'लाल ग्रह' पर भूकंप जैसे झटके! इनसाइट लैंडर से 85 KM दूर बने 3 गड्ढे, साइंटिस्ट्स ने किया दावा

नई दिल्ली, 20 सितंबर। मंगल पर जीवन की तलाश में स्पेस साइंटिस्ट इस ग्रह से जुड़ी हर जानकारी का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। नासा के रोबोटिक इनसाइट लैंडर द्वारा भेजी गई मंगल ग्रह की तस्वीरों को लेकर ताजा शोध में अहम जानकारी साझा की गई है। दावा किया जा रहा है कि लाल ग्रह यानी मंगल से जुड़ी ऐसी जानकारी अब तक अंतरिक्ष में मौजूद किसी भी ग्रह से नहीं आई है। नासा के इनसाइट लैंडर ने मंगल ग्रह पर उल्कापिंडों के गिरने और भूकंप के कारण बने क्रेटर्स की भी गणना की है।

मंगल पर चट्टान और गड्ढे

मंगल पर चट्टान और गड्ढे

नासा के इनसाइट लैंडर ने मंगल ग्रह पर चट्टानों और गड्ढों का पता लगा लिया है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, इनसाइट लैंडर द्वारा जिन चट्टानों या गड्ढों की तस्वीरों भेजी गई हैं उनसे उल्कापिंडों के गिरने से ग्रह पर भूकंपीय और ध्वनिक तरंगों जैसी घटनाओं और क्रेटर्स के स्थान की गणना की जा सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के बाहर किसी भी ग्रह पर इस तरह की ये पहली माप है जो मंगल ग्रह पर की गई।

 उल्कापिंडों के टकराने और 'मार्सक्वैक' से बने गड्ढे

उल्कापिंडों के टकराने और 'मार्सक्वैक' से बने गड्ढे


नासा के रोबोटिक इनसाइट लैंडर की मदद से वैज्ञानिक अब इस मंगल ग्रह के लक्षण की पूरी समझ हासिल कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने ये बताया कि कैसे इनसाइट ने चार उल्कापिंडों की सतह से टकराने से भूकंपीय और ध्वनिक तरंगों का पता लगाया और उनके ग्रह पर गिरन से हुए क्रेटरों के स्थान की गणना भी की। इसकी पुष्टि के लिए शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष में नासा के मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर की तस्वीरों की मदद ली है।

क्या कहते हैं साइंटिस्ट?

क्या कहते हैं साइंटिस्ट?

इनसाइट मिशन के प्रमुख नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के ग्रह भूभौतिकीविद् (Geophysicist) ब्रूस बैनर्ड ने कहा कि इनसाइट लैंडर द्वारा भेजी गई ताजा जानकारी अमह है। इससे मंगल ग्रह के विषय हमें और अधिक नजदीकी से अध्ययन करने में मदद मिलेगी। ब्रूस बैनर्ड ने आगे कहा कि मंगल पर अब एक एक सीस्मोमीटर उतारा जा सकता है।

पृथ्वी पर उल्कापिंड की दुगुनी संभावना

पृथ्वी पर उल्कापिंड की दुगुनी संभावना

टूलूज विश्वविद्यालय के ISAE-SUPAERO इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड स्पेस के ग्रह वैज्ञानिक राफेल गार्सिया के अनुसार, भविष्य में चंद्रमा पर भी उल्का पिंडों के प्रभाव का पता लगाने का भी लक्ष्य है। गार्सिया ने चंद्रमा पास रखे जाने वाले एक उपकरण का जिक्र करते हुए कहा इस ग्रह का दक्षिणी ध्रुव स्थायी रूप से पृथ्वी से दूर समान दूरी पर है। हालांकि स्पेस साइंटिस्ट्स के अनुसार, मंगल ग्रह की तुलना में पृथ्वी के वायुमंडल से उल्कापिंड से टकराने की संभावना से लगभग दोगुना है।

इनसाइट लैंडर से 85 से 180 मील के बीच क्रेटर

इनसाइट लैंडर से 85 से 180 मील के बीच क्रेटर

5 सितंबर, 2021 को मंगल ग्रह पर उल्कापिंड के प्रभाव से बने क्रेटर से जुड़ी जानकारी इनसाइट लैडर की तस्वीरों से साइंटिस्ट्स ने खोजी है। लैंडर ने अंतरिक्ष की चट्टानें इनसाइट ने ट्रैक कीं हैं। जिसमें साल 2020 की हैं बाकी शेष तीन 2021 में बने क्रेटर हैं। ये क्रेटर इनसाइट के स्थान से 85 किमी और 180 मील के बीच बने हैं। साइंटिस्ट्स के अनुसार यहां उल्कापिंडों के कम से कम तीन टुकड़े गिरे हैं। स्पेस साइंटिस्ट इन क्रेटर का कारण भूकंपीय सिग्नल से भी जोड़ रहे हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+