ईरान में अराजकता चरम पर, लेकिन सरकार को अमेरिका और सऊदी से लगा डर
तेहरान। ईरान में हिंसा चरम पर है, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़पों में अब तक दो लोगों की मौत हजारों लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर है, लेकिन ईरान को डर सता रहा है कि कहीं अमेरिका और सऊदी अरब इसका गलत फायदा उठा सकते हैं। देश में जारी हिंसा के बीच ईरान के पूर्व राजदूत और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका और सऊदी अरब देश में फैली अराजकता का गलत फायदा उठा सकती है।

सऊदी और अमेरिका उठा सकते हैं फायदा
ईरान के पूर्व राजदूत हामिद रेजा असेफी ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि सऊदी सरकार और अमेरिका (ईरान) लोगों की आर्थिक मांग को लेकर चल रहे तनाव और देश में फैली अराजकता की स्थिति का राजनीतिक लाभ उठा सकती है। इस अराजकता का अमेरिका और सऊदी अरब जैसे मुल्क अपना राजनीतिक लाभ ना उठा पाए इसके लिए ईरान को सतर्क रहना होगा।

ट्रंप ने कर दिया हस्तक्षेप
बता दें कि ईरान में फैली हिंसा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक के बाद एक ट्वीट कर संकेत दे दिए है कि वे इस मामले को अनौपचारिक रूप से हस्तक्षेप करने की कोशिश करेंगे। ट्रंप के ट्वीट से स्पष्ट होता है कि वे ईरान में प्रदर्शनाकारियों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने ईरान में फैली हिंसा पर तीन ट्वीट किए हैं। ट्रंप ने लिखा है कि ईरान के अच्छे लोग अपने देश में बदलाव चाहते हैं और वहां कि सरकार उनके हितों को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ईरान में जो कुछ भी हो रहा है, वो पूरी दुनिया देख रही है।

सऊदी से है पुरानी दुश्मनी
वहीं, दूसरी ओर सऊदी अरब ने भले ही मसले पर कुछ नहीं बोला है, लेकिन ईरान को डर सता रहा है कि इसमे सऊदी कूदने की कोशिश जरूर करेगा। सऊदी अरब पिछले कई सालों से यमन में चल रहे गृह युद्ध के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराता आया है। सऊदी अरब का आरोप है कि यमन में प्रदर्शनकारियों को हथियार उपलब्ध ईरान अराजकता फैलाने का काम कर रहा है। हाल ही के दिनों में यमन में हुति विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर भी मिसाइलें दागी थी।












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