गले लगे दो कोरियाई नेता: जानिए इस बार क्या चाहते है किम और मून
प्योंगयांग। सिंगापुर समिट के बाद अब कोरियाई प्रायद्वीप में बहुत कुछ बदल गया है। नॉर्थ कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग उन के अब वह तेवर अब नहीं रहे, जब वे बात-बात पर मिसाइल छोड़ने की धमकी देते थे। नॉर्थ कोरिया के लिए मंगलवार का दिन बहुत ही ऐतिहासिक साबित हुआ, जब दशकों बाद कोई साउथ कोरियाई राष्ट्रपति ने किम जोंग उन के देश में कदम रखा। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून-जे-इन अपनी पत्नी किम जोंग-सूक के साथ प्योंगयांग के एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनका वेलकम करने के लिए किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल-जू हजारों नॉर्थ कोरियाई लोगों की साथ खड़े थे। तीन दिन के दौरे के लिए प्योंगयांग एयरपोर्ट पहुंचते ही किम ने साउथ कोरियाई राष्ट्रपति को गले लगाया।

क्या है एजेंडा में?
नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया के राष्ट्रपतियों के बीच इस साल होने वाली यह तीसरी मीटिंग है। दोनों ही नेताओं के बीच कोरियाई प्रायद्वीप में न्यूक्लियर खतरे को खत्म करने के लिए प्रेक्टिकल कदम पर बात होगी।
साउथ कोरिया ने अपने एजेंडे में इंटर-कोरियन कोऑपरेशन और दोस्ती को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके अलावा साउथ कोरिया वॉशिंगटन और प्योंगयांग के बीच परमाणु मुक्त मुद्दे पर एक मध्यस्थता के रूप में अपने काम को आगे बढ़ाना चाहेगा।
ऐसा माना जा रहा है कि दोनों ही देश आगे सहयोग के लिए कदम उठाएंगे। इस द्विपक्षीय बातचीत में आर्थिक संबंधों को विकसित करना एक प्रमुख विषय होने की उम्मीद है, लेकिन डीएमजे (डिमिलिट्रिलाइज जोन) पर दोनो तरफ से सेना की उपस्थिति को भी कम करने पर ठोस विचार किया जा सकता है।

द्विपक्षीय व्यापार पर रहेगा फोकस
इस मीटिंग में दोनों ही देशों के बीच व्यापार को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता होने वाली है। राष्ट्रपति मून के साथ साउथ कोरिया की कई बड़ी कंपनियों के एक्जीक्यूटर्स भी नॉर्थ कोरिया पहुंचे हैं, जिसमें सैमसंग और एलजी से लेकर कार कंपनी ह्यूंडै तक शामिल है। वहीं, साउथ कोरिया ने नॉर्थ कोरिया के हजारों वर्कर्स को अपने देश में रोजगार देने की भी बात कही है। वहीं, सियोल की तरफ से दोनों देशों की संस्कृति को बढ़ावा देने को लेकर भी फोकस रहेगा।

अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को खत्म करना चाहेगा नॉर्थ कोरिया
नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच साउथ कोरिया एक मीडिएटर की भूमिका में है। इस साल अमेरिका-नॉर्थ कोरिया-साउथ कोरिया के बीच कई बार सफल बातचीत हो चुकी है। इस वक्त किम जोंग उन का देश कड़े वैश्विक प्रतिबंधों को झेल रहा है। इस वार्ता के बाद नॉर्थ और साउथ के बीच किसी भी प्रकार का नया इकनॉमिक कोओपरेशन होता है, तो वह नॉर्थ कोरिया के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इस वार्ता के बाद नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच भी मीटिंग होने वाली है। अमेरिका चाहता है कि नॉर्थ कोरिया पहले परमाणु मुक्त हो, उसके बाद ही प्रतिबंधों को खत्म करने पर विचार किया जा सकेगा। वहीं, नॉर्थ कोरिया की तरफ से भी धीरे-धीरे ही सही लेकिन अपने आप को खतरनाक हथियारों की दौड़ से खत्म करने से लेकर परमाणु मुक्त होने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं।
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