Iran-Israel War: Fattah-2, Shahab-3, Haj Qasem… ईरान की ऐसी मिसाइलों ने इजराइल में मचाई तबाही! जानें खासियत?
Iran-Israel War: ईरान और इजराइल के बीच तनाव एक बार फिर 1 अक्टूबर को चरम पर पहुंच गया, जब ईरान ने इजराइल पर कम से कम 180 मिसाइलें दागीं। यह हमला तेहरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा गाजा, लेबनान, और अपने शीर्ष नेताओं की हत्याओं का बदला लेने के लिए किया गया।
हमले में जिन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, उनमें से प्रमुख फत्ताह-2, शाहब-3, और हज कासिम मिसाइलें थीं। आइए जानते हैं इन मिसाइलों की खासियत और ईरान के इस हमले के पीछे का मकसद...

फत्ताह-2 हाइपरसोनिक मिसाइल (Fattah-2 Hypersonic Missile)
इस मिसाइल को ईरान ने पहली बार हमले में इस्तेमाल किया। यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से चलती है और इसे सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक माना जाता है। इसकी रफ्तार लगभग मैक 13 (16,000 किमी/घंटा) है, जो इसे बेहद तेज और मारक बनाती है। इस मिसाइल की खासियत यह है कि यह जटिल और अप्रत्याशित मार्गों पर यात्रा कर सकती है, जिससे इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

फत्ताह-2 मिसाइल के ठोस ईंधन बूस्टर और ग्लाइडिंग वारहेड इसे हाइपरसोनिक क्रूज ग्लाइड व्हीकल (HCGV) की श्रेणी में लाते हैं। ईरान ने दावा किया है कि यह मिसाइल अमेरिका और इजराइल की उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों को चकमा दे सकती है।

शाहब-3 बैलिस्टिक मिसाइल (Shahab-3 Missile)
शाहब-3, ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका उपयोग 2003 से किया जा रहा है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 760 से 1,200 किलोग्राम तक की है, और इसे मोबाइल लॉन्चर्स या साइलो से भी दागा जा सकता है। यह मिसाइल ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की नींव मानी जाती है और इसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माना जाता है।
1 अक्टूबर 2024 को, हुए हमले में शाहब-3 के इमाद और कादर वेरिएंट्स का इस्तेमाल किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका इंजन स्कड मिसाइलों के समान है, लेकिन इससे अधिक दूरी तक मार कर सकता है, जिससे इसे लंबी दूरी के हमलों में उपयोगी माना जाता है।

हज कासिम मिसाइल (Haj Qasem Missile)
हज कासिम, जो कि एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, का इस्तेमाल भी इस हमले में किया गया। यह मिसाइल 1,400 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है और इसका वारहेड वजन 500 किलोग्राम है। हज कासिम मिसाइल का नाम जनरल कासिम सुलेमानी के नाम पर रखा गया, जिनकी 2020 में अमेरिका द्वारा हत्या कर दी गई थी। ईरान के कमांडरों का कहना है कि यह मिसाइल दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को पार कर बिना पता लगे लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
ईरान के मिसाइल हमलों का असर
ईरान के इस हमले से इजराइल में हवाई हमले के सायरन बजने लगे और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हालांकि, इजराइल के आयरन डोम और एरो-2 सिस्टम्स ने अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान की "बड़ी गलती" बताते हुए चेतावनी दी कि इसकी कीमत तेहरान को चुकानी पड़ेगी।
ईरान के मिसाइल शस्त्रागार की क्षमता
ईरान का मिसाइल शस्त्रागार काफी बड़ा है और इसमें सैकड़ों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी रेंज अलग-अलग है। अमेरिकी वायुसेना के जनरल केनेथ मैकेंजी के अनुसार, ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, और वह लगातार नए भूमिगत मिसाइल डिपो का निर्माण कर रहा है। ईरान का मिसाइल कार्यक्रम काफी हद तक उत्तर कोरिया और रूस के डिजाइनों पर आधारित है, जिसमें चीनी सहायता का भी योगदान है।
ईरान द्वारा लॉन्च की गई फत्ताह-2, शाहब-3 और हज कासिम जैसी मिसाइलों ने इस संघर्ष को और अधिक गंभीर बना दिया है। इजराइल की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने इन मिसाइलों का जवाब देने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन इस तनावपूर्ण माहौल में आने वाले समय में और भी बड़े हमले हो सकते हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजराइल ने कोई जवाबी कार्रवाई की, तो वह और अधिक मिसाइल हमले करेगा।












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