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चीन के सीक्रेट स्पेस स्टेशन पर ताला लगा सकता भारत का ये दोस्त देश, कौन हैं एंटी चीन राष्ट्रपति जेवियर माइली?

China Space Station In Argentina: अर्जेंटीना, जिसमें सालों से वामपंथी पार्टियों की सरकार थी, उस समय देश में चीन ने एक सीक्रेट स्पेस स्टेशन का निर्माण किया था, जो पिछले सात सालों से सीक्रेट प्रोजेक्ट्स को अंजाम दे रहा था, लेकिन अब इस सीक्रेट स्पेस स्टेशन पर ताला लग सकता है।

अर्जेंटीना में सालों के बाद हुए सरकार परिवर्तन ने चीन को जबरदस्त झटका दिया है और देश को कंगाली की हाल में झोंकने वाली वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद अब राष्ट्रपति जेवियर माइली, चीनी केन्द्रों की खुद जांच कर रहे हैं और इसी कड़ी में उन्होंने चीनी सीक्रेट स्टेशन पर खुद छापा मारा है।

Argentina china space station

अर्जेंटीना में सीक्रेट स्पेस स्टेशन पर लगेगा ताला!

ऐसी आशंका है, कि चीन का ये सीक्रेट स्पेस स्टेशन दक्षिणी गोलार्ध में मिसाइलों और उपग्रहों पर नज़र रखने के लिए एक सैन्य भूमिका हो सकती है।

वहीं, अर्जेंटीना में अमेरिका के राजदूत मार्क स्टैनली ने अर्जेंटीना के अखबार ला नेसिओन को कहा है, कि वह आश्चर्यचकित हैं, कि अर्जेंटीना ने चीनी सशस्त्र बलों को अपने क्षेत्र में एक बेस संचालित करने की अनुमति दी है।

जिसके बाद अब अर्जेंटीना के नये राष्ट्रपति जेवियर माइली, पिछली वामपंथी सरकार के दौरान बनाए गए चीनी "अंतरिक्ष स्टेशन" के औपचारिक निरीक्षण पर विचार कर रहा है और सरकार ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की है।

नोटिसियास अर्जेंटिनास समाचार एजेंसी के हवाले से एक उच्च-स्तरीय कैबिनेट सूत्र का कहना है, कि अधिकारी एस्पासियो प्रोफुंडो सीएलटीसी-कोने-न्यूक्वेन स्टेशन पर चल रही गतिविधियों का आकलन करना चाहती है, हालांकि चीन का दावा है, कि उसका ये स्पेस स्टेशन पूरी तरह से वैज्ञानिक है।

कैबिनेट सूत्रों का कहना है, कि "स्पेस बेस को लेकर किए गये कॉन्ट्रैक्ट में काफी अजीब बातें हैं और ये चीन को वो क्षेत्र दिया गया है, जहां अर्जेंटीना प्रवेश नहीं कर सकता है।

अब अर्जेंटीना की सरकार यह जांच करना चाहती है, कि समझौतों का पालन किया जा रहा है या नहीं। रिपोर्टों के मुताबिक, वह बेस और उसके आसपास के भौतिक निरीक्षण पर भी विचार कर सकता है।

चीन का ये स्पेस सेंटर कैसा है?

अर्जेंटीना में बना चीन का ये स्पेस सेंटर साल 2024 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद बनाया गया था और ये स्पेस स्टेशन करीब 200 हेक्टेयर जमीन पर बनाया गया है। ये समझौता राष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडीज डी किर्चनर ने किया था, जो घनघोर वामपंथी नेता हैं। इस स्पेस स्टेशन का नाम एस्पासिओ लेजानो स्टेशन है और ये अर्जेंटीना के न्यूक्वेन प्रांत में स्थित है और सबसे खास बात ये है, कि कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया है, कि अर्जेंटीना सरकार इस बेस में प्रवेश नहीं कर सकती है।

जाहिर तौर पर कॉन्ट्रैक्ट का ये हिस्सा शक पैदा करता है।

इस स्पेस स्टेशन पर चीन ने 16 मंजिला एंटीना भी बनाया हुआ है, जिससे काफी आसानी से अंतरिक्ष में नजर रखी जा सकती है।

दूसरी हैरान करने वाली बात ये है, कि इस स्पेस स्टेशन का कंट्रोल सैटेलाइट लॉन्च एंड ट्रैकिंग कंट्रोल जनरल (CLTC) के पास है और दिलचस्प बात ये है, कि ये चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का ही एक हिस्सा है। ऐसे में आशंका इस बात को लेकर है, कि चीन, अर्जेंटीना में बने इस स्पेस स्टेशन के जरिए अमेरिकी विमानों की जासूसी कर रहा होगा।

और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, विचारधारा के आधार पर भी अलग अलग ध्रुवों पर है और अगर इसे हटा भी दिया जाए, फिर भी सरकारी सूत्रों का कहना है, कि कॉन्ट्रैक्ट को लेकर कई ऐसी बाते हैं, जो शक पैदा करती हैं।

Argentina china space station

काफी ज्यादा सीक्रेट है ये स्पेस स्टेशन

चीन के इस स्पेस स्टेशन की सबसे बड़ी शर्त इसकी गोपनीयता है और इसका काम 2017 में पूरा हुआ था। इस बेस स्टेशन के लिए दोनों देशों के बीच 50 सालों का कॉन्ट्रैक्ट है।

चीन बेस के संचालन पर पूरी गोपनीयता बनाए रखता है और अर्जेंटीना सरकार को कोई निगरानी नहीं करने देता है। फर्नांडीज डी किर्चनर के साथ हुए ससमझौते में प्रावधान है, कि अर्जेंटीना के अधिकारी इसकी गतिविधियों में "हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं।"

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दावा है कि स्टेशन का उपयोग "शांतिपूर्ण अंतरिक्ष ऑब्जर्वेशन और एक्सप्लोरेशन" के लिए किया जाता है।

पेंटागन की साल 2019 की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, चीन इस बेस का इस्तेमाल अमेरिका और उससे संबंधित उपग्रहों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर उसे निशाना बनाने के लिए कर सकता है। और अब अर्जेंटीना की सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है, कि सरकार अब इस स्पेस स्टेशन को लेकर अनुबंधों की समीक्षा कर सकती है।

इसके अलावा, इस बात की भी जांच की जाएगी, कि इस स्पेस सेंटर के 10 प्रतिशत संसाधनों का इस्तेमाल अर्जेंटीना को करना था, और क्या वो पूरा हुआ है या नहीं। इसके अलावा, अर्जेंटीना सरकार के सूत्रों ने कहा है, कि "सूत्र इस बात की भी जांच करेंगे, कि कॉन्ट्रैक्ट में क्या है, क्या काम किए गये हैं, क्या बनाया गया है, और इस सुविधा का इस्तेमाल सैन्य मामलों में कितना हो सकता है।"

कौन हैं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली?

जेवियर माइली एक दक्षिणपंथी राजनेता और अर्थशास्त्र के जानकार हैं, जो अर्जेंटीना की ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए लगातार कड़े फैसले ले रहे हैं। पूर्व वामपंथी सरकारों के शासनकाल में देश में महंगाई दर 100 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है और देश अभी IMF के पैकेज पर चल रहा है। पूर्व वामपंथी सरकार के दशकों के शासन ने देश को कंगाल बना दिया है, जिसके बाद पिछले साल हुए चुनाव में जेवियर माइली की पार्टी ने जीत हासिल की है।

अपने चुनाव प्रचार के दौरान जेवियर माइली ने गर्भपात के अधिकारों का विरोध किया था और उन्होंने जलवायु परिवर्तन को "समाजवाद का झूठ" करार दिया था। उन्होंने अर्जेंटीना के संस्कृति, शिक्षा और विविधता मंत्रालयों को बंद करके और सार्वजनिक सब्सिडी को समाप्त करके सरकारी खर्च में कटौती करने का भी वादा किया था।

जेवियर माइली आक्रामक नेता के तौर पर जाने जाते हैं और एक बार उन्होंने पोप फ्रांसिस को 'शैतानों का दूत' तक कहा था। उनके शासनकाल में भारत और अर्जेंटीना काफी करीब आ रहे हैं और अर्जेंटीना ने भारत से हथियार समझौते की तरफ भी कदम बढ़ाए हैं।

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