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मलेशियाई सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, राज्य आधारित शरिया कानून किए रद्द, भड़के कट्टरपंथी

Malaysia Islamic laws: मलेशियाई सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले देश के उत्तरपूर्वी राज्य केलंतन में 16 शरिया कानूनों को असंवैधानिक करार दे दिया है, जिसके खिलाफ इस्लामिर कट्टरपंथियों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने धमकी दी है, कि शरिया कानून के खात्मे का देश की कानूनी व्यवस्था पर बड़ा असर हो सकता है।

मलेशियाई सुप्रीम कोर्ट ने 8-1 के बहुमत से शुक्रवार को फैसला सुनाया, कि केलंटन राज्य सरकार के पास सोडोमी से लेकर यौन उत्पीड़न, गलत जानकारी रखने, नशा और स्केल माप जैसे अपराधों पर कानून बनाने की शक्ति नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही थे नागरिक कानून में शामिल थे और संघीय संसद इन कानूनों के लिए जिम्मेदारी है।

Malaysia Islamic laws

मलेशियाई राज्य में शरिया रद्द

आपको बता दें, कि मलेशिया एक संघीय देश है, जहां आधिकारिक धर्म इस्लाम से संबंधित कानूनों पर राज्यों का अधिकार क्षेत्र होता है। यह एक दोहरी कानूनी प्रणाली भी संचालित करता है, जहां इस्लामी कानून मुसलमानों पर लागू होता है, जो आबादी का 60 प्रतिशत हैं। जबकि, अन्य सभी अपराधों को सिविल अदालतों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

मलेशिया में बाकी की आबादी भारतीय और चीनी नागरिकों की है, जो हिंदू और बौद्ध धर्म का पालन करते हैं और इनके ऊपर इस्लामिक कानून लागू नहीं होता है और इनके खिलाफ सिविल कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

जबकि, केलंतन राज्य में 97 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और इसने शरिया कानून को लागू करने का फैसला किया था।

जातीय मलय मुस्लिम संस्कृति के गढ़ के रूप में देखे जाने वाले केलंतन पर 1990 से विपक्षी पार्टि इस्लाम सेमलेशिया (पीएएस) का शासन है।

मलेशिया के बीएफएम रेडियो ने मुख्य न्यायाधीश तेंगकु मैमुन तुआन माई के हवाले से कहा, कि "संसद और राज्य विधानसभाओं की शक्ति, संघीय संविधान द्वारा सीमित है और वे अपनी पसंद का कोई भी कानून नहीं बना सकते हैं।"

राज्य सरकार ने साल 2022 में इस्लामिक कानूनों के तहत क्राइम के मामलों का निपटारा करने का कानून पास किया था, जिसे केलंटन के वकील निक एलिन ज़ुरिना निक अब्दुल रशीद और उनकी बेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और इसी पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामिक कानून को रद्द कर दिया है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पीएएस समर्थकों और रूढ़िवादी कट्टर मुसलमानों को भड़का दिया है और कोर्ट के बाहर भारी प्रदर्शन किए गये हैं। पीएएस महासचिव और संसद सदस्य तकीउद्दीन हसन ने फैसले की आलोचना की और कहा कि पार्टी इस महीने के अंत में संसद की बैठक में इस मुद्दे को उठाएगी।

उन्होंने कहा, ''आज हम बहुत दुखी हैं।'' उन्होंने कहा, कि "यह एक ब्लैक फ्राइडे है क्योंकि यह फैसला इस्लामिक शरिया कानून के खिलाफ है।

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