LCH Prachand ने तुर्की के T-129 Helos को चटाई धूल, होने वाली है ऐतिहासिक डील, डिफेंस सेक्टर में भारत की छलांग
LCH Prachand Nigeria Deal: भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH Prachnad) प्रचंड नाइजीरियाई सेना के साथ सौदे को फाइनल करने के लिए अंतिम चरण में पहुंच रहा है और इस डील के साथ ही डिफेंस सेक्टर में भारत की ये बहुत बड़ी छलांग होगी।
अगर यह सौदा हो जाता है, तो यह भारतीय एयरोस्पेस निर्माता के लिए एक कामयाब एक्सपोर्ट सौदा होगा। इसके अलावा, प्लस पॉइंट यह होगा, कि घरेलू हेलिकॉप्टर ने तुर्की के T-129 ATAK हेलीकॉप्टर और यूरोपीय टाइगर HAD मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर को हराकर ये अनुबंध जीतेगा।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भरोसा है, कि लड़ाकू जेट (LCA Tejas) सेगमेंट के बजाय हेलीकॉप्टर सेगमेंट में उसका पहला सौदा हो सकता है। एक अधिकारी ने यूरेशियन टाइम्स को बताया है, कि इस डील की घोषणा जल्द ही होने की उम्मीद है।
भारत कई देशों को क्रेडिड लाइंस भी दे रहा है जो भारत के संभावित रक्षा खरीदार हो सकते हैं। और इसी कड़ी में भारत और नाइजीरिया ने अफ्रीकी राष्ट्र में रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक अभूतपूर्व 1 बिलियन डॉलर का सौदा किया था। भारत ने 42 अफ्रीकी संघ देशों को लगभग 14 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन प्रदान की हैं। जबकि इसका ज्यादातर हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उपयोग किया जाएगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत ने रक्षा सौदों के लिए क्रेडिड लाइंस का उपयोग करने के लिए खुलापन दिखाया है।
अफ्रीकी देशों के साथ मजबूत होता भारत का सहयोग
भारत का अफ्रीकी देशों के साथ लंबे समय से सहयोग है और वह कई अफ्रीकी देशों के सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। इसके अलावा, भारत अफ्रीका में शांति सेना में योगदान देता है। भारत और अफ्रीकी देशों के बीच आपसी विश्वास भारत के लिए अपने हथियार बेचना आसान बनाता है।
नाइजीरियाई सेना अपनी मारक क्षमता और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लड़ाकू हेलीकॉप्टर हासिल करने की कोशिश कर रही है। देश अपने सैन्य अभियानों का समर्थन करने के लिए लगभग 12 ट्विन-इंजन अटैक हेलीकॉप्टर की मांग कर रहा है। 2020 में, नाइजीरियाई सेना और वायु सेना ने भारतीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर हासिल करने में दिलचस्पी दिखाई थी। सेना पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपने क्षेत्र में तैनात सैनिकों को हवाई सहायता देने के लिए हमलावर हेलीकॉप्टरों को खरीदना चाहती है।
हेलीकॉप्टरों की जरूरत जमीनी हमले करने और छोटे ड्रोन से हवाई हमलों को रोकने के लिए की जाएगी। वे सशस्त्र एस्कॉर्ट और टैंक प्लिंकिंग भी करेंगे।
नाइजीरियाई सेना ने बोको हराम विद्रोहियों के साथ लंबे समय तक चली लड़ाई के लिए वायु शक्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। नाइजीरिया सेना ने यह भी तर्क दिया कि विद्रोहियों से तेजी से निपटने के लिए उसे अपनी खुद की "वायु सेना" की जरूरत है।
लिहाजा LCH के अलावा, नाइजीरिया ने HAL, एयरबस और तुर्की के TAI सहित कई वैश्विक निर्माताओं का मूल्यांकन किया है।
दावेदारों में, HAL का LCH अपनी बहुमुखी प्रतिभा और सिद्ध प्रदर्शन के लिए सबसे अलग है। TAI का T-129 ATAK हेलीकॉप्टर, जो LHTEC T800-4A टर्बोशाफ्ट इंजन से संचालित होता है, और एयरबस का टाइगर HAD, जिसे विभिन्न युद्ध की जरूरतों के लिए डिजाइन किया गया, ये दोनों बहु-भूमिका वाले हमला हेलीकॉप्टर हैं, और ये दोनों भी रेस में शामिल है। इनमें से प्रत्येक विकल्प अलग-अलग लाभ प्रदान करता है, जो वैश्विक रक्षा बाजार की प्रतिस्पर्धी प्रकृति को दर्शाता है।

किस हेलीकॉप्टर की कितनी कीमत?
तुर्की की TAI ने T-129 ATAK हेलिकॉप्टर की कीमत लगभग 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति पीस रखी है। यह A129 मंगुस्ता पर आधारित पांच टन का, दो इंजन वाला, बहु-भूमिका वाला अटैक हेलीकॉप्टर है। इसे मूल रूप से इतालवी-ब्रिटिश कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के लाइसेंस के तहत बनाया गया था, जो अब लियोनार्डो हेलिकॉप्टर है।
एयरबस अपने टाइगर HAD बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टर के साथ भी प्रतिस्पर्धा कर रहा है, जिसे सशस्त्र टोही, हवाई या ज़मीनी एस्कॉर्ट, हवा से हवा में युद्ध, जमीनी अग्नि सहायता, विनाश और टैंक-विरोधी युद्ध करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कीमत लगभग 68 मिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
इसके विपरीत, भारतीय एलसीएच को अलग अलग भूमिकाओं में भी तैनात किया जा सकता है, जिसमें धीमी गति से चलने वाले हवाई लक्ष्यों पर नजर रखना, हमला करना, दुश्मन की रक्षा को नष्ट करना, खोज और बचाव, टैंक रोधी और टोही मिशन शामिल हैं। इसकी कीमत लगभग 17 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो तुर्की के टी-129 एटीएके हेलीकॉप्टर की कीमत का एक तिहाई है।
विंग कमांडर सौरभ शर्मा, जो धनुष स्क्वाड्रन 143 हेलीकॉप्टर यूनिट के फ्लाइट कमांडर भी हैं, और जो इन हेलीकॉप्टरों का संचालन करते हैं, उन्होंने मशीनों को उड़ाने के अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए कहा, कि "मैं बस इतना ही कह सकता हूं, कि यह मशीन तितली की तरह उड़ती है और मधुमक्खी की तरह डंक मारती है।"
भारतीय प्रचंड हेलीकॉप्टर को लेकर कई देशों की दिलचस्पी
पिछले साल, कई और देशों ने भारत में बने इस हेलीकॉप्टरों को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी।
पूर्व एचएएल के मुख्य प्रबंध निदेशक सीबी अनंतकृष्णन स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस से पहले हेलीकॉप्टर का ऑर्डर पाने की उम्मीद कर रहे हैं।
अनंतकृष्णन ने कहा, कि "पांच देशों ने दिलचस्पी दिखाई है। अर्जेंटीना के साथ इस हेलीकॉप्टर को लेकर अभी बात चल रही है, जबकि फिलीपींस के साथ बातचीत एडवांस स्टेज में है। वहीं, मिस्र के साथ भी, हम चर्चा कर रहे हैं। और नाइजीरिया के साथ बातचीत ने गति पकड़ ली है।" उन्होंने कहा, कि "हमें जल्द या बाद में सफलता मिलेगी। हेलीकॉप्टरों की मांग और बढ़ेगी।"
एचएएल की क्षमता हर साल 30 हेलीकॉप्टर बनाने की है। जब मांग अपने चरम पर होगी, तो एचएएल इसे 60 हेलीकॉप्टरों तक बढ़ाने की कोशिश करेगा, और आगे जाकर हर साल 90 हेलीकॉप्टरों बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। भारतीय एयरोस्पेस निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हेलीकॉप्टर के निर्यात की काफी उम्मीद कर रहा है। अर्जेंटीना और नाइजीरिया ने रोटरी-विंग विमान में रुचि दिखाई है। अर्जेंटीना ने 20 'प्रचंड' हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं।
LCH प्रचंड भारत का पहला स्वदेशी बहु-भूमिका वाला लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसमें शक्तिशाली जमीनी हमला और हवाई युद्ध क्षमता है। इसे भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकता के अनुसार रेगिस्तान और पहाड़ों में संचालन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।












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