इजरायल में चाहकर भी नेतन्याहू को नहीं हटा पाएगा सुप्रीम कोर्ट, पास हुआ न्यायिक सुधार बिल

Knesset passes law: आलोचकों का कहना है कि यह कानून पीएम नेतन्याहू को गिरफ्तारी से बचाने के लिए बनाया गया है। उनका कहना है कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कानून और जनता के बीच खाई और चौड़ी होगी।

Israel Knesset passes law

image: Oneindia

इजराइल में न्यायिक प्रणाली में सुधार से जुड़ा बिल गुरुवार को बहुमत से पारित हो गया है। नेतन्याहू सरकार ने इसे इजरायल की संसद नेसेट में कई घंटे और लंबी बहस के बाद 61-47 वोटों के अंतर से पास करा लिया। विपक्ष ने बिल पर कई आपत्तियां दर्ज की थीं, लेकिन सरकार उन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इसे पास कराने में सफल साबित हुई। नए कानून के मुताबिक अब सुप्रीम कोर्ट की प्रधानमंत्री को पद से हटाने की शक्ति छीन ली गई है। विपक्षी पार्टियों ने नए कानून की आलोचना करते हुए कहा कि ये कानून मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बचाने के लिए बनाया गया है।

PM को हटाने का अधिकार सिर्फ संसद को

नए कानून के मुताबिक अब प्रधानमंत्री या कैबिनेट ही किसी नेता को बहुमत से किसी सांसद को अयोग्य साबित कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट से यह शक्ति छीन ली गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री को अक्षम घोषित करने का अधिकार भी सिर्फ और सिर्फ केसेट(संसद) के पास रह गया है। प्रधानमंत्री को भी तभी हटाया जा सकता है जब वो शारीरिक या मानसिक तौर पर अनफिट हो। लेकिन इसके लिए भी संसद में कम से कम 75 फीसदी सांसदों का समर्थन हासिल करना जरुरी होगा। इतना ही नहीं नए बिल के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री को अक्षम घोषित करने के अनुरोध पर विचार भी नहीं कर सकती है।

सरकारी 'तनाशाह' बने पीएम

नए कानून के मुताबिक इजरायल के पीएम संसद को जानकारी देकर खुद इस्तीफा दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें दो-तिहाई सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। इस बिल के पारित होने के बाद विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने हल्ला बोल दिया है। उन्होंने कहा कि पीएम नेतन्याहू खुद ने खुद को बचाने के लिए इस बिल को पारित कराया है। विपक्षी पार्टी के लीडर यायर लैपिड ने कानून के पारित होने के साथ-साथ गठबंधन के सदस्यों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने रात में अफवाह फैला कर एक अश्लील और भ्रष्ट कानून को पास कराया है। इससे साबित होता है कि नेतन्याहू को जनता से नहीं बल्कि सिर्फ खुद से मतलब है।

हाईकोर्ट में अपील करेगा विपक्ष

विपक्षी नेता एमके एविग्डोर लिबरमैन ने कहा कि उनकी पार्टी हाईकोर्ट में इसके खिलाफ पेटीशन लगाएंगी। इजराइल में लोकतंत्र है, हम इसे नेतन्याहू की राजशाही में तब्दील नहीं होने देंगे। मजदूर नेता मेरव माइकली ने कहा कि नया कानून शर्मनाक और अपमानजनक है। इस कानून का एकमात्र उद्देश्य नेतन्याहू को जेल भेजने से रोकना है। हम इसके खिलाफ विरोध जारी रखेंगे। यह हमारी स्वतंत्रता का दूसरा युद्ध है, और हमें इसे जीत कर रहेंगे।

इजरायली पीएम पर चल रहे कई केस

दरअसल नेतन्याहू के ऊपर 3 करप्शन केस चल रहे हैं। इनमें रिश्वत लेने, अपने खास लोगों से महंगे तोहफे लेने के आरोप हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सिगार और शैंपेन जैसी चीजों को घूस के तौर पर लिया और खबर प्रकाशित करने के एवज में मीडिया के लोगों को राजनीतिक लाभ दिया। सरकार ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि यह एक पीएम को उसकी इच्छा के विरुद्ध हटाए जाने को कठिन बनाकर देश में स्थिरता लाएगा। आपको बता दें कि सरकार इस कानून को लेकर देश में लगभग 3 महीने से प्रदर्शन चल रहे हैं।

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