मंगल पर अबतक का सबसे भयंकर 'भूकंप', यह Marsquakes इंसानों के लिए महत्वपूर्ण क्यों है? जानिए
वाशिंगटन डीसी, 24 अप्रैल: मंगल ग्रह की धरती दो-दो बार हिली है। ये भूकंप इतने शक्तिशाली हैं, जितने आजतक कभी भी रिकॉर्ड नहीं किए गए। लेकिन, वैज्ञानिकों को इस भूकंप में उम्मीद की कई किरणें भी नजर आ रही हैं। वहां पर भूकंप की इन घटनाओं को अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा के इनसाइट लैंडर में लगे उपकरणों की मदद से विशेष स्पेक्ट्रल स्केल पर मापा गया है। आइए जानते हैं कि मंगल पर हुए मार्सक्वेक को इंसान के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है और वैज्ञानिकों को इसमें इतनी ज्यादा दिलचस्पी क्यों है?

दो-दो बार इतनी भयानक ढंग से हिली मंगल की धरती
मंगल की धरती पर अबतक का दो सबसे बड़ा भूकंप दर्ज किया गया है। मंगल पर हुए इस भयानक भूकंप के बारे में नासा के इनसाइट लैंडर में लगे भूकंपमापी से पता चला है, जो कि मंगल ग्रह पर मौजूद है। मंगल पर हुए इन दोनों भूकंप की तीव्रता 4.2 और 4.1 आंकी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह दोनों भूकंप वहां हुए अबतक के भूकंप या मार्सक्वेक के 5 गुना ज्यादा शक्तिशाली थे। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इनसाइट लैंडर ने मंगल की धरती पर जो भूकंपीय गतिविधि दर्ज की है, पहले के ऐसी गतिविधियों की तुलना में पूरी तरह से अलग हैं।

रिसर्च द सिस्मिक रिकॉर्ड जर्नल में प्रकाशित
इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंग्लैंड के ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता अन्ना हॉर्लेस्टन ने कहा है, 'न सिर्फ ये बड़े अंतर से सबसे बड़ी और काफी दूर हुई घटनाएं हैं, एस1000ए में एक स्पेक्ट्रम है और पहले से दर्ज की गई घटनाओं से इसकी अवधि भी पूरी तरह से अलग है। मंगल ग्रह के भूकंपीय सूची में निश्चित तौर पर ये उल्लेखनीय घटनाएं हैं।' यह शोध सिस्मोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका की ओर से द सिस्मिक रिकॉर्ड जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

पहली बार मंगल के इस क्षेत्र में भूकंप दर्ज
शोधकर्ताओं ने 4.2 तीव्रता वाले भूकंप का केंद्र, जिसे एस0976ए कहा जाता है, वैलेस मेरिनरिस में पाया है। यह मंगल ग्रह की एक विशाल घाटी नेटवर्क है, जो सौर मंडल में सबसे बड़े ग्राबेन सिस्टमों में से एक है। वैज्ञानिकों को काफी समय से अंदाजा था कि यह इलाका भूकंप के लिए सक्रिय हो सकता है, लेकिन पहली बार वहां भूकंपीय गतिविधि होने की पुष्टि की गई है। गौरतलब है कि धरती पर भूकंप की तीव्रता मापने के लिए जहां रिक्टर स्केल का इस्तेमाल होता है, वहीं मंगल पर होने वाले मार्सक्वेक को मापने के लिए विशेष स्पेक्ट्रल स्केल का इस्तेमाल किया जाता है।

94 मिनट तक भूकंपनीय ऊर्जा प्रवाहित हुई
4.1 तीव्रता वाला दूसरा भूकंप या मार्सक्वेक एस1000ए पहले भूकंप के 24 दिनों बाद रिकॉर्ड किया गया है। इसके बारे में सिस्मोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका ने एक बयान में जानकारी दी है। यह भूकंप पहले से इस मुकाबले में अलग था कि पहली बार इसकी वजह से पीडिफ लहरें (Pdiff waves) या छोटे आयाम वाली तरंगें उठीं जो कि इसके कोर-मेंटल सीमा को पार कर गईं। शोधकर्ता इस भूकंप के पुख्ता केंद्र की जानकारी नहीं लगा पाए, उन्हें सिर्फ इतना पता चल पाया है कि इसका केंद्र मंगल ग्रह के दूर वाले क्षेत्र में था। यह घटना इसलिए भी अहम थी, क्योंकि इससे पैदा हुई भूकंपनीय ऊर्जा मंगल ग्रह पर 94 मिनट तक मौजूद रही, जो कि वहां पर दर्ज सबसे लंबा वक्त का है।

मंगल पर भूकंप इंसानों के लिए महत्वपूर्ण क्यों है ?
लेकिन, मंगल ग्रह पर हुए अबतक के इन दोनों सबसे शक्तिशाली भूकंपों ने वैज्ञानिकों की उम्मीदें जगा दी हैं। उन्हें उम्मीद है कि सिस्मिक डेटा के आधार पर वह मंगल के आंतरिक हिस्सों के बारे में ज्यादा जानकारी जुटा सकेंगे। गौरतलब है कि मंगल पर भविष्य में कॉलोनियां बसाने में वैज्ञानिकों की काफी दिलचस्पी रही है। ये दोनों प्राकृतिक घटनाएं इस मामले में भी महत्वपूर्ण हैं कि इससे यह समझने में आसानी होगी कि क्या वहां पर इंसानों का लगातार ज्यादा समय तक रह पाना मुमकिन है भी या नहीं। (तस्वीरें-फाइल)












Click it and Unblock the Notifications