खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या: क्या कनाडा को 'फाइव आई' का मिलेगा साथ, भारत के सामने क्या हैं चुनौतियां?

Cananda Five Eyes alliance: कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंटों और खालिस्तान समर्थक नेता और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच "संभावित संबंध" के विस्फोटक आरोप लगाए हैं, जिसके बाद नई दिल्ली को एक अभूतपूर्व राजनयिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

1980 के दशक से लेकर जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के आखिरी आठ वर्षों तक, खालिस्तान मुद्दे ने हमेशा भारत-कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है। लेकिन इस बार, ओटावा ने कार्रवाई तेज कर दी है और नई दिल्ली द्विपक्षीय संबंधों की जटिलता और वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा की कीमत को ध्यान में रखते हुए स्थिति पर नजर रख रही है।

Five Eyes

लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर ये मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा और भारत के लिए क्या चुनौतियां हो सकती हैं। मोटा-मोटी तौर पर देखा जाए, आगे जाकर ये मामला दो कदमों में आगे बढ़ सकता है...

भारत को सामने क्या होंगी चुनौतियां?

नई दिल्ली के सामने पहली चुनौती, भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों पर कूटनीतिक प्रभाव को रोकना होगा, जो पहले से ही तनावपूर्ण तो रहा है, लेकिन इसके साथ साथ संबंधों में उतनी कड़वाहट कभी नहीं आई, जितनी इस वक्त आ गई है।

कनाडा दुनिया में सबसे बड़े भारतीय प्रवासियों में से एक की मेजबानी करता है। कनाडा में भारतीय मूल के 16 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 7 लाख भारतीय NRI हैं, जो कनाडा की कुल आबादी का 3 प्रतिशत है।

वहीं, 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा में सबसे ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ने के लिए जाते हैं और इस वक्त करीब 2 लाख 30 हजार भारतीय छात्र पढ़ते हैं।

2021-22 में कनाडा के साथ भारत का कुल व्यापार (गुड्स एंड सर्विसेज) 11.68 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो दोनों देशों की क्षमता के मुकाबले काफी कम है, लेकिन जब भारत के दालों के आयात की बात आती है, तो कुल आयात का लगभग 30% कनाडा से आता है।

कनाडाई पेंशन फंडों ने भारत में संचयी रूप से करीब 55 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। 2000 से कनाडा से भारत में संचयी एफडीआई लगभग 4.07 अरब अमेरिकी डॉलर है।

व्यापार वार्ता में हालिया ठहराव जैसे गति अवरोधों और खालिस्तान मुद्दे पर चुनौतियों के बावजूद ये सब जारी है।

लेकिन, डिप्लोमेटिक तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच जो व्यापारिक प्रगति है, उसे जोरदार झटका लग सकता है और दोनों देशों के बीच जो एक चीज स्थिरता ला सकती थी, वो था फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, जिसपर बातचीत इसी महीने कनाडा ने रोक दी है।

दूसरी चुनौती क्या है?

भारत के सामने दूसरी चुनौती अपनी अंतर्राष्ट्रीय इज्जत और प्रतिष्ठा को बरकरार रखना है। जी20 शिखर सम्मेलन की सफलता ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय जगत में काफी ऊंचा उठा दिया है, लेकिन कनाडा के आरोप से भारत की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ सकता है।

ट्रूडो ने भारत से जांच में सहयोग करने को कहा है। भारतीय बयान इस पर चुप है, यह संकेत है कि भारत इस बिंदु पर गेंद खेलने को तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि कनाडा ने उन सबूतों का कोई विवरण साझा नहीं किया है, जो यह संकेत देते हैं कि कनाडा "उचित समय में" ऐसा करेगा।

इसके अलावा, भारत जानता है, कि कनाडा जी7 का सदस्य होने के साथ साथ फाइव आईज अलायंस का भी हिस्सा है, जो खुफिया जानकारियां साझा करने का एक समूह है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।

आपको याद होगा, 2021 में जब पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने आई न्यूजीलैंड की टीम, ठीक मैच वाले दिन पाकिस्तान छोड़कर चली गई थी, उसे ऐसा करने के लिए 'फाइव आईज' की तरफ से ही कहा गया था।

लिहाजा, यदि ओटावा निज्जर की हत्या की जानकारी अपने फाइव आईज़ भागीदारों के साथ साझा करता है, तो सबूतों की विश्वसनीयता का परीक्षण किया जाएगा। अब तक, ट्रूडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सुनक, दोनों फाइव आइज़ पार्टनर्स को आवाज उठाने के लिए चुना है।

लेकिन ये सभी देश, विशेष रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया..भारत के करीबी रणनीतिक साझेदार भी हैं।

संयोग से, एक और आम बात यह है, कि इन देशों ने भी अपनी धरती से खालिस्तान समर्थक समूहों को भी सक्रिय होते देखा है और इन देशों में भी भारतीय दूतावासों के साथ साथ हिन्दू समुदाय और हिन्दू मंदिरों के खिलाफ बर्बर हिंसक गतिविधियां की गई हैं। इन देशों में भी खालिस्तान एक्टिव है, जो भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा भड़काते हैं।

लिहाजा, अभी तक इन देशों की तरफ से सधी हुई प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं। ब्रिटेन ने भारत के साथ व्यापार वार्ता पर होने वाली बातचीत को रोकने से इनकार कर दिया है।

वाशिंगटन में, व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन ने समाचार एजेंसी एपी के हवाले से कहा, "हम प्रधान मंत्री ट्रूडो द्वारा संदर्भित आरोपों के बारे में गहराई से चिंतित हैं। हम अपने कनाडाई साझेदारों के साथ नियमित संपर्क में रहते हैं। यह महत्वपूर्ण है, कि कनाडा की जांच आगे बढ़े और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।''

अमेरिकी अधिकारी ने इस दौरान भारत का जिक्र नहीं किया।

वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूके सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम इन गंभीर आरोपों के बारे में अपने कनाडाई सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में हैं। कनाडाई अधिकारियों द्वारा चल रही जांच के दौरान आगे टिप्पणी करना अनुचित होगा।"

वहीं, रॉयटर्स ने ऋषि सुनक के प्रवक्ता के हवाले से कहा, कि ट्रूडो की टिप्पणी भारत-ब्रिटेन व्यापार वार्ता के रास्ते में नहीं आएगी।

जबकि, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग के प्रवक्ता ने कहा, कि "ऑस्ट्रेलिया इन आरोपों से बेहद चिंतित है और इस मामले में चल रही जांच पर ध्यान दे रहा है। हम विकास कार्यों में साझेदारों के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं। हमने वरिष्ठ स्तर पर भारत को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है।''

सभी साझेदारों के लिए एक गंभीर स्थिति

हालांकि, इनमें से कोई भी देश यह नहीं चाहेगा कि भारत के साथ उनके संबंधों में कोई कनाडाई झटका लगे, लेकिन यह उन्हें असमंजस की स्थिति में खड़ा कर देता है। ये देश, कनाडा के चक्कर में भारत जैसे सहयोगी की निंदा में नहीं फंसना चाहेंगे।

क्योंकि, एशिया में अब सिर्फ भारत की एक मात्र पश्चिम का बड़ा सहयोगी बचा है और ये देश कभी नहीं चाहेंगे, कि भारत का विश्वास इनसे टूट जाए।

वहीं, नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक के सूत्रों का मानना है, कि इन रणनीतिक साझेदारों की प्रतिक्रिया उन्हें प्रस्तुत किए गए और संभवतः भारत के साथ साझा किए गए "साक्ष्य की गुणवत्ता" पर निर्भर करेगी।

जस्टिन ट्रूडो न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस को संबोधित करने जाने वाले हैं, वहीं कनाडा की विदेश मंत्री जी-7 सहयोगियों से मुलाकात करने वाली हैं, जिनपर सभी की निगाहे होंगी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर भी न्यूयॉर्क जा रहे हैं और वह इन आरोपों पर दुनिया की प्रतिक्रिया जानने के लिए दोनों पक्षों के लिए अगला स्थान बन सकता है।

भारत इस बात पर भी नज़र रखेगा कि ट्रूडो कनाडा में राजनीतिक नेतृत्व के साथ किस तरह की जानकारी साझा करते हैं।

वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, दोनों देश चूंकी दोस्त देश रहे हैं, लिहाजा दोनों को एक दूसरे का अपमान करने से बचते हुए डिप्लोमेसी के जरिए बातचीत आगे बढ़नी चाहिए।

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