Naik Yeshwant Ghadge: कौन थे नायक यशवंत.. हिटलर के दांत खट्टे करने के लिए इटली ने दिया है सम्मान
Naik Yeshwant Ghadge: द्वितीय विश्व युद्ध में इतालवी अभियान के दौरान हिटलर के कब्जे से इटली की आजादी के लिए लड़ने वाले 50,000 भारतीय सेना के सैनिकों की याद में एक स्मारक का शनिवार को इटली में अनावरण किया गया है।
इतालवी अभियान के दौरान कार्रवाई में मारे गए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि के रूप में पेरुगिया के मोंटोन में कम्यून ऑफ मोनोटोन (इटली में) और इतालवी सैन्य इतिहासकारों ने 'वीसी यशवंत घाडगे सुंडियाल मेमोरियल' का अनावरण किया गया है। इस मेमोरियल के जरिए इटली ने भारतीय सैनिकों को इटली की रक्षा के लिए सम्मानित किया है, जिन्होंने लड़ते हुए हिटलर के सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे।

इटली की तरफ से लड़े थे भारतीय सैनिक
भारतीय सेना के ये 50 हजार जवान ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के चौथे, आठवें और 10वें डिविजन का हिस्सा थे, जो दूसरे विश्वयुद्ध में एलायड फोर्स, यानि अंग्रेजों के गुट की तरफ से एक्सिस पावर्स, यानि जर्मनी, जापान और इटली के खिलाफ लड़ रहे थे।
इटालियन अभियान साल 1943 से 1945 तक अलायट पावर्स ने चलाया था, जिसमें ग्रेट ब्रिटेन, अमेरिका और सोवियत संघ के सैनिक शामिल थे और इस अभियान का मकसद, इटली को जर्मनी के कब्जे से आजाद करवाना था।
सम्मानित होने वाले भारतीय सैनिकों में नाइक यशवंत घाडगे भी शामिल हैं। उनके सम्मान में स्मारक में एक धूपघड़ी लगाया गया है, जो एकता का प्रतीक है। इस पर आदर्श वाक्य "ओमाइंस सब ईओडेम सोल" अंकित किया गया है, जिसका अनुवाद है "हम सभी एक ही सूर्य के नीचे रहते हैं।"
नाइक यशवंत घाडगे, जिस वक्त हिटलर के सैनिकों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए थे, उस वक्त उनकी उम्र 22 साल थी, लेकिन उन्होंने काफी बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी।
इटली में भारत की राजदूत और भारतीय रक्षा अताशे डॉ. नीना मल्होत्रा ने समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। शनिवार को इस कार्यक्रम में कई इतालवी नागरिक, विशिष्ट अतिथि और इतालवी सशस्त्र बलों के सदस्य भी शामिल हुए थे।
दिलचस्प बात यह है कि इटली में दिए गए 20 विक्टोरिया क्रॉस में से छह भारतीय सैनिकों को दिए गए हैं।
दूसरे विश्वयुद्ध में इटली में 23 हजार 722 भारतीय सैनिक हताहत हुए थे। जिनमें से 5 हजार 782 सैनिकों ने जान गंवाई थी। इटली के साथ साथ कॉमनवेल्थ के 40 देशों की तरफ से अभी भी उनके लिए श्रद्धांजलि दी जाती है।
बहादुरी से लड़े थे नायक यशवंत
दूसरी विश्वयुद्ध के दौरान 10 जुलाई 1944 को इटली की ऊपरी तिबर घाटी में नाइक (कॉर्पोरल) यशवन्त घाडगे अपनी टीम के साथ दुश्मनों का मुकाबला कर रहे थे, जब उनके पोस्ट पर मशीन गन से भारी गोलीबारी की गई थी, जिसमें कमांडर को छोड़कर सेक्शन के या तो सभी जवान मारे गये या बुरी तरह से घायल हो गये।
उसके बाद बिना किसी हिचकिचाहट और बिना किसी डर के नाइक यशवन्त घाडगे ने मोर्चा संभाला और सबसे पहले एक ग्रेनेड फेंका, जिससे दुश्मन के बंदूक और उनके फायरर नष्ट हो गए। फिर वो मौत बनकर दुश्मनों पर टूट पड़े थे और मशीन गन चलाने वाले तीन विपक्षी सैनिकों को मार गिराया।
हालांकि, इस दौरान वह एक दुश्मन स्नाइपर की गोली से गंभीर घायल हो गए और फिर वो वीरगति को प्राप्त हो गये। 2 नवंबर 1944 को उन्हें मरणोपरांत इटली के सर्वोच्च सैन्य सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया, जो आधिकारिक तौर पर 'द लंदन गजट' में प्रकाशित है।












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