Iran Israel War: क्यों Khamenei की मौत चाहते हैं नेतन्याहू-ट्रंप? कैसे चुना जाता है ईरान का सुप्रीम लीडर?

Iran Israel War News: ईरान और इजरायल के बीच सात दिनों से जारी जंग ने दुनिया को सांसत में डाल दिया है। 650 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, और तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच, अमेरिका और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की एंट्री ने माहौल को और गर्म कर दिया है। युद्ध अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर और डिजिटल मोर्चे पर भी लड़ा जा रहा है।

इजरायल ने 19 जून 2025 को ईरान के अरक परमाणु ठिकाने पर हमला किया, तो ईरान ने तेल अवीव और बीरशेबा के अस्पताल व स्टॉक एक्सचेंज को निशाना बनाया। दोनों देशों में शांति की कोई कोशिश नजर नहीं आ रही। इस जंग के केंद्र में एक बड़ा सवाल है- आखिर क्यों इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत चाहते हैं? और अगर ऐसा हुआ, तो ईरान में नया सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाएगा? आइए, जानते हैं पूरी कहानी...

Iran Israel War

खामेनेई की जान के पीछे क्यों पड़े हैं नेतन्याहू-ट्रंप?

ईरान और इजरायल की जंग का मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। इजरायल के दो बड़े लक्ष्य है-

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म करना: इजरायल का मानना है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम उसके लिए 'वजूद का खतरा' है। इसीलिए उसने अरक, नतांज, और खोंडाब जैसे परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए।
  • IRGC का खात्मा: इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है, जो सुप्रीम लीडर के सीधे नियंत्रण में काम करती है। इजरायल ने IRGC के शीर्ष कमांडरों जैसे हुसैन सलामी और मोहम्मद काजमी को निशाना बनाया।

नेतन्याहू की नजरों में खटक रहे खामेनेई!

इजरायल और अमेरिका का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अली खामेनेई (Ali Khamenei) का होना सबसे बड़ी बाधा है। 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर हैं और देश की हर नीति, सैन्य रणनीति, और विदेशी मामलों पर उनका अंतिम फैसला होता है। हाल ही में, नेतन्याहू ने ABC न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि खामेनेई को निशाना बनाना जंग को बढ़ाएगा नहीं, बल्कि खत्म कर देगा। इजरायल का मानना है कि खामेनेई की हत्या से ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है, जिससे उसका परमाणु कार्यक्रम और IRGC कमजोर पड़ जाएंगे। नेतन्याहू ने Fox न्यूज पर कहा कि ईरान का शासन कमजोर है। 80% जनता इन धार्मिक कट्टरपंथियों को सत्ता से हटाना चाहती है।

'अभी हम खामेनेई को नहीं मारेंगे', ट्रंप ने क्यों कहा?

हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में इजरायल के खामेनेई की हत्या के प्रस्ताव को वीटो कर दिया। Reuters और CBS न्यूज की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को कहा कि यह 'अच्छा विचार नहीं' है, क्योंकि इससे जंग और भड़क सकती है। ट्रंप ने Truth Social पर लिखा, 'हम जानते हैं कि खामेनेई कहां छिपे हैं। वह आसान निशाना हैं, लेकिन अभी हम उन्हें नहीं मारेंगे।'

ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है?

ईरान में सुप्रीम लीडर का पद दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक या राजशाही सिस्टम से अलग है। यह धार्मिक और राजनीतिक सत्ता का अनूठा मिश्रण है, जो इस्लामिक रिपब्लिक की नींव पर टिका है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं-

88 सदस्यों की यह सभा सुप्रीम लीडर को चुनती है। इसके सदस्य 8 साल के लिए जनता द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन उम्मीदवारों को गार्जियन काउंसिल की मंजूरी चाहिए। गार्जियन काउंसिल में 12 सदस्य होते हैं। इसमें 6 धार्मिक विद्वान सुप्रीम लीडर द्वारा नियुक्त, और 6 न्यायविद संसद द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन मुख्य न्यायाधीश (जो सुप्रीम लीडर द्वारा नियुक्त) की सिफारिश पर।

अगर सुप्रीम लीडर की मृत्यु या अक्षमता होती है, तो असेंबली तुरंत बैठक करती है और नया लीडर चुनती है (संविधान का अनुच्छेद 111)। गार्जियन काउंसिल के जरिए सुप्रीम लीडर का असेंबली पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण होता है। उम्मीदवारों का चयन इतना सख्त होता है कि केवल वही लोग चुने जाते हैं, जो मौजूदा शासन के प्रति वफादार हों। इसीलिए यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक कम, बल्कि धार्मिक-नियंत्रित ज्यादा है।

नया लीडर आने तक किसके हाथ कमान?

सुप्रीम लीडर का पद खाली होने पर राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, और गार्जियन काउंसिल का एक धार्मिक सदस्य मिलकर एक अस्थायी परिषद बनाते हैं, जो तब तक काम संभालती है, जब तक नया लीडर नहीं चुना जाता।

खामेनेई के बाद कौन?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई ने अपने बेटे मुजतबा खामेनेई को उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार किया है। कुछ खबरों में दावा है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने गुप्त बैठक में इस पर मुहर लगा दी।

ईरान का पावर स्ट्रक्चर कैसा?

  • सुप्रीम लीडर: खामेनेई सेना, न्यायपालिका, संसद, और राष्ट्रपति पर नियंत्रण रखते हैं।
  • गार्जियन काउंसिल: अहमद जन्नती के नेतृत्व में यह तय करती है कि कौन चुनाव लड़ सकता है।
  • असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स: मोहम्मद अली मोवाहेदी केरमानी के नेतृत्व में सुप्रीम लीडर चुनती है।
  • न्यायपालिका: मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसिनी एजई, खामेनेई द्वारा नियुक्त।
  • IRGC: जनरल अब्दुल रहीम मूसवी के नेतृत्व में सैन्य और विदेश नीति में दखल।
  • IRIB (स्टेट मीडिया): खामेनेई के नियंत्रण में जनता तक पहुंचने वाली खबरें।

क्या होगा अगर खामेनेई की हत्या हुई?

खामेनेई की हत्या से तत्काल सत्ता परिवर्तन की संभावना कम है। CBS न्यूज से बातचीत में वाशिंगटन इंस्टीट्यूट की होली डाग्रेस ने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक का सिस्टम एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नया लीडर चुनने के लिए तैयार है।'

हालांकि, इजरायल और अमेरिका को लगता है कि खामेनेई की मौत से ईरान में अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे शासन कमजोर हो सकता है। लेकिन पूर्व इजरायली राजनयिक एलन पिंकस ने कहा कि 10 मिलियन की आबादी वाला इजरायल 90 मिलियन के ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं ला सकता।'

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