ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- इस्‍लाम में हराम है परमाणु हथियारों का प्रयोग, अब हम कभी नहीं चलेंगे इस रास्‍ते

तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला खामनेई ने बुधवार को परमाणु हथियारों पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्‍होंने कहा कि ईरान ने परमाणु हथियारों को वि‍कसित जरूर किया है लेकिन अब वह इनका प्रयोग नहीं करेगा। खेमनेई के मुताबिक परमाणु हथियारों का प्रयोग इस्‍लाम में हराम है। खेमनेई के इस बयान पर लोग कई तरह से प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

 इस रास्‍ते पर नहीं चलेंगे

इस रास्‍ते पर नहीं चलेंगे

खामनेई के ऑफिस से ट्विटर पर एक वीडियो पोस्‍ट किया गया है। इस वीडियो में उन्‍हें कुछ शिक्षाविदों को परमाणु हथियारों को लेकर कई अहम बातें कहते हुए सुना जा सकता है। खामनेई ने कहा, 'हम इस रास्‍ते पर चलने से पहले कुछ कदम उठा सकते थे, इस्‍लामिक फैसलों के तहत हम इस बात पर मजबूती से यकीन करते हैं और बहादुरी से कहते हैं कि हम अब इस रास्‍ते पर नहीं चलेंगे।' उन्‍होंने आगे कहा, 'इस्‍लाम में परमाणु हथियारों का निर्माण और इनका ढेर इकट्ठा करना हराम है।' खामनेई ने आगे कहा कहा, 'अगर हमारे पास परमाणु हथियार होता तो फिर यह बहुत ही वाजिब था कि इसका प्रयोग कहीं भी रोक पाना असंभव होता। इस्‍लाम के सिद्धांतों में यह निश्चित तौर पर हराम है।'

 परमाणु हथियार पर ईरान का रुख

परमाणु हथियार पर ईरान का रुख

ईरान हर बार इस बात से इनकार करता आया है कि उसके पास किसी तरह का कोई परमाणु हथियार है। ईरान की मानें तो उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से ऊर्जा उत्‍पादन और मेडिकल के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पिछले वर्ष मई में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अमेरिका को उस डील से बाहर कर लिया था जो साल 2015 में पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी। ओबामा के समय में हुई इस डील में परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण के बदले में ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अमेरिका की तरफ से ढील दी गई थी।

कौन हैं खामनेई

कौन हैं खामनेई

अयातुल्‍ला खामनेई सन् 1981 से 1989 तक ईरान के राष्‍ट्रपति रहे हैं। इस समय वह ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। वह मिडिल ईस्‍ट के किसी देश में अपने देश का नेतृत्‍व करने वाले दूसरे नेता हैं। सिर्फ इतना ही नहीं ईरान के शाह मोहम्‍मद रजा पहलावी के बाद इस सदी में पहले नेता हैं जो इतने लंबे समय से ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। उनके आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक खामनेई को छह बार गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मोहम्‍मद रजा के शासन में उन्‍हें तीन साल के लिए निर्वासन में भेज दिया गया था। जून 1981 में उन पर हमला किया गया था और कहते हैं कि इस हमले में उनके बांया हाथ पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया।

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