Middle East Crisis: ड्रोन अटैक के बाद कुवैत के 2 पावर यूनिट बंद, ट्रंप की ईरान को 48 घंटे में 'आर-पार' की धमकी
Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में कुवैत को निशाना बनाया गया है, जहां महत्वपूर्ण पावर जनरेशन यूनिट्स और तेल परिसरों पर ड्रोन हमले हुए हैं। इन हमलों ने न केवल कुवैत की बिजली और पानी की सप्लाई को बाधित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई 48 घंटे की अल्टीमेटम की समयसीमा ने युद्ध की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुके इस युद्ध का दायरा अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे देशों तक फैल चुका है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं।

कुवैत में बुनियादी ढांचे पर प्रहार, बिजली और पानी का संकट
कुवैत के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमलों ने देश के बिजली और जल विलवणीकरण (Desalination) संयंत्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया। इस हमले के कारण दो बड़ी पावर जनरेशन यूनिट्स को तुरंत बंद करना पड़ा।
आपातकालीन कार्रवाई: मंत्रालय की प्रवक्ता फातिमा अब्बास जवाहर हयात ने पुष्टि की कि सिस्टम को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।
राहत कार्य: इमरजेंसी टीमें मौके पर मौजूद हैं ताकि सप्लाई को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। गनीमत यह रही कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई है।
शुआइख ऑयल सेक्टर कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग
ऊर्जा संयंत्रों के साथ-साथ कुवैत के Shuwaikh Oil Sector Complex को भी निशाना बनाया गया। हमले के तुरंत बाद परिसर में भीषण आग लग गई। सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, दमकल विभाग और बचाव दल आग पर काबू पाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को बड़े नुकसान की आशंका है।
ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान का पलटवार
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो अमेरिका बड़े सैन्य हमले करने से पीछे नहीं हटेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "यदि 48 घंटों के भीतर समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।"
ईरानी सेना ने इस चेतावनी को "घबराहट भरा और बेकार" करार दिया है। ईरान का कहना है कि वे किसी भी हमले का जवाब पहले से अधिक ताकत के साथ देने के लिए तैयार हैं।
छठे हफ्ते में युद्ध, खामेनेई की मौत के बाद भड़की आग
यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। तब से ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने न केवल कुवैत बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अहम इंडस्ट्रीज को भी ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है।
Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक संकट
युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है। दुनिया की तेल सप्लाई का यह सबसे महत्वपूर्ण रास्ता वर्तमान में ठप होने की कगार पर है। यहां व्यापारिक गतिविधियों में भारी कमी आई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है।
शांति की धुंधली उम्मीदें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने शर्त रखी है कि समझौता ईरान के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होना चाहिए। फिलहाल, कूटनीति से ज्यादा हथियारों की गूंज सुनाई दे रही है।
With AI Inputs
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