मोदी का लक्ष्य भारत को विकसित भारत में बदलना है.. बहुमत से दूर बीजेपी, क्या कह रहा पाकिस्तान का मीडिया?
Lok Sabha Chunav Result 2024: भारत में हुए मैराथन चुनाव के बाद आज जारी हो रहे नतीजों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पार्टी बीजेपी को लेकर जिस तरह की जीत का अनुमान लगाया जा रहा था, वो नहीं हो पाया है। बीजेपी अब अकेले दम पर सरकार नहीं बना सकती है।
आज जारी हो चुके चुनावी नतीजों में खबर लिखे जाने वक्त तक 242 सीटों पर जीतती दिख रही है और NDA गठबंधन 292 तक पहुंचती दिख रही है। लिहाजा, एनडीए सरकार बनाती नजर आ रही है। हालांकि, बीजेपी अब सरकार बना पाएगी या नहीं, ये अब उसके सहयोगियों पर निर्भर है।

जिसको लेकर पाकिस्तानी मीडिया का कहना है, कि बीजेपी को अब सरकार बनाने के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो नीति-निर्माण में कुछ अनिश्चितता ला सकता है, क्योंकि पीएम मोदी ने पिछले एक दशक में सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।
क्या कह रहा है पाकिस्तान का मीडिया?
जियो न्यूज ने समाचार एजेंसी AFP के हवाले से लिखा है, कि "हिंदू राष्ट्रवादी BJP ने 2014 में सत्ता में आने पर अपने दम पर बहुमत हासिल किया था, जिससे भारत में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर खत्म हो गया था और 2019 में भी उसने यही कारनामा दोहराया। लेकिन, मोदी के सहयोगियों पर निर्भर रहने की संभावना ने बाजारों को डरा दिया है और शेयरों में भारी गिरावट आई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में भी भारी गिरावट आई और बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई।
सिंगापुर में OCBC में निवेश रणनीति के प्रबंध निदेशक वासु मेनन ने कहा, कि "मोदी गठबंधन की अपेक्षा से कम अंतर से जीत, नई सरकार की राजनीतिक रूप से कठिन सुधारों को आगे बढ़ाने की क्षमता पर संदेह पैदा कर सकती है, जिन्हें भारत की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जो पहले से ही दुनिया में सबसे तेज है।"
जियो न्यूज ने ओपिनियन पोस्ट 'द विकसित भारत एरा ऑफ इंडिया' में लिखा है, कि "पाकिस्तान-भारत के बीच "बातचीत" सालों से रुकी हुई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है, कि दोनों देश बात नहीं करते हैं। 2016 में, भारत के पठानकोट एयरबेस पर एक सुरक्षा घटना के दौरान जिसमें सात भारतीय सुरक्षाकर्मी मारे गए थे, पाकिस्तानी और भारतीय अधिकारी एक-दूसरे के संपर्क में थे और विस्तार से बात करते थे।"
ओपिनियन में आगे लिखा गया है, कि "2019 में, जब भारत ने हवाई क्षेत्र को पार करके पाकिस्तानी क्षेत्र पर हमला किया और बालाकोट जिले में मिसाइलें दागीं, तो पाकिस्तान और भारत के अधिकारियों के बीच बातचीत ने दुश्मनी के पहले दौर से आगे बढ़ने से बचने में मदद की थी।"
2022 में, जब भारत ने पाकिस्तानी क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइल दागी, जो मियां चुन्नू में गिरी, तो कम से कम 48 घंटों तक भारतीय पक्ष की ओर से कोई संवाद नहीं हुआ - लेकिन अंततः बातचीत हुई, जिसमें से ज्यादातर में भारतीय पक्ष ने दावा किया कि प्रक्षेपण आकस्मिक था।"
जियो न्यूज ने लिखा है, कि "मोदी ने पहले ही "अतुल्य भारत" को एक आकर्षक आर्थिक महाशक्ति में बदल दिया है। उनका अगला लक्ष्य इस महाशक्ति को "विकसित भारत" में बदलना है। पाकिस्तान के लिए इस परिवर्तन का क्या अर्थ होगा?

जियो न्यूज ने आगे लिखा है, कि "2014 में, जब मोदी पहली बार पीएम बने, तो चीन से भारत का आयात लगभग 54 बिलियन डॉलर था। जब वे 2019 में फिर से चुनाव के लिए दौड़े, तो आयात बढ़कर 75 बिलियन डॉलर हो गया। लिहाजा, भारत और पाकिस्तान एक बार फिर से बातचीत कर सकते हैं और तनाव को कम कर सकते हैं।"
वहीं, डॉन न्यूज ने लिखा है, कि "दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था वाला भारत, पश्चिमी नेताओं का पसंदीदा है, जबकि मानवाकार कार्यकर्ताओं लगातार तानाशाही की चेतावनी देते रहते हैं।"
डॉन ने लिखा है, कि "मोदी ने 2023 में G20 की अध्यक्षता भारत के पास होने का इस्तेमाल विदेश में अपनी छवि चमकाने के लिए किया, और 2036 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी करके पिछले साल क्रिकेट विश्व कप की मेजबानी को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
पाकिस्तान के साथ भारत के कैसे संबंध हो सकते हैं, इसको लेकर डॉन ने लिखा है, कि "मोदी सरकार ने इस्लामाबाद पर सीमा पार आतंकवाद का आरोप लगाने के बाद से पाकिस्तान के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है। 1947 में उपमहाद्वीप के विभाजन के बाद से दोनों देशों के बीच तीन युद्ध और कई छोटी झड़पें हुई हैं। जम्मू और कश्मीर तनाव के केंद्र में रहा है। 2015 में मोदी ने लाहौर का एक आश्चर्यजनक दौरा किया, लेकिन 2019 में संबंधों में गिरावट आई।
लेकिन मार्च में, मोदी ने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद पर लौटने पर बधाई दी। यह दो परमाणु-सशस्त्र प्रतिद्वंद्वियों के नेताओं के बीच सद्भावना की एक दुर्लभ अभिव्यक्ति थी, और इससे आशा जगी है कि संबंधों में सुधार हो सकता है।
डॉन ने लिखा है, कि "मोदी ने भारत को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के ब्रिक्स क्लब के एक प्रमुख सदस्य के रूप में भी पेश किया है, और इस सप्ताह नई दिल्ली को "वैश्विक दक्षिण की एक मजबूत और महत्वपूर्ण आवाज़" कहा है। मोदी के कार्यकाल में ही अफ्रीकी संघ समूह जी-20 में शामिल हुआ, जिसमें भारत ने तर्क दिया कि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय लेने में अधिक भागीदारी की आवश्यकता है।
पाकिस्तानी मीडिया ने उम्मीद जताई है, कि शहबाज शरीफ का परिवार पहले भी भारत से बातचीत करता रहा है, जिससे ऐसा संभव है, कि भारत में जब नई सरकार का गठन हो, तो एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत हो और दोनों देशों के संबंध, जो पटरी से उतरे हुए हैं, वो एक बार फिर से पटरी पर लौट आए।












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