‘हमारी वजह से नहीं बढ़े दुनिया भर में तेल के दाम’, रूस से तेल खरीदने का जयशंकर ने फिर किया बचाव

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और रूस के बीच "स्थिर और मैत्रीपूर्ण" संबंधों पर एक बार फिर से खुलकर बात की। जयशंकर ने कहा है कि यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य आक्रामकता के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार किया है।

जर्मन अखबार हैंडेल्सब्लैट के साथ एक साक्षात्कार में , जयशंकर ने कहा कि रूस ने कभी भी भारत के हितों का उल्लंघन नहीं किया। एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक में भाग लेने के लिए म्यूनिख में आए जयशंकर ने कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीद कर बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने का काम किया है।

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इस सप्ताह जर्मन दैनिक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा, हर कोई पिछले अनुभवों के आधार पर रिश्ते निभाता है। अगर मैं आजादी के बाद के भारत के इतिहास को देखूं, तो रूस ने कभी भी हमारे हितों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। हमारे बीच हमेशा स्थिर और बहुत मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं... आज मॉस्को के साथ हमारा रिश्ता इसी अनुभव पर आधारित है।

उन्होंने कहा, "जिन लोगों से मैं आज बात करता हूं वे समझते हैं कि आप रिश्ते के एक हिस्से को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते।" राजनयिक ने जर्मन दैनिक को बताया कि उन्हें रूसी कच्चा तेल और गैस खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता।

जयशंकर ने कहा कि जब रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाया गया तो यूरोपीय देश इतने सक्षम थे कि वो मिडिल ईस्ट से महंगा तेल खरीद सकें लेकिन भारत ऐसा नहीं कर सकता था। भारत को रूस से सस्ती कीमतों पर तेल मिला और वो उसने खरीदा।

जयशंकर ने कहा, 'और हमें क्या करना चाहिए था? कई मामलों में, हमारे मिडील ईस्ट के आपूर्तिकर्ताओं ने यूरोपीय देशों को प्राथमिकता दी क्योंकि वो तेल के लिए ऊंची कीमतें चुका रहे थे। ऐसे में या तो फिर हमें तेल ही नहीं मिलता क्योंकि सारा तेल तो वो ले जाते या फिर हमें कच्चे तेल के लिए उतनी ही कीमत चुकानी पड़ती जितना यूरोपीय देश दे रहे थे।

जयशंकर ने कहा कि अगर रूस से कोई भी तेल नहीं खरीदता और सभी देश रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदते तो तेल बाजार में कीमतें बहुत ऊंची होतीं। जयशंकर ने कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीद कर बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने का काम किया।

इससे पहले म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान भी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदने के भारत के फैसले का दृढ़ता से बचाव किया था और कहा था कि इसे दूसरों के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए।

दरअसल, 24 फरवरी 2022 को शुरू हुई रूस-यूक्रेन जंग के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बावजूद भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना चाहता है, लेकिन यह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को भी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि भारत दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध रखने में सक्षम है।

आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सस्ता रूसी तेल खरीदने के लिए भारत के रुख को जाहिर किया हो। इससे पहले भी वे कई मंचों पर भारत का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि रूस एक सोर्स है। भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प चुनने का अधिकार है।

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