्तान को इस तरह की कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।"
उन्होंने साजिद मीर मामले का जिक्र करते हुए कहा, कि साल 2021 में उस साजिद मीर को पाकिस्तान ने फिर से जिंदा किया, जिसे मरा हुआ घोषित कर दिया गया था। लेकिन, FATF का डंडा चलने के बाद पाकिस्तान ने कबूल किया, कि साजिद मीर जिंदा है।
वहीं, भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद को लेकर नये तरह के खुफिया समझौते किए गये हैं, जिससे पाकिस्तानी की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं।
डॉन के मुताबिक, साजिद मीर एक पाकिस्तानी आतंकवादी है, जो एफबीआई के मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल था और मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड भी था, लिहाजा भारत और अमेरिका, दोनों ही देश उसकी तलाश में थे। हालांकि शुरू में यह दावा किया गया था, कि साजिद मीर मर चुका है, लेकिन FATF के प्रेशर में आकर पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने ,साल 2022 में ना सिर्फ उसे गिरफ्तार किया, बल्कि आनन-फानन में उसे सजा भी सुनाई गई थी।
भारत के फंदे में फंसा है पाकिस्तान
पाकिस्तान ने दशकों से कश्मीर में जिहाद फैलाने के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और अब उसे सूद समेत उसकी भरपाई करनी पड़ रही है।
भारत अमेरिका के संयुक्त बयान में "पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया गया, कि उसके नियंत्रण वाले किसी भी क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी हमले शुरू करने के लिए न किया जाए।" इसके साथ ही पाकिस्तान से कहा गया है, कि वो "26/11 मुंबई हमला और पठानकोट हमलों में शामिल आतंकवादियों न्याय के कटघरे में लाया।"
व्हाइट हाउस बैठक में, बाइडेन और मोदी ने अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट (आईएस), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद और हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन सहित सभी संयुक्त राष्ट्र-सूचीबद्ध आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान दोहराया।
पाकिस्तानी अमेरिकी स्कॉलर शुजा नवाज ने कहा, कि "इस बयान का मतलब ये है, कि अमेरिका इन समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर प्रेशर बनाएगा और उसने पाकिस्तान पर प्रेशर बनाने के लिए खुद को भारत के साथ जोड़ लिया है, जबकि अमेरिका ने ही अतीत में इन संगठनों को संरक्षण दिया था।"












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