हिमालय से भी करीब चार गुना विशाल सुपर माउंटेन का पता चला, पृथ्वी के विकास से हो सकता है सीधा कनेक्शन
कैनबरा, 7 फरवरी: भू-वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि अगर चार बार हिमालय पर्वत श्रृंखला को एक के बाद एक करके जोड़ने की कल्पना करें तो इतने विशाल पर्वत श्रृंखला भी कम से कम दो बार पृथ्वी पर रह चुके हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि पृथ्वी के विकास और जीवों और पौधों की उत्पत्ति से भी उनका गहरा नाता पाया गया है। ऑस्ट्रेलिया के एक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के विकास पर रिसर्च किया है तो इतने विशाल पर्वत श्रृंखला की पूरी कहानी मिल गई है, जो भविष्य में पृथ्वी के विकास प्रक्रिया को समझने के भी काम आ सकता है।

हिमालय से भी चार गुना विशाल दो सुपर माउंटेन का पता चला
पृथ्वी के इतिहास में दो बार हिमालय जितने ऊंचे और हजारों मील लंबे पर्वत श्रृंखलाओं का जन्म हो चुका है। भू-वैज्ञानिक उसे सुपर माउंटेन कह रहे हैं। स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक कैनबरा स्थित ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) की पोस्टडॉक्टोरल स्टूडेंट और पर्वत श्रृंखलाओं के विकास पर एक नई शोध की लीड ऑथर जियी जू ने एक बयान में कहा है, 'आज इन दोनों सुपर माउंटेन के जैसा कुछ भी नहीं है।' लेकिन, उन्होंने पृथ्वी के विकास के इतिहास में आए इन दोनों सुपर माउंटेन की विशालता का अंदाजा इसी बात से दे दिया कि, 'सिर्फ उनकी ऊंचाई से ही नहीं, अगर आप 1,500 मील लंबे (2,400 किलोमीटर) हिमालय को तीन से चार गुना करने की कल्पना कीजिए, आपको इसकी विशालता का अंदाजा लग जाएगा।'(वैसे हिमालय की मौजूदा लंबाई 2,300 किलोमीटर के करीब है) (पहली तस्वीर ट्विटर वीडियो से)
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पृथ्वी के विकास के इतिहास से है सुपर माउंटेन का कनेक्शन
शोधकर्ताओं के मुताबिक पृथ्वी के विकास के दौरान इन दोनों सुपर माउंटेन दो अलग-अलग बार में बने और फिर नष्ट भी हो गए। पहला सुपर माउंटेन 200 करोड़ साल से लेकर 180 करोड़ साल के बीच विकसित हुआ। जबकि, दूसरे सुपर माउंटेन का विकास 65 करोड़ साल से लेकर 50 करोड़ साल के बीच में हुआ था। शोधकर्ताओं का मानना है कि दोनों सुपर माउंटेन का आपस में लिंक है और ये दोनों ही पृथ्वी के विकास के इतिहास में महत्वपूर्ण काल के उदारहण हैं। (दूसरी तस्वीर सौजन्य- नासा)

इस तरह से सुपर माउंटेन की पहचान हुई
यह शोध जर्नल अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस लेटर्स में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने कम ल्यूटेटियम सामग्री वाले जिक्रोन के निशान का इस्तेमाल किया है, जो कि खनिज का एक संयोजन है और सिर्फ ऊंचे पहाड़ों की जड़ों में पाया जाता है, जो कि अत्यधिक दबाव की वजह से पैदा होते हैं। इसी से सुपर माउंटेन की पहचान हो पायी है। पहले सुपर माउंटेन को नूना सुपर माउंटेन कहा गया है। जबकि, बाद वाले सुपर माउंटेन को ट्रांसगोंडवानन सुपरमाउंटेन का नाम दिया गया है। (तीसरी तस्वीर-सौजन्य- नासा)

क्या है पृथ्वी के विकास में सुपर माउंटेन का योगदान ?
शोधकर्ताओं का कहना है कि जब सुपर माउंटेन नष्ट हुए, तो उनसे महासागरों को फॉस्फोरस और लोहे जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हुए। इससे जैविक चक्रों को गति मिली और विकास की अधिक जटिल प्रक्रियाएं शुरू हुईं। हो सकता है कि सुपर माउंटेन की वजह से ही वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने में मदद मिली हो, जिससे कि जटिल जीवन के लिए आवश्यक सांस लेने की प्रक्रिया में सहायता मिली हो। जियी जू के अनुसार, 'शुरुआत में पृथ्वी के वातावण में ऑक्सीन नहीं के बराबर था। माना जाता है कि वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर कई चरणों में बढ़ा है, और वो दोनों चरण सुपर माउंटेन के साथ मेल खाते हैं।'

सुपर माउंटेन की जीव और पौधों की उत्पत्ति में मदद
शोधकर्ताओं के मुताबिक इन दोनों विशाल पर्वत श्रृंखलाओं की उत्पत्ति और नष्ट होने की प्रक्रिया ने हो सकता है कि हमारे ग्रह के इतिहास में दो सबसे बड़े विकासवादी प्रगति की अवधि को भी बढ़ावा दिया हो। वैज्ञानिकों के अनुसार जब पहला नूना सुपर माउंटेन विकसित हुआ तो संभवत: उसी दौरान यूकैर्योसाइट्स की उपस्थिति दर्ज हुई। इन्हीं जीवों से बाद में पौधे और जानवरों का जन्म हुआ। जबकि, दूसरे ट्रांसगोंडवानन सुपरमाउंटेन के काल में पहली बार विशाल जानवरों की उपस्थिति दर्ज की गई। इसमें करीब 2 अरब साल पहले जटिल कोशिकाओं की पहली उपस्थिति; और 54.1 करोड़ साल पहले समुद्री जीवन का कैम्ब्रियन विस्फोट शामिल है।

सुपर माउंटेन की गैर-मौजूदगी से पृथ्वी के विकास की गति रुकी थी
इस स्टडी के को-ऑथर प्रोफेसर जोचेन ब्रोक्स ने कहा है, 'हैरानी की बात यह है कि समय के साथ सुपर पर्वत निर्माण का पूरा रिकॉर्ड इतना स्पष्ट है। यह इन दो विशाल स्पाइक्स को दिखाता है: एक जानवरों की पैदाइश से जुड़ा हुआ है और दूसरा जटिल बड़ी कोशिकाओं के उद्भव से जुड़ा हुआ है।' पृथ्वी के विकास की गति में कमी की वजह वैज्ञानिक 180 करोड़ वर्ष से लेकर 80 करोड़ वर्ष पूर्व की अवधि में इस सुपर माउंटेन की अनुपस्थिति को कारण मानते हैं। इस अवधि को 'बोरिंग बिलियन' के तौर पर जाना जाता है। उनका कहना है, 'विकास की धीमी गति को उस अवधि के दौरान सुपर माउंटेन की अनुपस्थिति को जिम्मेदार माना जाता है, जिससे कि महासागरों को पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है।' यह खोज पृथ्वी के विकास के इतिहास को नई दिशा दे सकता है।












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