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    इसराइल-फ़लस्तीन संघर्ष: गज़ा पट्टी में कैसी है ज़िंदगी

    By Bbc Hindi

    फ़लस्तीन की गज़ा पट्टी चारों तरफ़ से घिरा हुआ एक छोटा-सा ज़मीन का टुकड़ा है. क़रीब 41 मीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ी गज़ा पट्टी में 19 लाख लोग रहते हैं. ज़मीन का ये छोटा सा टुकड़ा एक तरफ़ भूमध्य सागर, तो दूसरी तरफ़ इराइल से घिरा है. इसकी दक्षिणी सरहद मिस्र से मिलती है.

    गज़ा का नक्शा
    BBC
    गज़ा का नक्शा

    कभी गज़ा के वजूद पर मिस्र का क़ब्ज़ा हुआ करता था. लेकिन 1967 के मध्य-पूर्व के युद्ध मे गज़ा पट्टी पर इसराइल ने क़ब्ज़ा कर लिया. साल 2005 में इसराइल ने गज़ा से अपने सैनिक और क़रीब 7 हज़ार लोग जो यहां बसाए थे, वो हटा लिए.

    आज की तारीख़ में गज़ा का प्रशासन फ़लस्तीन के हाथ में है. 2007 से 2014 के बीच गज़ा पर फ़लस्तीनी इस्लामिक चरमपंथी संगठन हमास की हुकूमत रही थी. हमास ने 2006 में फ़लस्तीन विधानसभा के चुनाव में जीत हासिल की थी. लेकिन उसके बाद उनका विरोधी फ़तह गुट से हिंसक टकराव हो गया था,

    जब हमास ने गज़ा पर अपना नियंत्रण स्थापित किया, तो इसराइल ने इस इलाक़े की नाकेबंदी शुरू कर दी. इंसान हो या सामान, गज़ा आने और जाने पर इसराइल ने तमाम तरह की बंदिशें लगा दीं. वहीं मिस्र ने गज़ा की दक्षिणी सीमा की नाकेबंदी कर दी.

    2014 में हमास और इसराइल के बीच काफ़ी दिनों तक हिंसक झड़पें होती रहीं. इसराइल ने गज़ा से रॉकेट हमले रोकने की कोशिश की. वहीं हमास अपने आप को अलग-थलग पड़ने के हालात से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था.

    आवाजाही की आज़ादी

    गज़ा पट्टी
    AFP/GETTY
    गज़ा पट्टी

    नाकेबंदी की वजह से गज़ा के हालात पहले ही ख़राब थे. लेकिन 2013 में मिस्र ने गज़ा से लगती रफ़ा की सीमा पर नाकेबंदी और सख़्त कर दी. नतीजा ये हुआ कि गज़ा आने-जाने में और भी मुश्किलें पेश आने लगीं. मिस्र ने गज़ा और मिस्र की सीमा पर सामान की तस्करी के लिए बनाई गई सुरंगों से निपटने में सख़्ती बरतनी शुरू कर दी. सीमा पर और बंदिशें लगा दीं.

    अक्टूबर 2014 से मिस्र ने गज़ा से लगी सीमा को कमोबेश पूरी तरह से बंद कर दिया है. मिस्र इस सीमा को बेहद असाधारण हालात में ही खोलता है. संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवीय मामलों के संयोजक के दफ़्तर ( ऑफ़िस फ़ॉर द कोऑर्डिनेशन ऑफ़ ह्यूमनटेरियन अफ़ेयर्स) के मुताबिक़, रफ़ा की सीमा को मिस्र ने अप्रैल 2018 में केवल 17 दिनों के लिए खोला था. तब 23 हज़ार लोगों ने इस सीमा से बाहर निकलने के लिए 23 हज़ार लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. उन्हें निकालने के लिए ही मिस्र ने ये सीमा खोली थी.

    उत्तर में इसराइल से लगने वाले एरेज़ बॉर्डर की बात करें, तो, इस साल वहां से आवाजाही 2017 के मुक़ाबले तेज़ हुई है. लेकिन ये तादाद नाकेबंदी के पहले के दौर से अब भी काफ़ी कम है.

    2017 के पहले छह महीने में इज़राइल के रास्ते गज़ा से बाहर जाने वाले फ़लस्तीनियों की तादाद 240 से भी कम थी. जबकि सितंबर 2000 में ये संख्या रोज़ाना क़रीब 26 हज़ार के आस-पास थी.

    गज़ा की अर्थव्यवस्था

    गज़ा पट्टी
    Getty Images
    गज़ा पट्टी

    90 के दशक के मुक़ाबले आज गज़ा पट्टी बेहद ग़रीबी के हालात से गुज़र रही है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2017 में गज़ा की अर्थव्यवस्था की विकास दर महज़ 0.5 फ़ीसद रही थी. 1994 में गज़ा में सालाना प्रति व्यक्ति आमदनी जहां 2659 डॉलर थी. 2018 में ये घटकर 1826 डॉलर सालाना ही रह गई है.

    2017 के विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि गज़ा पट्टी में बेरोज़गारी की दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है. गज़ा में इस वक़्त बेरोज़गारी की दर 44 प्रतिशत है, जो फ़लस्तीन के दूसरे हिस्से वेस्ट बैंक के मुक़ाबले दोगुनी है.

    इसमें भी युवाओं के बीच बेरोज़गारी की दर 60 फ़ीसद के क़रीब है, जो और भी फ़िक्र की बात है.

    ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, गज़ा पट्टी में ग़रीबी की दर 39 प्रतिशत है, जो वेस्ट बैंक इलाक़े से दोगुनी से भी ज़्यादा है. विश्व बैंक का मानना है कि अगर संयुक्त राष्ट्र की रिलीफ़ ऐंड वर्क एजेंसी की तरफ़ से गज़ा के लोगों को सामाजिक राहत के नाम पर मदद न मिले, तो वहां गरीबी की दर और भी बढ़ सकती है.

    संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी का कहना है कि गज़ा की 80 फ़ीसदी आबादी इसी सामाजिक सहयोग की इमदाद के भरोसे है.

    गज़ा में शिक्षा के हालात

    गज़ा पट्टी
    AFP/GETTY
    गज़ा पट्टी

    गज़ा की स्कूल शिक्षा व्यवस्था भी बहुत दबाव में है. संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNRWA के मुताबिक़, गज़ा के 94 फ़ीसद स्कूल 'डबल शिफ़्ट' में चलते हैं. यानी कुछ बच्चों को सुबह तो कुछ को दोपहर बाद स्कूल बुलाया जाता है.

    गज़ा में संयुक्त राष्ट्र की मदद से 250 स्कूल चलते हैं. इनकी वजह से यहां साक्षरता की दर 97 फ़ीसद तक है. लेकिन जो स्कूल बिना संयुक्त राष्ट्र की मदद के चलते हैं, उनकी हालत बहुत ख़राब है. 2014 में इज़राइल से हिंसक झड़पों की वजह से 547 स्कूलों को भी नुक़सान पहुंचा था. इनमें किंडरगार्टेन स्कूल से लेकर कॉलेज तक थामिल थे. इनकी मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है.

    इसका नतीजा ये है कि जो स्कूल चल रहे हैं उनकी कक्षाओं में बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट कहती है कि 2017 में गज़ा के स्कूलों की हर कक्षा में औसतन 40 बच्चे पढ़ते हैं.

    संयुक्त राष्ट्र के फंड फॉर पॉपुलेशन एक्टिविटीज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2015 में गज़ा में स्कूली छात्रों की संख्या 6 लाख 30 हज़ार थी. 2030 में इसके बढ़कर 12 लाख होने का अनुमान है. इसका मतलब ये है कि 2030 तक गज़ा पट्टी को 900 नए स्कूलों और 23 हज़ार और अध्यापकों की ज़रूरत होगी.

    गज़ा में आबादी का हाल

    गज़ा पट्टी आबादी के लिहाज़ से दुनिया के सबसे घने बसे इलाक़ों में से एक है. यहां एक वर्ग किलोमीटर इलाक़े में औसतन 5,479 लोग रहते हैं. 2020 तक ये संख्या 6,197 तक पहुंचने का अनुमान है.

    मौजूदा दशक के आख़िर तक यहां की आबादी 22 लाख पहुंचने का अंदाज़ा लगाया जा रहा है, जो कि 2030 तक 31 लाख हो सकती है.

    गज़ा का नक्शा
    BBC
    गज़ा का नक्शा

    2014 में इज़राइल ने गज़ा और अपने बीच एक 'बफ़र ज़ोन' बना दी थी. इसका मक़सद ख़ुद को रॉकेट हमलों और तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाली सुरंगों से बचाना था. इस 'बफ़र ज़ोन' की वजह से गज़ा के लोगों की रिहाइश या खेती के लिए ज़मीन और भी कम हो गई.

    2014 कि हिंसा और आबादी बढ़ने की क़ुदरती रफ़्तार की वजह से आज गज़ा में 1 लाख 20 हज़ार मकानों की कमी बताई जा रही है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ 2014 की लड़ाई के बाद से अब तक 29 हज़ार लोग बेघर हैं.

    गज़ा की आबादी दुनिया की सबसे युवा जनसंख्या वाली है. यहां की आबादी में 40 फ़ीसद की उम्र 15 साल से कम है.

    गज़ा के युवक
    BBC
    गज़ा के युवक

    गज़ा में स्वास्थ्य का हाल

    गज़ा पट्टी
    AFP/GETTY
    गज़ा पट्टी

    सीमाओं की नाकेबंदी की वजह से यहां के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में भी मुश्किलें आ रही हैं.

    रफा सीमा पर मिस्र की नाकेबंदी की वजह से इलाज के लिए मिस्र जाने वालों की संख्या काफ़ी घट गई. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, 2014 से पहले हर महीने औसतन क़रीब चार हज़ार लोग सिर्फ़ इलाज के लिए गज़ा से मिस्र जाते थे.

    इज़राइल के रास्ते भी बाहर निकलने वालों की संख्या काफ़ी कम हो गई है. 2012 में स्वास्थ्य वजहों से बाहर जाने के लिए पास लेने वालों की तादाद 93 प्रतिशत थी. ये 2017 में घटकर 54 फ़ीसद ही रह गई थी.

    नाकेबंदी की वजह से गज़ा के अस्पतालों को दवाएं और इलाज के लिए जरूरी उपकरण भी नहीं मिल पा रहे हैं. इनमें डायलिसिस मशीनों से लेकर दिल के इलाज में काम आने वाली मशीनें भी शामिल हैं.

    गज़ा में संयुक्त राष्ट्र संघ की मदद से 22 अस्पताल चलते हैं. लेकिन इज़राइल के साथ पिछली लड़ाई में कई अस्पतालों को क्लिनिक को नुक़सान पहुंचा था. साल 2000 से यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संक्या 56 से घटकर 49 ही रह गई है. जबकि इस दौरान आबादी क़रीब दोगुनी हो गई.

    हाल ही में जनरेटर चलाने के लि ईंधन की कमी की वजह से भी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा. फ़िलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, बिजली की कमी की वजह से तीन अस्पताल और 10 मेडिकल सेंटर बंद करने पड़े हैं.

    गज़ा में खान-पान

    गज़ा पट्टी
    AFP/GETTY
    गज़ा पट्टी

    गज़ा में रहने वाले दस लाख से ज़्यादा लोगों खाने-पीने के सामान की असुरक्षा झेलने वाले बताए जाते हैं. मतलब ये कि इन्हें नियमित रूप से खाना मिलेगा या नहीं इसकी गारंटी नहीं होती. जबकि यहां के ज़्यादातर लोगों को संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ़ से खाने-पीने की मदद मिलती है.

    खेती और मछली मारने को लेकर इज़राइल ने गज़ा के लोगों पर तमाम तरह की पाबंदियां लगा रखी हैं. इससे गज़ा के लोगों की चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं.

    इसराइल ने सीमा पर 'बफ़र ज़ोन' बना रखा है. गज़ा के बाशिंदे इस इलाक़े में खेती नहीं कर सकते हैं. ये बफ़र ज़ोन गज़ा के ही क़रीब 1.5 किलोमीटर चौड़े इलाक़े में बनाई गई है. इस बफ़र ज़ोन की वजह से गज़ा में अनाज का उत्पादन सालाना क़रीब 75 हज़ार टन तक घट गया है.

    इसराइल ने जिस इलाक़े में खेती पर पाबंदी लगाई है, वो गज़ा का सबसे उपजाऊ इलाक़ा माना जाता है, जहां सिंचाई के साधन मौजूद हैं. इसकी वजह से गज़ा की अर्थव्यवस्था में 1994 में जहां खेती का योगदान 11 फ़ीसद था, वहीं 2018 में ये घटकर महज़ 5 प्रतिशत रह गया है.

    इसराइल ने गज़ा के बाशिंदों पर मछली मारने को लेकर भी पाबंदियां लगा रखी हैं. गज़ा के लोग तट से कुछ दूर तक जाकर ही मछली का शिकार कर सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अगर ये पाबंदी हटा ली जाए, तो मछली मारने के धंधे से गज़ा के काफ़ी लोगों को रोज़गार मिल सकता है. उन्हें मछलियों से सस्ता प्रोटीन भी हासिल होगा.

    नवंबर 2012 में इज़राइल और हमास के बीच युद्ध विराम के बाद मछली मारने का दायरा तीन समुद्री मील से बढ़ाकर 6 समुद्री मील तक कर दिया गया था. लेकिन जब भी गज़ा से इज़राइल पर रॉकेट दाग़े जाते हैं, तो ये सीमा घटाकर फिर 3 मील कर दी जाती है. जब भी फ़िलिस्तीनी मछुआरे तीन मील के दायरे से बाहर जाने हैं, तो इसराइल के नौसैनिक उन पर गोलीबारी करते हैं.

    गज़ा में बिजली का हाल

    गज़ा में बिजली कटौती आम बात है. यहां लोगों को दिन में औसतन 3 से 6 घंटे ही बिजली मिलती है. गज़ा को ज़्यादातर बिजली इसराइल से मिलती है. ख़ुद गज़ा में सिर्फ़ एक बिजली घर है. उसे थोड़ी-बहुत बिजली मिस्र से भी मिलती है. लेकिन, विश्व बैंक कहता है कि कुल मिलाकर गज़ा को अपनी ज़रूरत की एक तिहाई बिजली ही मिलती है.

    गज़ा का इकलौता बिजली घर और लोगों को अपने जेनरेटर चलाने के लिए डीज़ल की ज़रूरत होती है. डीज़ल बहुत महंगा है और मिलता भी बहुत मुश्किल से है.

    संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गज़ा के पास समंदर में गैस का एक इलाक़ा है, जिससे गज़ा की बिजली की सारी ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं. लेकिन इसका विकास करना होगा. इससे ज़रूरत पूरी होने के बाद बची बिजली को विकास के काम में इस्तेमाल किया जा सकता है.

    गज़ा पावर प्लांट का डिज़ाइन शुरुआत में गैस से चलने के लिए ही किया गया था. विश्व बैंक का मानना है कि अगर इस पावर प्लांट को फिर से गैस से चलाया जाए, तो इससे लाखों डॉलर की बचत भी होगी और बिजली का उत्पादन भी पांच गुना तक बढ़ सकता है.

    गज़ा में पानी और साफ़-सफ़ाई के हालात

    गज़ा में बारिश कम होती है. नतीजा ये कि यहां भूगर्भ जल के स्तर को बनाए रखने के लिए ताज़े पानी का कोई और ज़रिया भी नहीं है. वैसे भी भूगर्भ जल से भी यहां की पानी की ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं.

    गज़ा के ज़्यादातर घरों में पानी की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछी है. लेकिन, विश्व बैंक का कहना है कि नलों में नियमित रूप से पानी नहीं आता. जो पानी आता भी है उसकी क्वालिटी ख़राब होती है. गज़ा के 97 फ़ीसद लोग टैंकर के पानी के भरोसे हैं.

    यहां सीवेज की समस्या भी भयंकर है. 78 फ़ीसद घर सीवेज नेटवर्क से तो जुड़े हैं. लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बढ़ती आबादी का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं. यहां से रोज़ाना 9 करोड़ लीटर सीवेज भूमध्य सागर और खुले तालाबों में बहाया जाता है. ये पूरी तरह से साफ़ किया हुआ नहीं होता. इसकी वजह से ज़मीन से निकाला जाने वाला 95 फ़ीसद पानी भी सीवेज की वजह से गंदा हो गया है.

    एक ख़तरा ये भी है कि यहां सीवेज बहकर सड़कों और गलियों में आ सकता है. इससे गज़ा के लोगों को सेहत से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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    English summary
    Israel Palestine Conflict How is life in Gaza Strip

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