G20 शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा का हैरान करने वाला फैसला, भारत के साथ व्यापार समझौते पर बात रोकी
India-Canada Trade Treaty talks abruptly halts: नई दिल्ली में अगले हफ्ते होने वाली जी20 शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा ने भारत के साथ व्यापार वार्ता अचानक रोक दी है। फाइनेंशियल पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली सरकार के अनुरोध पर पिछले महीने व्यापार वार्ता रोक दी गई है।
भारत और कनाडा, दोनों साल 2010 से ही एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जब भारत में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। लेकिन, ओटावा की ओर से अचानक लिया गया फैसला ऐसे समय आया है, जब कनाडा में खालिस्तानी आंदोलन के बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं।

कनाडा ने रोकी ट्रेड टॉक
कनाडाई प्रेस के मुताबिक, कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने पुष्टि की है, कि ट्रूडो सरकार ने ट्रेड टॉक रोकने की पहल की है।
समाचार एजेंसी एफपी ने एक ईमेल बयान में वर्मा के हवाले से कहा है, कि "कनाडाई पक्ष ने भारत के साथ शीघ्र प्रगति वाले व्यापार समझौते पर, तेजी से चल रही बातचीत को 'रोकने' का सुझाव दिया है।" रिपोर्ट में कहा गया है, कि "हालांकि मुझे सटीक कारण की जानकारी नहीं है।" लेकिन सबसे ज्यादा संभावना है, 'विराम' हितधारकों के साथ ज्यादा परामर्श की अनुमति देगा।"
भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वार्ता साफ नहीं
गौरतलब है, कि भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस साल मई में कनाडा का दौरा किया था जहां उन्होंने अपने कनाडाई समकक्ष मैरी एनजी से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान दोनों पक्ष आशावादी दिखे। दरअसल, मैरी एनजी ने दावा किया था, कि दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के करीब पहुंच रहे हैं।
विशेष रूप से, कनाडाई प्रधान मंत्री अगले हफ्ते जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वह मेगा इवेंट के मौके पर अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से मिलेंगे या नहीं। अभी तक इस बात को लेकर कोई रिपोर्ट नहीं आई है, कि पीएम मोदी और जस्टिन ट्रूडो के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं।
इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री ने पिछले हफ्ते यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की से बातचीत के दौरान कहा था, कि जी20 शिखर सम्मेलन में उन्हें नहीं बुलाए जाने से वो निराश हैं और वो बैठक में यूक्रेन का मुद्दा जरूर उठाएंगे।
क्या है भारत-कनाडा ट्रेड डील?
सितंबर 2008 में, भारत-कनाडा सीईओ गोलमेज ने सिफारिश की थी, कि द्विपक्षीय व्यापार के एक बड़े हिस्से पर टैरिफ को समाप्त करके, भारत और कनाडा को सीईपीए से काफी लाभ होगा।
सीईपीए वस्तुओं में व्यापार, सेवाओं में व्यापार, उत्पत्ति के नियम, स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं और आर्थिक सहयोग के अन्य क्षेत्रों को कवर करेगा।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस बाबत एक ज्वाइंट स्टडी की गई थी और रिपोर्ट सितंबर 2010 में आई थी, जिसमें दोनों देशों के लिए सीईपीए के लाभों की जोरदार सिफारिश की गई थी।
ज्वाइंट रिपोर्ट आने के बाद, भारत-कनाडा सीईपीए वार्ता शुरू करने की घोषणा नवंबर 2010 में सियोल में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा की गई थी और वार्ता औपचारिक रूप से 16 नवंबर 2010 को नई दिल्ली में सीआईटीएम और कनाडाई व्यापार मंत्री वैन लोन द्वारा शुरू की गई थी।
इस बैठक का 10वां दौर अगस्त 2017 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
22 जून 2020 को दोनों पक्षों के मुख्य वार्ताकारों के बीच एक स्टॉकटेकिंग CEPA और FIPA वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इसके बाद, 27 अक्टूबर 2020 को शीघ्र फसल/अंतरिम समझौते का विकल्प तलाशने के लिए, एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई।
इस संबंध में कनाडाई पक्ष के साथ स्कोपिंग पेपर साझा किया गया है और 19 नवंबर 2020 को एक डीवीसी आयोजित की गई थी और दोनों पक्ष इसे आगे बढ़ाने के लिए लगे हुए हैं। लेकिन, अब रिपोर्ट आई है, कि कनाडा में व्यापार पर बातचीत रोक दी है।
माना जा रहा है, कि खालिस्तानियों को लेकर मोदी सरकार ने जो सख्ती दिखाई है, उसके बाद से दोनों देशों के बीच के संबंध तनावपूर्ण हो गये हैं। भारतीय विदेश मंत्री की तरफ से बार बार कहा गया है, कि खालिस्तानियों की वजह से दोनों देशों के रिश्ते खराब हो सकते हैं।












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