Coronavirus: मिलिए दुनिया की उस डॉक्टर से जिसके पास आया पहला मरीज और जिसने दी महामारी की पहली रिपोर्ट
बीजिंग। चीन के वुहान से दिसंबर 2019 में जो जानलेवा कोरोना वायरस निकला था, उसने अब तक दुनियाभर में 153,800 लोगों की जान ले ली है और 2.2 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। दिसंबर में जब कोरोना वायरस का पहला मामले सामने आया था तो उस समय 54 साल की झांग जियान पहली डॉक्टर थीं जिन्होंने वृद्ध दंपति में इस वायरस का पता लगाया था। जियान ने उनका सीटी स्कैन किया और उन्हें इस वायरस की मौजूदगी का पता लगा। झांग सांस की बीमारियों की एक्सपर्ट हैं और उन्हें साल 2002-2003 में फैले एक और कोरोना वायरस सार्स के मरीजों का इलाज करने का भी अनुभव है। अब कोरोना वायरस महामारी के बाद वह चीन की हीरो बन गई हैं।

सीटी स्कैन से पता लगेगा सच
अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि आखिर यह वायरस कहां से आया और कैसे उसने इतने बड़े स्तर पर इंसानों को अपना निशाना बनाया है। चीन में इस वायरस की वजह से 4,632 लोगों की मौत हो गई और कुल 82,692 मरीज सामने आए। चीन को इस समय पूरी दुनिया में कई देशों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। झांग ने बताया कि उनके पास 26 दिसंबर की सुबह एक वृद्ध दंपति आए और उनमें बुखार के अलावा थकान के अलावा कफ जैसे लक्षण नजर आ रहे थे। झांग का कहना है कि पहली नजर में ये लक्षण किसी फ्लू या फिर सामान्य न्यूमोनिया जैसे नजर आ रहे थे। मगर सीटी स्कैन इमेज ने कुछ और तस्वीर दिखाई।

सार्स महामारी के मरीजों का इलाज
अगले दिन झांग के पास उनका सीटी स्कैन आया जिसमें उन्हें जो लक्षण उस वृद्ध दंपति में नजर आए थे, वो सामान्य फ्लू या फिर न्यूमोनिया से अलग थे। झांग के पास साल 2003 में फैली सार्स महामारी के मरीजों के इलाज का अनुभव भी है। जिस समय वह वुहान में संदिग्ध मरीजों की जांच कर रही थी, उस समय उन्हें पहली बार किसी महामारी के लक्षण नजर आए थे। सीटी स्कैन की तस्वीरों के अध्ययन के बाद उन्होंने उस दंपति के बेटे को भी बुलाया और उसकी सीटी स्कैन किया। झांग ने बताया कि पहली बार तो बेटे ने इससे इनकार कर दिया था। उसमें किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आ रहे थे। बेटे को लगा कि डॉक्टर पैसे एंठने की कोशिश कर रही हैं।

27 दिसंबर तक आए और मरीज
झांग ने जब उनके बेटे का स्कैन किया तो उसके फेफड़ों में भी वही असामान्य बात नजर आई जो उसके माता-पिता में थी। झांग के मुताबिक एक ही परिवार के तीन सदस्यों को एक ही जैसी बीमारी एक ही समय पर लगी थी। 27 दिसंबर को कुछ और मरीज अस्पताल आए और उनमें भी वैसे ही लक्षण नजर आए। चार संक्रमित लोगों के खून के टेस्ट के बाद झांग ने उन्हें इंफ्लुएंजा से जुड़ा टेस्ट कराने को कहा। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसी दिन झांग ने अस्पताल को रिपोर्ट दी और इस रिपोर्ट जिला स्तर पर बने महामारी नियंत्रण और रोकथाम सेंटर पर भेजा गया। उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट इस पर है कि कैसे एक नई प्रकार की वायरल बीमारी शायद संक्रमण है, इसका पता लगा है।

झांग ने भेजी रिपोर्ट, डॉक्टरों से कहा मास्क पहनें
उस समय झांग को नहीं पता था कि यह उनकी पहली मेडिकल रिपोर्ट है जो महामारी पर है और तेजी से फैल रही है। उन्होंने बताया कि सन् 1949 में जब चीन का गठन हुआ तो उसके बाद से यह पहला मामला है जो संक्रमण से जुड़ा है और जिसे रोकना बहुत मुश्किल है। रिपोर्ट के बाद झांग ने उस पूरे इलाके को सील करा दिया जहां पर चार मरीज भर्ती थे। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों और नर्सों से कहा कि वो मास्क पहनें और अपनी सुरक्षा बढ़ाएं। इसके बाद उनके पास तीन और मरीज आए थे और उनके सीटी स्कैन में भी फेफड़ों की वही हालत थी। 29 दिसंबर तक मरीजों का आंकड़ा बढ़ गया और 10 एक्सपर्ट्स के पैनल सात मरीजों पर चर्चा करने लगे।

झांग को मिला सम्मान
वुहान की नगरपालिका की तरफ से 30 दिसंबर को एक अर्जेंट नोटिफिकेशन भेजा गया। इसमें शहर में फैलने वाले एक खास प्रकार के न्यूमोनिया की बात कही गई थी। हुबेई के मानव संसाधन और सुरक्षा विभाग की तरफ से अब डॉक्टर झांग को उनकी असाधारण सेवा के लिए सम्मानित किया गया है। वहीं डॉक्टर झांग का कहना है, 'मैं बस वहीं कर रही थी जो एक डॉक्टर को करना चाहिए और जो मुझे मेरे पेशे में बताया गया है।'












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