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अडानी ग्रुप की कंपनी में बने हर्मीस 900 ड्रोन से हमास के आतंकियों का सफाया कर रहा इजराइल, रिपोर्ट में खुलासा

हाइलाइट्स

  • इजराइल को भारत में बने ड्रोन की डिलीवरी
  • इजराइल का डेथ ड्रोन कहा जाता है हर्मीस 900
  • कई तरह के गाइडेड बम ले जाने में सक्षम

7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद इजराइल ने जब गाजा में जंग शुरू किया था तो आशंका जताई जा रही थी कि इजराइली सेना के लिए ये अभियान आसान नहीं होने जा रहा है। अत्याधुनिक हथियारों से लैस हजारों आतंकियों की मौजूदगी में गाजा पट्टी दुनिया की सबसे खतरनाक जगह मानी जा रही थी।

लेकिन जंग शुरू होने के 4 महीने के बाद हमारे पास जो आंकड़ें हैं उसे देखकर हम कह सकते हैं कि इस जंग कि कदर इजराइली सेना हमास के आतंकियों पर भारी पड़ी है। इस युद्ध में इजराइली सेना ने हजारों आंतकियों का सफाया किया है।

Indian-made Israeli killer drones

गाजा युद्ध में इजराइल की इस सफलता का श्रेय उसके खतरनाक ड्रोन को दिया जा रहा है। इजराइली सेना के लिए ये ड्रोन बेहद फायदेमंद साबित हुए हैं। इसकी मदद से वे आतंकियों की गतिविधियां मॉनिटर करने में, एयरस्ट्राइक में, आतंकवादियों की तलाश में, युद्धस्थल का जायजा लेने में, हथियार ले जाने जैसे दर्जनों कामों में इन ड्रोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इजराइल को 20 हर्मीस ड्रोन की डिलीवरी

इस बीच खबर आ रही है कि गाजा में चल रहे युद्ध के बीच भारत ने कथित तौर पर इजराइल को 20 हर्मीस-900 ड्रोन दिए हैं। ये उन चार ड्रोनों में से एक है जिसका इस्तेमाल इजराइल गाजा में कर रहा है। हर्मीस 900 को उसकी खतरनाक क्षमताओं के कारण डेथ ड्रोन नाम दिया गया है।

2 फरवरी को शेफर्ड मीडिया की रिपोर्ट में बताया गया था कि इजराइल ने अडानी-एलबिट एडवांस्ड सिस्टम्स इंडिया लिमिटेड से 20 भारतीय निर्मित हर्मीस 900 ड्रोन की डिलीवरी ली थी।

ये भारत में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इजराइल के एल्बिट सिस्टम्स के बीच एक संयुक्त उद्यम है। हालांकि न तो भारत और न ही इजराइल ने इसकी पुष्टि की है और न ही किसी भी रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ड्रोन वास्तव में इजराइल को कब सौंपे गए थे।

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और रक्षा विश्लेषकों ने इस डील को लेकर चिंता जाहिर की है। उनके मुताबिक ये ड्रोन सौदा इजराइल के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करता है और दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और सैन्य संबंधों को उजागर करता है।

भारत का करीबी बना इजराइल

MEE की रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के सालों में भारत और इजराइल के बीच बढ़ती नजदीकी को देखते हुए, गाजा में इजराइल द्वारा भारतीय निर्मित हथियारों का उपयोग करने की संभावना "चौंकाने वाली लेकिन आश्चर्यजनक" थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मोदी सरकार बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तेजी देखी गई है।

भारत, इजराइली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत, इजराइल के काफी करीब आ गया है। भारत, इजराइली हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है, जिसकी राशि प्रति वर्ष 1 बिलियन डॉलर से अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015-2019 के बीच, भारतीय इजराइली हथियारों की खरीद में 175 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारतीय-इजरायली कंपनियों ने पूरे भारत में कारखानों में हथियारों का उत्पादन शुरू कर दिया है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत के साथ साझेदारी से इजराइली हथियारों के बड़े पैमाने पर उत्पादन में मदद मिल रही है।

हैदराबाद में हर्मीस 900 का निर्माण

हर्मीस-900 ड्रोन का निर्माण हैदराबाद में एक निजी विनिर्माण फैसेलिटीज में किया जाता है। आपको बता दें कि इजराइल इस खतरनाक ड्रोन का इस्तेमाल पहले से करता आ रहा है।

हर्मीस 900 ड्रोन को कोशेव या द स्टार भी कहा जाता है। कहा जाता है कि हर्मीस 900 का निशाना इतना सटीक होता है कि यह चलती कार में भी अपने टार्गेट पर सटीक निशाना लगा सकता है। अगर एक चलती कार में चार लोग बैठे हैं और सिर्फ ड्राइवर को निशाना बनाना है तो यह ड्राइवर को ही खत्म करेगा।

कई खूबियों से लैस है हर्मीस 900

अपनी सटीक क्षमता के लिए इसे इजराइल का डेथ ड्रोन भी कहा जाता है। हर्मीस 900 कई तरह के गाइडेन बम ले जाने में काबिल है। ये एक बार में 30 घंटे तक की उड़ान भर सकता है और 500 किलो तक का सामान ले जा सकता है। ये एचडी ऑप्टिकल सेंसर से लैस है।

हम ऊपर आपको बता ही चुके हैं कि इसमें लेजर पिनप्वांइट टारगेस हिटिंग की क्षमता है। ये इतना काबिल है कि IDF की ग्राउंड ऑपरेशन फोर्स और नेवी को यह बिल्कुल सटीक टारगेट और लोकेशन की जानकारी देता है और टार्गेट दूर रहने पर खुद निशाना लगाने की काबिलियत रखता है।

यह न सिर्फ किसी खास प्वाइंट पर निशाना लगाने में सक्षम है बल्कि यह किसी इलाके का पूरी तरह से सफाया करने में भी सक्षम है। इतना ही नहीं ये आखिरी वक्त पर अपना निशाना बदलने में भी सक्षम है।

1 हर्मीस 900 की कीमत 7 अरब

इसके सभी कैमरे रियल टाइम कवरेज करते हैं। इजराइल ने बीते साल 20 दिंसबर से इसका इस्तेमाल करना शुरू किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ 1 हर्मीस 900 ड्रोन की कीमत लगभग 7 अरब रुपये है।

कई रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इजराइली सेना अपने मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के विस्तारित बेड़े में भारत निर्मित हर्मीस 900 ड्रोन को शामिल करने के लिए तैयार है, जिससे गाजा पर इजरायल के युद्ध में भारत और फंस जाएगा।

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