174 सालों में सबसे अधिक गर्म रहा जून 2023, NASA के वैज्ञानिकों ने कहा, इस वजह से पड़ी भयंकर गर्मी
NASA और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) से जुड़े वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जून 2023 बीते 174 सालों में सबसे अधिक गर्म जून था।
यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने इन वैज्ञानिकों के विश्लेषण के आधार पर दावा किया है कि बीता जून पृथ्वी पर अब तक का सबसे गर्म जून रहा है।

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुमान के मुताबिक साल 2023 अब तक के 10 सबसे गर्म वर्षों की लिस्ट में शामिल होगा। अनुमान के मुताबिक इसकी 97 फीसदी संभावना है कि यह 5 सबसे गर्म सालों में शुमार होगा।
NOAA ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अल नीनो को बताया है। इससे पहले यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने कहा था कि 2023 जून वैश्विक स्तर पर सबसे गर्म महीना था।
जून 2023 में तापमान 1991-2020 के औसत तापमान से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। जून में वैश्विक सतह का तापमान 20वीं सदी के औसत 15.5 डिग्री सेल्सियस से 1.05 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा पहली बार है जब जून का तापमान दीर्घकालिक औसत से 1 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया हो।
क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो स्पैनिश भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ है- शिशु यानी छोटा बच्चा। उष्ण कटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में पेरू और ईक्वाडोर के तटवर्ती इलाकों के गर्म होने की घटना को अल-नीनो कहा जाता है।
आसान भाषा में समझे तो समुद्र का तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में जो बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो का नाम दिया गया है। इस बदलाव की वजह से समुद्र के सतही जल का ताप 4-5 डिग्री अधिक हो जाता है।
इस गर्मी की वजह से समुद्र में चल रही हवाओं के रास्ते और रफ्तार में परिवर्तन आ जाते हैं। इस परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है जिसका असर पूरे विश्व में देखा जाता है।
जिस साल अल नीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर पड़ता है। इसकी वजह से धरती के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है, वहीं, कुछ हिस्सों में सूखे की गंभीर स्थिति सामने आती है।












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