Iran Vs America War: परमाणु ठिकाने, हॉर्मुज की नाकेबंदी और सम्मान की जंग! ईरान क्यों नहीं चाहता युद्ध खत्म हो?
Iran Vs America War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक युद्ध रोकने की घोषणा और हाथ पीछे खींचने के संकेतों के बावजूद, ईरान इस जंग को खत्म करने के लिए आसानी से राजी होता नहीं दिख रहा है। हालांकि, सऊदी मीडिया की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए कड़ी शर्तें रखी हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के लिए यह केवल युद्ध विराम नहीं, बल्कि 'अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई' है। ईरान ने अपने पिछले सर्वोच्च नेता, शीर्ष कमांडरों और बुनियादी ढांचे के रूप में भारी कीमत चुकाई है। ऐसे में वह बिना ठोस सुरक्षा गारंटी, आर्थिक प्रतिबंधों के खात्मे और परमाणु अधिकारों की मान्यता के पीछे हटने को तैयार नहीं है। जब तक इजरायल 'सत्ता परिवर्तन' के अपने लक्ष्य पर अड़ा है, तब तक शांति की राह बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं वो 5 कारण, क्यों ईरान अभी युद्ध खत्म करना नहीं चाहता।

US Israel Iran War Update Hindi: खोई हुई सैन्य और राजनीतिक साख की बहाली
ईरान इस युद्ध में अपनी प्रतिष्ठा को लगी गहरी चोट से उबरना चाहता है। पहले ही दिन सर्वोच्च नेता और 40 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या ने ईरान के सुरक्षा तंत्र की कमियों को उजागर कर दिया था। अब मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान यह साबित करना चाहता है कि वह अब भी एक क्षेत्रीय शक्ति है। बिना किसी 'सम्मानजनक' समझौते या अमेरिका-इजरायल की ओर से झुकने के संकेतों के, ईरान युद्ध खत्म करना अपनी हार मानेगा।
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परमाणु अधिकारों और यूरेनियम पर अड़ियल रुख
ईरान के पास मौजूद 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम उसका सबसे बड़ा 'सुरक्षा कवच' है। अमेरिका और इजरायल इसे अपने कब्जे में लेना चाहते हैं, जबकि ईरान इसे परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत अपना अधिकार बताता है। मुजतबा खामेनेई की शर्तों में सबसे प्रमुख यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भविष्य में कोई खतरा नहीं पहुंचाया जाएगा। जब तक यह गारंटी नहीं मिलती, ईरान अपनी मिसाइलें दागना बंद नहीं करना चाहता।
आर्थिक प्रतिबंधों का पूर्ण और स्थाई खात्मा
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल और गैस पर टिकी है, जिसे अमेरिका ने हमलों और प्रतिबंधों से पंगु बना दिया है। सऊदी मीडिया की रिपोर्ट संकेत देती है कि खामेनेई तभी बातचीत की मेज पर आएंगे जब सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं। ईरान का मानना है कि केवल युद्ध रुकने से उसकी जनता का भला नहीं होगा; उसे वैश्विक बाजार में फिर से व्यापार करने की छूट चाहिए। बिना इस आर्थिक राहत के, वह जंग जारी रखकर दुनिया पर दबाव बनाना बेहतर समझता है।
इजराइल का 'सत्ता परिवर्तन' का डर
युद्ध का एक मुख्य उद्देश्य ईरान में शासन बदलना था। इजराइल अब भी इस लक्ष्य से पीछे नहीं हटा है। मुजतबा खामेनेई को डर है कि यदि वे अभी युद्ध रोकते हैं, तो इजराइल भविष्य में फिर से 'टारगेटेड किलिंग' और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करेगा। ईरान को अमेरिका से यह पक्की और लिखित गारंटी चाहिए कि वे उसके आंतरिक मामलों और शासन प्रणाली में दोबारा दखल नहीं देंगे।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक दबाव
ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ईरान जानता है कि इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है। वह इस दबाव को तब तक बनाए रखना चाहता है जब तक कि उसकी सभी शर्तें मान ली न जाएं। ट्रंप की 5 दिनों की रोक के बावजूद, ईरान इसे तब तक नहीं खोलेगा जब तक उसे अपनी सुरक्षा और व्यापारिक हितों का पक्का आश्वासन नहीं मिल जाता।












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