ऑस्ट्रेलिया में नहीं रुकेगा अडानी का प्रोजेक्ट, जर्मन कंपनी ने ठुकराई 17 साल की एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की मांग
कैनबरा। स्वीडन की 17 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने ऑस्ट्रेलिया में अडानी ग्रुप के16.5 बिलियन डॉलर वाले एक कोल माइनिंग प्रोजेक्ट के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। इस प्रोजेक्ट को जर्मनी की कंपनी सीमंस और अडानी पावर ने साथ में मिलकर ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में लॉन्च किया था। ग्रेटा ने कहा था कि इस प्रोजेक्ट से ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा बढ़ जाएगा और साथ ही ग्रेट बैरियर रीफ को भी खासा नुकसान पहुंचेगा। ग्रेटा की इस मांग को सिरे से नकार दिया गया है।

क्या है अडानी का यह प्रोजेक्ट
अडानी का यह प्रोजेक्ट क्वींसलैंड के गालिले बेसिन में है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत कोयले को आयात करके भारत में जलाया जाएगा। ग्रेटा के साथ प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अडानी की परियोजना पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। ग्रेटा ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी को अप्रत्यक्ष तौर पर हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ग्रेटा ने कहा था कि अडानी के प्रोजेक्ट्स पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। ग्रेटा का मानना है कि इन कोयले की खानों से पर्यावरण को गंभीर रूप से हानि हो रही है।
ट्विटर पर ग्रेटा की अपील
ग्रेटा ने ट्विटर पर गौतम अडानी की पार्टनर जर्मन कंपनी सीमेंस से इस परियोजना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। हैशटैग #StopAdani के साथ ग्रेटा ट्वीट कर ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरणविदों का ध्यान आकर्षित किया है। दूसरी ओर सीमंस एजी ने साफ कर दिया है कि वह ऑस्ट्रेलिया कोल माइन के प्रोजेक्ट के लिए अडानी को कोयले का सप्लाई जारी रखेगी। जर्मनी में भी शुक्रवार को कंपनी के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए थे।

कंपनी ने कहा ऐसा नहीं हो सकता
कंपनी की ओर से कहा गया है कि वह एक कमेटी बनाएगी। इस कमेटी के पास यह ताकत होगी कि वह किसी प्रोजेक्ट को रोक सके या फिर उसे आगे बढ़ने की मंजूरी। लेकिन साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि वह अभी अडानी कॉन्ट्रैक्ट के साथ आगे बढ़ेगी। कंपनी के सीईओ जो कासेर ने रविवार को बयान में यह बात कही है। उन्होंने कहा, 'मुझे इस बात का अहसास है कि आप में से कई लोग मुझसे उम्मीद लगाए हुए हैं। मुझे इसे मसले के साथ पूरी संवदेनाएं हैं मगर मुझे अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के हितों का भी ध्यान रखना है।'

अडानी ग्रुप ने जारी किया बयान
अडानी ग्रुप की तरफ से भी साफ कर दिया गया है कि वह किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शनों का असर ऑस्ट्रेलिया में जारी इस प्रोजेक्ट पर नहीं पड़ने देगा। अडानी ग्रुप की तरफ से साल 2010 में पहली बार इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया गया था। अडानी ग्रुप की तरफ से जारी बयान में कहा गया है , 'कारमाइकल प्रोजेक्ट का निर्माण और इसपर काम जारी है। हम पहले भी इस बात को साफ कर चुके हैं कि कोई भी विरोध प्रदर्शन हमें हमारे वादों को पूरा करने से नहीं रोक सकता है।
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