किम जोंग-उन की कार के साथ दौड़ने वाले सुरक्षा घेरा की ख़ासियत
दुनिया ने एक बार फिर सिंगापुर में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन की कार के पीछे उनके बॉडीगार्ड्स को दौड़ते देखा.
यह कोई दिखावा नहीं था. न ही ऐसा पहली बार हुआ था. इससे पहले दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन से मुलाक़ात के पहले भी इसी तरह के दृश्य देखे गए थे.
जब भी उनके नेता की सुरक्षा की बात आती है, उत्तर कोरिया कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता है. पर उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ने वाला रहस्यमय समूह आखिर कौन है?
विश्लेषक माइकल मैडन इससे पर्दा हटा रहे हैं. माइकल मैडन नॉर्थ कोरिया लीडरशिप वॉच के निदेशक हैं और अमरीका के जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के विजिटिंग स्कॉलर हैं.
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को तीन श्रेणियों में सुरक्षा दी जाती है. सिंगापुर में उनकी सुरक्षा के लिए ब्लैक सूट में बॉडीगार्ड्स दौड़ते नज़र आए.
ये बॉडीगार्ड्स उनकी लक्जरी गाड़ी के साथ-साथ दौड़ रहे थे. इन्हें मेन ऑफ़िस ऑफ़ एडजुटेंट्स कहते हैं. ये सेना के अधिकारी होते हैं, जो देश के प्रमुख व्यक्तियों को सुरक्षा देते हैं.
अचूक सुरक्षा के लिए ये किम के चारों तरफ़ तुरंत घेरा बना लेते हैं.
इनका चयन कोरियन पीपल्स आर्मी से किया जाता है. इनकी लंबाई किम जोंग-उन के समान होती है. चयन के वक्त यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि उन्हें देखने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो.
ये निशानेबाजी, मार्शल आर्ट्स और बंदूक चलाने में दक्ष होते हैं.
कैसे होता है इनका चयन
किम को सुरक्षा देने वाले समूह में शामिल किए जाने से पहले इनकी पृष्ठभूमि की कठोर जांच की जाती है. इनकी पिछली दो पीढ़ियां भी इस जांच का हिस्सा होती हैं.
समूह के अधिकतर सुरक्षाकर्मी किम जोंग-उन के संबंधी या फिर उत्तर कोरिया के जाने-माने परिवारों से होते हैं.
बॉडीगार्ड का प्रस्ताव एक बार मान लेने के बाद नौकरी छोड़ने का विकल्प नहीं होता है. उन्हें कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है, ठीक उन सैनिकों की तरह, जो विशेष ऑपरेशन के लिए तैयार किए जाते हैं.
सुरक्षाकर्मियों का घेरा चारों तरफ़ नजर रखता है. किम जोंग-उन तीन से पांच सुरक्षाकर्मियों के बीच होते हैं, जिनमें से एक समूह का डायरेक्टर होता है. ये सभी सूट और टाई पहने होते हैं.
सुरक्षा के इंतज़ाम कैसे-कैसे
किम जोंग-उन के ड्राइवर लिनन या लेदर के दस्ताने पहनता है ताकि गाड़ी पर उनका नियंत्रण बना रहे. वे कानों में ईयरपीस पहनते हैं ताकि उन्हें सूचनाएं मिलती रहे.
उनकी पहचान विशेष तरीके से की जाती है. उनके कपड़े पर विशेष पिन और बैज लगे होते हैं. इतना ही नहीं पुष्टि के लिए विशेष कोड में उन्हें बातें भी करनी होती है.
मेन ऑफ़िस ऑफ़ एडजुटेंट्स में करीब 200 से 300 सुरक्षाकर्मी होते हैं. इनमें से आधे बॉडीगार्ड और बाक़ी ड्राइवर और तकनीकी स्टाफ़ होते हैं.
सिगरेट तक का करते हैं इंतज़ाम
किम की सुरक्षा पंक्ति मे दूसरा और तीसरा घेरा गार्ड कमांड का होता है. इनका काम उस जगह की जांच करनी होती है, जहां किम जाते हैं.
गार्ड कमांड के लिए सुरक्षाकर्मियों का चयन कमोबेश उसी तरह होती है जैसे मेन ऑफ़िस ऑफ़ एडजुटेंट्स की.
ये सभी किम जोंग-उन के लिए विशेष फ़ोन लाइन की व्यवस्था करते हैं. साथ ही उनके उपयोग के लिए विशेष कम्प्यूटर का भी इंतज़ाम करते हैं.
किम जोंग-उन क्या खाएंगे, क्या पीएंगे, यहां तक की सिगरेट का भी इंतज़ाम उन्हें करना होता है.
गार्ड कमांड उन सभी रास्तों को आधा मील तक सुरक्षित रखते हैं, जहां से किम जोंग-उन गुजरते हैं.
जिस तरह की सुरक्षा उत्तर कोरिया के नेता को दी जाती है, शायद ही ऐसी सुरक्षा विश्व के किसी अन्य नेता को दी जाती हो.












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