'किसे बेवकूफ बना रहे, क्या पूरी दुनिया को मुर्ख समझते हैं', गाजा को लेकर अमेरिका पर क्यों भड़के जावेद अख्तर?

Javed Akhtar on Israel-Palestine War: मशहूर भारतीय शायर जावेद अख्तर ने गाजा पट्टी को लेकर अमेरिका को कसकर फटकार लगाई है और उन्होंने अमेरिका की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। जावेद अख्तर ने कहा है, कि गाजा को लेकर अमेरिका, किसे बेवकूफ बना रहा है? क्या अमेरिका पूरी दुनिया को बेवकूफ समझता है?

दरअसल, गाजा पट्टी को लेकर जावेद अख्तर का गुस्सा अमेरिका की नीतियों पर फूटा है, जिसमें अमेरिका एक तरफ गाजा पट्टी में बमबारी को लेकर इजराइल की आलोचना कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ वो संयुक्त राष्ट्र में इजराइल का बचाव भी कर रहा है।

Javed Akhtar on Israel-Palestine War

अमेरिका पर भड़के जावेद अख्तर

दरअसल, शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ 2+2 बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान इजराइल और हमास के बीच चल रही लड़ाई को लेकर भी बातचीत की गई है।

अमेरिका, जो इजराइल के साथ हमेशा खड़ा रहता है, उसने साफ शब्दो में कहा है, कि 'हमास का खात्मा' जरूरी है, क्योंकि अगर अभी युद्धविराम किया गया, तो हमास एक बार फिर से अपनी ताकत जुटाएगा और फिर पलटकर इजराइल पर हमला करेगा।

लेकिन, दूसरी तरफ गाजा में हमास समर्थिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है, कि इजराइली हमले में अभी तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं।

और इसी बात को लेकर जावेद अख्तर अमेरिका को कोस रहे हैं।

जावेद अख्तर ने एक ट्वीट करते हुए कहा है, कि "अमेरिकी विदेश मंत्री मिस्टर (एंटनी) ब्लिंकन ने गाजा नागरिकों पर इजरायली बमबारी की निंदा की और साथ ही संयुक्त राष्ट्र में सीज फायर के प्रस्ताव को वीटो कर दिया। वे किसे बेवकूफ बना रहे हैं? क्या वे सोचते हैं कि बाकी दुनिया बहुत बड़ा बेवकूफ है?"

Javed Akhtar on Israel-Palestine War

अमेरिका का स्टैंड क्या है?

अमेरिका ने 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले को आतंकवादी हमला बताया है और उसने इजराइल के 'आत्मरक्षा के अधिकार' की वकालत की है। अमेरिका ने इजराइल के 'हमास का नामोनिशान मिटा देने' के आह्वान का भी समर्थन किया है।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में अमेरिका ने कतर के उस प्रस्ताव का विरोध किया, जिसमें गाजा पट्टी में सीजफायर की बात की गई थी।

अमेरिका ने अपने विरोध में ये कहा था, कि "प्रस्ताव में हमास के आतंकी हमले का जिक्र नहीं किया गया है।" इसके अलावा, अमेरिका ने कनाडा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें "हमास के हमले को आतंकवादी हमला कहा गया था और गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचाने का आह्वान किया गया था।"

भारत ने भी कनाजा के इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि भारत ने कतर के फिलिस्तीन पर लाए गये प्रस्ताव पर वोटिंग से गैर-हाजिर रहने का फैसला किया।

इसके अलावा, अमेरिका के दबाव की वजह से इजराइल गाजा पट्टी में मानवीय मदद पहुंचाने के लिए रफाह बॉर्डर खोलने के लिए तैयार हुआ। जबकि, इजराइल की तरह, अमेरिका ने युद्धविराम के लिए बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को खारिज कर दिया है, हालांकि अमेरिका ने इजराइल को स्थानीय विराम स्वीकार करने के लिए मनाने की कोशिश की है।

पिछले हफ्ते एंटनी ब्लिंकन ने कहा था, कि इजराइल अपनी रक्षा कैसे करता है यह मायने रखता है और यह काफी महत्वपूर्ण है, कि जब हमास की गोलीबारी में फंसे नागरिकों की सुरक्षा की बात आती है, तो उन्हें बचाने के लिए सभी कदम उठाए जाने चाहिए, जिसकी सख्त जरूरत है।

जबकि, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा कि वह "बंधकों की रिहाई" के बिना हमास आतंकवादी समूह के खिलाफ लड़ाई नहीं रोकेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्लिंकन को बताया कि "इजराइल एक अस्थायी युद्धविराम से इनकार करता है जिसमें हमारे बंधकों की रिहाई शामिल नहीं है। इजराइल गाजा में ईंधन के प्रवेश को सक्षम नहीं करेगा और पट्टी पर धन भेजने का विरोध करता है।"

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