चीन की तरफ 1000 क्रूज मिसाइलों की तैनाती करेगा भारत का जिगरी दोस्त, 'गांधीवादी' नीति हटाया!
उत्तर कोरिया ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की हैं, जो जापान पर हमला कर सकती हैं। इसके साथ ही, चीन और उत्तर कोरिया, इन दोनों ही देशों ने हाइपरसोनिक हथियार विकसित किए हैं, जिससे जापान को खतरा है।
टोक्यो, अगस्त 22: चीन की तरफ से लगातार मिल रही धमकियों के बाद जापान चीन की तरफ मुंह करके एक हजार क्रूज मिसाइलों की तैनाती करना चाहता है। जापानी अखबार योमीउरी शिंबुन ने 21 अगस्त की रिपोर्ट में कहा है, कि जापान चीन के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई क्षमताओं में सुधार के लिए लंबी दूरी की 1,000 क्रूज मिसाइलों की तैनाती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, इन मिसाइलों को जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) टाइप 12 सबसोनिक एंटी-शिप मिसाइलों को संशोधित किया जाएगा, जिससे उन मिसाइलों की क्षमता 100 से एक हजार किलोमीटर तक बढ़ जाएगी।
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जापान करेगा 1000 मिसाइलों की तैनाती
इन मिसाइलों को जहाजों और लड़ाकू विमानों से तैनात किया जाना है और जापान के दक्षिण-पश्चिम द्वीपों और क्यूशू पर इन मिसाइलों का बेस बनाने की योजना बनाई गई है। योमीउरी शिंबुन की रिपोर्ट के मुताबिक, एडवांस ग्राउंड-लॉन्च टाइप 12 को आज से 2 सालों के बाद साल 2024 में तैनात कर दिया जाएगा। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि, जापान अपनी जमीनी हमले की क्षमताओं को अपनी मूल जहाज-रोधी भूमिका से अलग रखते हुए अपग्रेड करेगा। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि, जापान अपनी आगामी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में "काउंटर-स्ट्राइक क्षमताओं" का विकास करेगा। इसमें यह भी कहा गया है, कि चूंकि क्रूज मिसाइलें इस क्षमता के आधार में होंगी, लिहाजा अब जापान के रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य संबंधित कंपनियों द्वारा पूंजी निवेश का समर्थन करने के लिए एक प्रणाली स्थापित करके मिसाइल उत्पादन में वृद्धि करना है।

शांतिवादी विदेशी नीति त्यागेगा जापान?
जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से शांतिवादी विदेश नीति बनाए रखी है और अपनी सेना की भूमिका को आत्मरक्षा तक सीमित रखा है। हालांकि, जापान के पास आक्रामक क्षमताओं की कमी के बावजूद एशिया की सबसे सक्षम सेनाओं में से एक है, जिसका उपयोग जापान अपने क्षेत्र से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए कर सकता है, लेकिन चीन को लेकर जापान को अलग रणनीति बनाने की जरूरत है और जापान इसी मकसद के साथ काम करने में जुट गया है।

किम जोंग उन ने बढ़ाई मुसीबत
जापान को सिर्फ चीन से ही नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया से भी गंभीर खतरा है और उत्तर कोरिया बार बार जापानी समुद्र की तरफ मिसाइल का परीक्षण करता रहता है, लिहाजा जापान को अब रक्षात्मक मुद्रा छोड़कर आक्रामक मुद्रा में आने के लिए मजबूर हो रहा है। योमीउरी शिंबुन ने अमेरिकी रक्षा विभाग (डीओडी) के विश्लेषण का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि चीन के पास 1,900 जमीन से लॉन्च करने वाली मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और 300 मध्यवर्ती दूरी की क्रूज मिसाइलें हैं, जो जापान पर हमला करने में सक्षम हैं, लिहाजा जापान डरा हुआ है और अब आक्रामक स्थिति में आने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

उत्तर कोरिया भी बना बड़ा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की हैं, जो जापान पर हमला कर सकती हैं। इसके साथ ही, चीन और उत्तर कोरिया, इन दोनों ही देशों ने हाइपरसोनिक हथियार विकसित किए हैं जो संभवतः जापान की मिसाइल सुरक्षा को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं और अगर ऐसा होता है, तो युद्ध के हालात में जापान की सेना बड़ी मुश्किल में आ जाएगी। लिहाजा, जापान वक्त रहते अपनी तैयारी को मजबूत करने की कोशिश में जुट गया है। हेरिटेज फाउंडेशन थिंक टैंक की तरफ से वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक ब्रूस क्लिंगर ने जुलाई 2020 में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी कमेटी के निष्कर्ष पर ध्यान दिया था और उन्होंने अपने लेख में कहा था, कि जापान को फौरन मिसाइल हमलों को रोकने के लिए अपनी क्षमता विकसित करने की जरूरत है और अपने विरोधियों पर अपनी जमीन से हमला करने की क्षमता भी विकसित कर लेनी चाहिए। उन्होंने पूर्व जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे को इस परिस्थितियों की तरफ ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी और कहा था, कि मौजूदा पैट्रियट और एजिस जैसे निष्क्रिय मिसाइल रक्षा जापान की रक्षा के लिए अपर्याप्त हैं।

जापान की कमजोर रक्षा प्रणाली
वहीं, एशिया टाइम्स की एक पूर्ववर्ती रिपोर्ट में जापान की कमजोर मिसाइल रक्षा प्रणाली को लेकर एक रिपोर्ट की गई थी, जिसमें कहा गया था, कि चीन और उत्तर कोरिया से अत्यधिक ऊंचाई वाले प्रक्षेपवक्र बैलिस्टिक मिसाइल हमले के खिलाफ जापान के पैट्रियट और एजिस मिसाइल रक्षा प्रणाली काफी कमजोर हैं। चीन और उत्तर कोरिया बैलिस्टिक मिसाइलों को बहुत ऊंचे कोणों पर दाग सकते हैं, जिनकी रफ्तार अत्यधिक उच्च गति की गति होती है, जो किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता को कम कर देती है। हालांकि, किसी भी मिसाइल प्रणाली को अत्यधिक ऊंचे हमलों से बचाव के लिए अनुकूलित नहीं किया गया है, लिहाजा, भविष्य के सॉफ़्टवेयर अपग्रेड संभावित रूप से इस समस्या को कम कर सकते हैं। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मिसाइल ट्रैकिंग राडार अक्सर एक हाई ट्रेजेक्टरी के शीर्ष पर अपने लक्ष्य का ट्रैक खो देते हैं और इंटरसेप्टर मिसाइलों को हिट करने के लिए आने वाली मिसाइलों को ट्रैक करने में काफी वक्त लगाते हैं, लिहाजा इनसे सुरक्षा काफी कमजोर हो जाती है।

'मिसाइलों को गिराने की क्षमता करे विकसित'
निष्क्रिय मिसाइल रक्षा प्रणालियों में इन कमियों को देखते हुए क्लिंगर ने उल्लेख किया है, कि इसने जापान को मिसाइलों को नीचे गिराने की कमजोर क्षमता को उजागर किया है, लिहाजा जापान को चाहिए, कि सटीक निशाना लागाकर और तीव्र गति से दुश्मनों के मिसाइल को ट्रैक करने के लिए अपनी रक्षा क्षमता पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि, अगर दुश्मन हमला करता है, तो जापान को होने वाली नुकसान का आंकलन काफी ज्यादा बढ़ जाता है, लिहाजा जापान को चाहिए कि अपने डिफेंस पार्टनर अमेरिका के साथ मिलकर स्वदेशी स्ट्राइक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्माण करे, जिससे वो दुश्मन के खिलाफ अपनी डिफेंस क्षमताओं का विस्तार करे।

जापान के सामने कई मुश्किलें
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि, जापान के लिए ऐसा करना काफी मुश्किल होने वाला है, क्योंकि जापान अपनी रक्षा क्षमताओं के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर रहा है, जापान को लॉंग रेंज डिफेंस कैपेबिलिटिज विकसित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन फिर भी जापान को चाहिए, कि उसे किस प्रकार के हथियार चाहिए और उसके दुश्मन कैसे हैं, उसपर जल्द रिपोर्ट तैयार करे और अपनी क्षमताओं का विकास करे।












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