Methane Super Emitters: NASA ने खोजी पृथ्वी पर 'आग की बारिश' की बड़ी वजह, 30% Global Warming के हैं जिम्मेदार
अधिकतर साइंटिफिट रिसर्च अब तक सिर्फ धरती पर मौजूद कल कारखाने या फिर बढ़ते ईंधन के प्रयोग को ही ग्लोबल वार्मिंग का कारण मानते थे। वहीं नासा ने पिछले कई वर्षों ने ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े एक नए रहस्य का पता लगाया है।
Methane Super Emitters on Earth: पृथ्वी का लगातार बढ़ रहा तापमान इस ग्रह पर जीवन के लिए खतरा है। अधिकतर साइंटिफिट रिसर्च अब तक सिर्फ धरती पर मौजूद कल कारखाने या फिर बढ़ते ईंधन के प्रयोग को ही ग्लोबल वार्मिंग का कारण मानते थे। वहीं नासा ने पिछले कई वर्षों ने ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े एक नए रहस्य का पता लगाया है। अमेरिका स्पेस एजेंसी ने दुनियाभर में 50 से अधिक ऐसे स्थानों की पहचान की है, जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं।

NASA की स्टडी में दावा
स्पेस एजेंसी नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग की सबसे बड़ी वजह मीथेन उत्सर्जन है। बिल नेल्सन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "मीथेन उत्सर्जन पर लगाम लगाना ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने की कुंजी है।" यानी अगर हम मिथेन गैस पर नियंत्रण पा लें एक बड़ी समस्या धरती से टल सकती है। नासा की अर्थ सरफेस मिनरल डस्ट सोर्स इन्वेस्टिगेशन (EMIT) स्टडी में इसी बात पर जोर दिया गया है।

30 प्रतिशत ग्लोबल वार्मिंग की वजह मीथेन
नासा के चीफ साइंटिस्ट और वरिष्ठ जलवायु सलाहकार केट केल्विन के अनुसार, EMIT के तहत अतिरिक्त मीथेन-पता लगाने और इसकी जलवायु परिवर्तन की क्षमता का अध्ययन किया जा रहा है। इससे ग्लोबल वार्मिंग का कारण ग्रीनहाउस गैसों को माप, उनकी निगरानी की जा सकती है। साइंटिस्ट केल्विन ने आगे कहा कि ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की 30 प्रतिशत वजह मीथेन गैस का उत्सर्जन (Emission of methane gas) ही है। ईएमआईटी से जुड़ी जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के साइंटिस्ट एंड्रयू थोरपे ने कहा कि अब तक कुछ बड़े मीथेन प्लम का पता चला है। हमारे मिशन के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है।

NASA विशेष उपकरण से कर रहा सर्वे
नासा के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन करने के लिए एक खास उपकरण का प्रयोग किया है। जिससे इस बात का पता चलता है कि धूल जलवायु को कैसे प्रभावित करती है। इस रिसर्च के तहत नासा ने अब तक दुनिया भर में उन स्थानों की पहचान की है जो मीथेन के प्रमुख स्तर का उत्सर्जन करते हैं। एक ऐसा विकास जो शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस का मुकाबला करने में मदद कर सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग के जिम्मेदार 50 से अधिक स्थानों की खोज
दुनिया के लिए भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग एक बड़ा संकट बनने वाला है। ऐसे में नासा ने इस बात को जानने पर ध्यान केंद्रित किया है कि लगातार धरती का तापमान बढ़ने की मूल वजह क्या है। इसको लेकर अर्थ सरफेस मिनरल डस्ट सोर्स इन्वेस्टिगेशन (EMIT) स्टडी अहम है। नासा ने कहा कि EMIT को जलवायु पर वायुजनित धूल के प्रभावों पर अध्ययन के लिए बनाया गया है। ये नासा का खास उपकरण है। जिसकी मदद से ये पता लगया जा रहा है कि आखिर पृथ्वी पर मीथेन का प्रसार कहां से हो रहा है। इसके लिए EMIT के तहत अब तक नासा ने 50 से अधिक स्थानों की पहचान की है। नासा ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में से एक पर्मियन बेसिन में कार्ल्सबैड, न्यू मैक्सिको के दक्षिण-पूर्व में लगभग दो मील (3.3 किलोमीटर) लंबे मीथेन प्लम मिला। वहीं कैस्पियन सागर बंदरगाह के पूर्व तुर्कमेनिस्तान में 12 प्लम की पहचान की गई थी। तेहरान के दक्षिण में करीब तीन मील (4.8 किलोमीटर) लंबे मीथेन प्लम का पता चला था।

जुलाई 2022 में स्पेस स्टेशन किया गया स्थापित
नासा ने कहा कि मध्य एशिया, मध्य पूर्व और दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में अब तक 50 से अधिक मीथेन गैस के 'सुपर-उत्सर्जक' की पहचान की गई है। उनमें से ज्यादातर जीवाश्म-ईंधन, अपशिष्ट या कृषि क्षेत्रों से जुड़े हैं। अर्थ सरफेस मिनरल डस्ट सोर्स इन्वेस्टिगेशन (EMIT) के लिए उपकरण जुलाई 2022 में स्पेस स्टेशन स्थापित किया गया था।












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