ईरान की अमेरिका को चेतावनी: खाड़ी में UAS के सैन्य अड्डे पर हमले को बताया "चेहरे पर तमाचा"

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के कतर स्थित सैन्य अड्डे पर ईरानी हमले ने "अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा" है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दोबारा कोई हमला किया, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह उनकी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया थी जबसे 12 दिनों के युद्ध के बाद ईरान और इज़राइल के बीच संघर्षविराम घोषित हुआ है।

खामेनेई, जो 13 जून को युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे, उन्होंने एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश में ईरानी राज्य टीवी पर यह बातें कहीं। 86 वर्षीय खामेनेई वीडियो में पहले की तुलना में अधिक थके हुए नजर आए। उनकी आवाज में कमजोरी थी और उन्होंने कई बार शब्दों को दोहराया या लड़खड़ाया।

Iran Strikes US Base in Qatar

इस 10 मिनट से अधिक लंबे भाषण में उन्होंने अमेरिका और इज़राइल को खुलकर चेतावनी दी। उन्होंने रविवार को अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु स्थलों पर किए गए हमलों को कम करके बताया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को "बढ़ा-चढ़ाकर" बताया जिसमें ट्रंप ने कहा था कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को "पूरी तरह नष्ट कर दिया।"

IAEA प्रमुख ने कहा: "परमाणु स्थलों को बहुत भारी नुकसान"

संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने गुरुवार को पुष्टि की कि अमेरिका और इज़राइल के हमलों से ईरान की परमाणु साइटों को "बहुत, बहुत, बहुत अधिक नुकसान" हुआ है। उन्होंने फ्रांसीसी रेडियो RFI को बताया कि "नष्ट कर दिया कहना अतिशयोक्ति होगी, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा है।" ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने भी बुधवार को माना कि "हमारी परमाणु सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं, यह तो तय है।"

"अमेरिका ईरान के खिलाफ कुछ हासिल नहीं कर सका"

खामेनेई ने दावा किया कि अमेरिका ने युद्ध में सिर्फ इसलिए हस्तक्षेप किया क्योंकि "अगर वह हस्तक्षेप नहीं करता, तो ज़ायनिस्ट शासन पूरी तरह तबाह हो जाता।" उन्होंने कहा कि ईरान ने सोमवार को कतर स्थित अमेरिकी अड्डे पर जो हमला किया, वह यह दिखाता है कि "हम क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों तक पहुंच रखते हैं और ज़रूरत पड़ी तो दोबारा हमला कर सकते हैं। इस्लामी गणराज्य विजयी रहा और बदले में अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा है। यदि भविष्य में कोई आक्रामकता हुई, तो दुश्मन को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

संघर्षविराम के बाद ईरान में सामान्य स्थिति की ओर लौटती ज़िंदगी

गुरुवार को ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से फिर से खोल दिया जो युद्ध शुरू होने के बाद से बंद था। राजधानी तेहरान में दुकानें दोबारा खुलने लगी हैं और सड़क यातायात भी सामान्य हो रहा है। ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अखवन ने बताया कि देश के पूर्वी हिस्से में अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अनुमति दी गई है।

ईरान सरकार के मुताबिक इस संघर्ष में देश में 606 लोगों की मौत और 5,332 लोग घायल हुए। वहीं, वॉशिंगटन स्थित मानवाधिकार संगठन "ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स" के आंकड़ों के अनुसार 1,054 लोगों की मौत और 4,476 लोग घायल हुए, जिनमें 417 नागरिक और 318 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। इज़राइल के अनुसार युद्ध में उनके 28 नागरिकों की मौत हुई और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए।

ईरान-इज़राइल युद्ध के आंकड़े

ईरान ने इस युद्ध के दौरान 550 से अधिक मिसाइलें इज़राइल पर दागीं, जिनमें से 90% को इंटरसेप्ट कर लिया गया, जबकि इज़राइल ने 720 से अधिक मिसाइलों से ईरानी सैन्य ठिकानों और 8 परमाणु से जुड़े स्थलों को निशाना बनाया।

संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगले सप्ताह ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत होगी, जिससे लंबे समय तक शांति की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने ऐसी किसी वार्ता की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संवाद हुआ है।

इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ओमान में अमेरिका-ईरान के बीच छठे दौर की वार्ता होनी थी, लेकिन 13 जून को इज़राइल के हमले के बाद यह रद्द हो गई। ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेगा। इस दिशा में ईरानी संसद ने IAEA के साथ सहयोग समाप्त करने के लिए प्रस्ताव को तेज़ी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

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